अजीब है दुनिया
अजीब है दुनिया
बाहर से यारी भीतर तो मनमुटाव है।
इस दुनिया के चलन का अजीब रख रखाव है।
छोड़ जाए महफिल तो भूल जाते हैं लोग।
अपनों का अपनों पर ऐसा ही घाव है।
अनेकों तूफान सतह पर खामोश हैं।
समंदर में लगता बहुत गहरा तनाव है।।
