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Kamaldeep Kaur

Inspirational Others

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Kamaldeep Kaur

Inspirational Others

अजीब है दुनिया

अजीब है दुनिया

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 बाहर से यारी भीतर तो मनमुटाव है।

इस दुनिया के चलन का अजीब रख रखाव है।

छोड़ जाए महफिल तो भूल जाते हैं लोग।

अपनों का अपनों पर ऐसा ही घाव है।

अनेकों तूफान सतह पर खामोश हैं।

समंदर में लगता बहुत गहरा तनाव है।।



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