STORYMIRROR

Sneha Srivastava

Abstract

3  

Sneha Srivastava

Abstract

आदत सी है

आदत सी है

1 min
268

याद रखने को तो गमों का समंदर है मेरे पास

पर क्या करूँ मुझे भूल जाने की आदत सी है।

ठहर जाने को तो सौ वजह है मेरे पास

पर क्या करूँ मुझे चलते जाने की आदत सी है।

बोलने को तो बहुत कुछ है मेरे पास

पर क्या करूँ मुझे चुप हो जाने की आदत सी है।

कहने को तो बहुत से हक़ हैं मेरे पास

पर क्या करूँ मुझे हक़ ना जताने की आदत सी है।

सब कुछ तबाह करने की ताकत है मेरे पास

पर क्या करूँ मुझे सिर्फ बनाने की आदत सी है।

अपनाने को तो मुझे हर एक ने अपना लिया

पर क्या करूँ मुझे अजनबी रहने की आदत सी है।

जानने को को तो बहुत कुछ जानता है ये दिल

पर क्या करूँ मुझे अनजान बने रहने की आदत सी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract