STORYMIRROR

Dr Lalit Upadhyaya

Drama

2  

Dr Lalit Upadhyaya

Drama

आई कैसी अब घड़ी है

आई कैसी अब घड़ी है

1 min
228

भ्रष्टाचार की जुड़ी कड़ी है,

एक दूसरे पर तोहमत मढ़ी है।


कौन लाएगा जादू की छड़ी है,

जनता हक के लिए लड़ी है।


ये आई कैसी अब घड़ी है,

करिश्मे के इंतज़ार में जनता खड़ी है।


बहुमत क्या होगा इस बार,

तय करने की मुश्किल बड़ी है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama