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हरीश कंडवाल "मनखी "

Fantasy

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हरीश कंडवाल "मनखी "

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आईना बता

आईना बता

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आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है

धीर धीरे उनको अपना जो बनना है

उनके दिल में रहना है उनकी नैनों में समाना है

मुझे उनके प्यार का हर सितम उठाना है

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


आईना बता उनका कोई राज तू

मुझको बता उनकी कोई बात तू

धीरे धीरे मुझे उनके करीब जाना हैं

थोड़ा उन्हें हँसाना है, थोड़ा उन्हें तड़पाना है

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


बनकर साया प्यार का संग संग उनके जाना है

उनका घर है मेरा आँगन उसे सजाना है

अपना हर फर्ज मुझे खुशी से निभाना है

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


मेरे दिले मकान में वो हैं,

मेरे दिले आवाज में भी वो हैं

मुझे बनकर धड़कन प्यार की 

उनकी साँसों में समाना है

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


वो दीया है, हम बाती है उनकी

वह सुरों के संगम हैं हमें संगीत बन जाना है

मुझे उनके गीत का साज बन जाना है।

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


वो तो खुद शब्दों के गहराई के समुन्दर हैं

मुझे एक दिन उनके ख्वाबों की गजल बन जाना है

वो मेरी जीवन की राह, उनकी मंजिल बन जाना है

आईना बता कैसे उनका दिल चुराना है।


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