आदत
आदत
अपनी चाहत उनपे ही लुटा दी है
वो मेरी है यही आदत बना ली है
जानकर मुझसे जिंदगी की राहों को
उन्होंने अपनी राहें मुझमें मिला ली है
कुछ नही,बहुत बेहतर सा होगा सनम
अब तो बस तुझपे नजरें टिका दी हैं
बड़े अच्छे वो पल थे जो संग गुजारे थे
आज तेरे संग जीने की कसमें खा ली हैं
मुझको इंतजार तेरा हरदम रहता है
इसलिए तेरी सांसों को अपनी जां की पहरेदारी दी है
हां संग तेरे एक नया घर बसाया है
उसमें सारी उम्र की कमाई भी लगा दी है।

