Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
डायन
डायन
★★★★★

© Sunita Sharma Khatri

Inspirational

4 Minutes   7.6K    34


Content Ranking

जब से पड़ोस में आयी .....एक एक कर सबको निगले जा रही है डायन .....!!!!

उसकी चमकती आँखों में एक अजीब से प्यास दिखती थी बाल लम्बे ...डायन की शक्ति उसकी चुटिया में होती है किसी तरह इसकी चुटिया कट जाये तो यह किसी का कुछ नही बिगाड़ पायेगी।

"अरी सुनती हो....! बगल के मकान में बिरजू रहता था। अकेला था सुबह मरा पड़ा मिला, क्यों ?? कैसे बहन जी, हट्टा कट्टा था वो तो कैसे मर गया अभी तो बेचारे का ब्याह भी न हुआ था "....

"काकी, यहां डायन जो आ गयी है! 

अब देखते रहो कौन कौन मरता है !"

"मेरी मु्र्गियां थी बारह... बची दस दो कहां गयी...दिनकर

 बड़बड़ा रहा था ...रामू तूने मेरी मू्र्गी तो नहीं चुरायी मैं क्यूं चुराऊंगा तेरी मू्र्गी, 

 ‎जा कहीं और जा के देख पागल कही का। "

" ‎दिनकर भैया ...जल्दी आओ" .. जा मुझे परेशान न कर रामू मैं तो पागल हूं, अब काहे मुझे बुला रहा है एक तो दो मुर्गी न जाने किसने चुरा ली मालिक मेरी पगार से पैसे काट लेगा और तू मुझे पागल कहता है, नहीं भैया वो अाप मुझे समझ रहे थे , मुर्गी चोर ! 

तो मैने कहा बाकी मुझे पता है आपकी मुर्गी किसने चोरी किसने जल्दी बता भाई !

 ‎ऊ कुबडे की बीवी ने जा कर..

 ‎देखो पका कर खा रही है ...डायन है ससुरी !!!

 ‎उसकों तो हम छोड़ेंगे नही ..

 ‎मुझ गरीब का पेट ही मिला काटने को |

" ‎जाने दो भैया ...वो उल्टे आपको भी खा जायेगी पका कर हां हां हां "....रामू हंसता हुआ भाग गया ।

 ‎"सीता . ..क्या है ‎

यहां बैठी इन लुगाईयों के साथ बात बना रही है देख कालू कहां गया..."

उ तो अपने दोस्तों के साथ तैलया पर नहाने के लिए गया है अभी तक नहीं आया क्या ?? 

नहीं तो ..घर पर कोई नहीं है अभी तक नहीं आया हाय राम दिन ढलने को है कालू ओ कालू " ..सीता अनहोनी की आशंका से तलैया की ओर दौड़ पड़ी पीछे हरिया भी भागा चला गया।

तलैया के किनारे भीड़ लगी थी बाल खोले डायन बच्चे के ऊपर झुकी हुई थी।

सीता और हरिया की चीख बढ़ गयी, "हाय दैया डायन हमार बचवा के ऊपर चढ़े क्या कर रही है " ??

देखा कालू लेटा हुआ था और उसके मुंह से पानी निकाल रहा था कुबडे की लुगाई जिसे गांव वाले डायन मानते थे कालू का पेट दबा कर डूबने के कारण पेट में जाने वाले पानी को बाहर निकाल रही थी।

"छोड़ डायन हमार बचवा को "....सीता ने उसे जोर से थक्का दिया और हरिया के संग मिल कालू के पेट का पानी बाहर निकालने लगे थोड़ी देर में कालू समान्य स्थिति में आ गया मां मां करता हुआ सीता से लिपट गया ," हमार कालू क्या रे कालू क्यो गया नहाने अगर तोहे कछु हो जाई तो हमार क्या होगा "

कालू सुबकने लगा हरिया बोला कालू तू पानी में कैसे डूबा "हम तलैया में गहराई में चले गये थे बापू बहुत गहरा था हम डूबने लगे थे बस हाथ ही बाहर थे किसी ने पकड़ कर खिंच लिया और हमका बचा लिया "

" कौन के "ऊ डायन ने ....

कालू ने इशारा किया कुबडे की लुगाई की तरफ जो घुटनों में सर छिपाये बैठी थी।

अब तक कुबडा भी वहां आ गया था।

"खबरदार जो मेरी लुगाई को डायन कहा।

सीता ने अपने आंसू पोछे बच्चे को सलामत देख वो खुश थी फिर हरिया का इशारा पा डायन के करीब जा उसे उठा कर बोली ,"ई डायन नाही हो सकत ई तो हमार तरह इंसान है। गांव में जो कौन तुम्हे डायन कहे रहे उ का हम देख लेई" |

कुबडा खुश हो गया ।

"भाभी बहुत धन्यवाद तोरा सब ईको डायन समझे रहे, ई तो खुद ही बेजुबान है बेचार गूंगी है। इस कर, कोई कुछ भी बोलता है तो बस टुकर टुकर ताकत है अपनी बड़ी बड़ी आँखों से बाकी हम जानते है हम जैसे कुबडे गरीब को अपनी लड़की ब्याह खातिर दे रहे। हमार बहुत सेवा करे है।"

कुबडे की बात सुन डायन उठ खड़ी हुई और उसका हाथ थाम वहां से चल पड़ी ..उसकी आंखे सूनी रही।

भीड़ चुप थी सीता और हरिया की आँखे अभी भी नम थी।

मुर्गी दरिया कुबड़ा

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..