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Kamaldeep Kaur

Tragedy

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Kamaldeep Kaur

Tragedy

आंसू

आंसू

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अजनबी शै थी खुशी,

कुछ दिन का साथ निभा गई।

हंसते पलों के साथ ही,

गम के आंसू दे गई।

खुद अपनी बेबसी की हंसी यूं उड़ाई,

आए जो अश्क आंख में तो मुस्कराहट आ गई।

क्या समझाएं असलियत खुश्क आंखों की,

गम की दास्तान कुछ यूं छुपाई गई।।


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