Kamaldeep Kaur
Inspirational Others
बाहर से यारी भीतर तो मनमुटाव है।
इस दुनिया के चलन का अजीब रख रखाव है।
छोड़ जाए महफिल तो भूल जाते हैं लोग।
अपनों का अपनों पर ऐसा ही घाव है।
अनेकों तूफान सतह पर खामोश हैं।
समंदर में लगता बहुत गहरा तनाव है।।
अजीब है दुनिय...
हिम्मत।।
इकरार
जिंदगी बदलती ...
नई शुरुआत, नए...
श्री गुरु अर्...
चाहते हो तो.....
आंसू
नए अरमान सजात...
अभी बाकी है
ये कविता पिता और परिवार के रिश्तों का आयना है । ये कविता पिता और परिवार के रिश्तों का आयना है ।
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
लाखों पीड़ा ह्रदय में समेटे तुम सब का बिहार हूँ मैं! लाखों पीड़ा ह्रदय में समेटे तुम सब का बिहार हूँ मैं!
ताज के आम हीरो ' (Based on the events of 26/11) ताज के आम हीरो ' (Based on the events of 26/11)
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
रोम रोम को झंकृत कर देने की शक्ति समाहित किये हुऐ आपके प्रिय कवि विद्रोही का श्रृंगार और करुण रस का ... रोम रोम को झंकृत कर देने की शक्ति समाहित किये हुऐ आपके प्रिय कवि विद्रोही का श्र...
तुम दर्द को मुस्कराहट में दबा दो, तुम हर गम को दिल से हटा दो। तुम दर्द को मुस्कराहट में दबा दो, तुम हर गम को दिल से हटा दो।
हौसलों की उड़ान में, इरादों को मकसद बनाकर तो देखो; प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से कदम उठाकर तो देखो... हौसलों की उड़ान में, इरादों को मकसद बनाकर तो देखो; प्रगति पथ पर तुम, हिम्मत से क...
कहानी थी, अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा I कहानी थी, अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा I
जो अँधेरा मुझे निगल गया था वही मेरी बच्ची के भविष्य की ओर बढ़ रहा था लेकिन अब मेरे विद्रोह के ज्वाल... जो अँधेरा मुझे निगल गया था वही मेरी बच्ची के भविष्य की ओर बढ़ रहा था लेकिन अब म...
, आज़ाद सही मायनों में और फिर से मनाययेगें उत्सव स्वतंत्रता का। , आज़ाद सही मायनों में और फिर से मनाययेगें उत्सव स्वतंत्रता का।
गलत शब्द प्रयोग करें तो होती है बड़ी निराशा। गलत शब्द प्रयोग करें तो होती है बड़ी निराशा।
मैं भी खुद से विमुख खुद की जड़ें ढूँढने लगती हूँ ...।। मैं भी खुद से विमुख खुद की जड़ें ढूँढने लगती हूँ ...।।
आंसू मोती से अनमोल , विक्षिप्त होकर न व्यर्थ बहाओ। आंसू मोती से अनमोल , विक्षिप्त होकर न व्यर्थ बहाओ।
ना जाने कैसे उसकी माँ रात भर सोए होगी, उसके सीने में गोली लगने से पहले वो रोई होगी। ना जाने कैसे उसकी माँ रात भर सोए होगी, उसके सीने में गोली लगने से पहले वो रो...
हो भाग्यहीन तुम, नहीं जन्मीं कन्या तुमने, कन्यादान है महादान। हो भाग्यहीन तुम, नहीं जन्मीं कन्या तुमने, कन्यादान है महादान।
ये कविता उन सब लोगों को समर्पित है जो अपंग होते भी ज़िन्दगी से हार नहीं मानते, डटे रहते हैं, ज़िन्दगी... ये कविता उन सब लोगों को समर्पित है जो अपंग होते भी ज़िन्दगी से हार नहीं मानते, ड...
मुस्कराकर अपनी ही ख्वाहिशों को तोड़ देता है शायद उसे ही पिता कहते हैं। मुस्कराकर अपनी ही ख्वाहिशों को तोड़ देता है शायद उसे ही पिता कहते हैं।
भक्ति में प्रभु रंग में रंग जाना प्यार है राम नाम से जिंदगी का सार पाना प्यार है। भक्ति में प्रभु रंग में रंग जाना प्यार है राम नाम से जिंदगी का सार पाना प्यार ...
छत की सरजमी भी बड़ी प्यारी है जनाब, दिखाती है नजरों को दिन में ख्वाब। छत की सरजमी भी बड़ी प्यारी है जनाब, दिखाती है नजरों को दिन में ख्वाब।