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Satish Chandra Pandey

Classics

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Satish Chandra Pandey

Classics

आजकल वे कटे से रहते हैं

आजकल वे कटे से रहते हैं

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ठंड में लब फटे से रहते हैं

आजकल वे कटे से रहते हैं,


दूर कितना भी चले जायें पर

दिल व साँसों से सटे रहते हैं।


कभी करीब आते हैं फिर

कभी दूर हटे रहे रहते हैं,


नैन अपने भी हठीले से हैं

हर घड़ी उन में डटे रहते हैं।


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