STORYMIRROR

Satish Chandra Pandey

Classics

4  

Satish Chandra Pandey

Classics

आजकल वे कटे से रहते हैं

आजकल वे कटे से रहते हैं

1 min
198

ठंड में लब फटे से रहते हैं

आजकल वे कटे से रहते हैं,


दूर कितना भी चले जायें पर

दिल व साँसों से सटे रहते हैं।


कभी करीब आते हैं फिर

कभी दूर हटे रहे रहते हैं,


नैन अपने भी हठीले से हैं

हर घड़ी उन में डटे रहते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics