7)पेंटिंग बाय मिस्किन(31 )
7)पेंटिंग बाय मिस्किन(31 )
बस वही एक खूबसूरत पल है जब हो रहा सत्संग है।
भले ही वह जंगल है
लेकिन मुग्ध हर जानवर और जन है।
वृक्ष भी अपनी सुगंध बरसा रहे।
अपनी शीतल छाया डालकर गुरु पर हर्षा रहे।
यहां जानवरों को डर नहीं
क्योंकि कोमलता हो रही अग्रसर यही।
भूतकाल तो जा चुका
भविष्य अभी आया नहीं
यह एक पल ऐसा हुआ
मधुर ध्वनि बजी जो दैवीय
स्वर की,
जो जहां था वह वही ठहरा रहा।
बहुत से पुण्यों का फल है यह एक पल
जब भूत भविष्य छोड़कर वर्तमान में लग गया है मन।
सुगंध छटा अद्भुत दृश्य है मन को मोह रहा।
जाने क्यों लगता है ऐसा मैं भी किसी जन्म में था वहां पर ही रहा ?
