STORYMIRROR

KAVITA YADAV

Drama

3  

KAVITA YADAV

Drama

आई होली आई

आई होली आई

1 min
224

भूल जाओ भूल जाओ अपने सारे गम

गीले शिकवा दिल मे ना लाओ

आई होली आई।


लाल पीले नीले गुलाबी जो भी प्यारे रंग

रिश्तों को मजबूत बनाओ

लगाओ मिलकर कर रंग क्योंकि

आई होली आई।


मिले नहीं बरसो से,

लगा कर दिल पर बात

हर बात को भूल जाने का,

आया फागुन माह


तेरी मेरी किसी की भी ना,

शायद कोई गलती

पर अहम के कारण दूर रहे हम,

फालतू की ये मर्ज़ी


इन मर्जी ओर घमन्ड

को करना डर किनार

गले लगाने का आया

ये प्यारा सा त्योहार

क्योंकि आई होली आई होली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama