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Sarita Kumar

Inspirational

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Sarita Kumar

Inspirational

झूठ एक "प्यारा सा झूठ "

झूठ एक "प्यारा सा झूठ "

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विज्ञान ने बहुत प्रगति की है बहुत तरक्की कर ली है फिर भी इंसानी दिमाग की शक्ति को कमतर नहीं आंका जा सकता है यह प्रयोगशाला में प्रयोग कर के साबित किया जा चुका है कि हम अपने दिमाग में सोच कर विचारों से जहर पैदा कर सकते हैं। फ्रांस के मनोवैज्ञानिकों ने एक कैदी पर प्रयोग किया था जिसे फांसी की सजा दी गई थी। मुकर्रर तारीख के आठ दिन पहले उस कैदी को बताया गया की सुनिश्चित तारीख को तुम्हें मौत की सजा मिलेगी लेकिन फांसी देकर नहीं बल्कि कोबरा सांप के काटने से मौत होगी। आठ दिन बाद नियत समय पर कोबरा सांप लाया गया उसे दिखाया भी गया उसके बाद उसके आंखों पर पट्टी बांध दी गई और दो सुई चुभोई गई। कुछ देर में ही उस कैदी की मौत हो गई और उसके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में देखा गया कि उसके शरीर में कोबरा सांप का जहर पाया गया है जबकि कोबरा सांप उसे काटा ही नहीं था चुकी 8 दिन पहले उसे बता दिया गया था कि कोबरा सांप उसे काटेगा इसलिए उसने अपने दिमाग में विचारों से कोबरा सांप का जहर पैदा कर लिया जो उसके पूरे शरीर में फैल गया और उसकी मौत हो गई। 

इस तरह यदि यह साकारात्मक , सुखद और स्वस्थ होने की बात सोचते हैं तो हमारे मस्तिष्क में एक हार्मोन का श्राव होता है जो पूरे शरीर में फैल जाता है और प्रतिक्रिया देने लगता है। अगर हम अच्छी बातें सोचेंगे तब सब कुछ अच्छा महसूस होने लगेगा और हम सचमुच ठीक हो जाएंगे। मेरा निजी अनुभव बहुत सुखद है जिसे साझा करना जरूरी समझ रही हूं। 9 अगस्त 2018 को फरीदाबाद के एक अस्पताल में मेरी स्पाइन की सर्जरी हुई थी जो कामयाब नही हो सकी डॉक्टरों से एक गलती हो गई मेरी आॅटरी वेन कट गई आप्रेशन थियेटर में अफ़रा-तफ़री मच गई मेरे पति और परिजनों को बता दिया गया सारे रिश्तेदारों को सूचित कर दिया गया। डॉक्टरों की राय थी कि अब मुझे बचाया नहीं जा सकता। मातम सा पसर गया था मेरे दोस्त और रिश्तेदारों ने मंदिर , चर्च , गुरूद्वारा और मजारों पर पूजा अर्चना अरदास और मिन्नतें मांगने लगे। सभी का चेहरा स्याह पड़ गया था। दूसरे दिन मुझे होश आया तो कोई मुझसे नज़रें नहीं मिला रहा था यहां तक की डॉक्टर, नर्स और कमपाउंडर तक। मेरे पति सुख कर काले पड़ गये थे उस कठिन वक्त पर मेरी छोटी बेटी ने हंसते हुए कहा था कि Congratulations तुम्हारा आप्रेशन सक्सेज हो गया अब तुम बिल्कुल ठीक हो गई हो उसके बाद उसने मेरे मोबाइल का एक मैसेज भी पढ़ाया जिसमें लिखा था "तुम अब बिल्कुल ठीक हो गई हो। बहुत जल्दी ही तुम पहले की तरह हंसोगी , बोलोगी , नाचोगी , गाओगी और वैसे ही खुब शैतानियां करोगी मैं तुमसे मिलने जल्दी ही आऊंगा।" मैंने इस बात पर यकीन किया और धीरे धीरे मेरी हालत में सुधार होने लगी 18 दिन मैं अस्पताल में रही मेरे साथ मेरी छोटी बेटी भी रही दिन रात और वो मुझे हमेशा हंसाती रहती थी। तरह-तरह की तस्वीरें खींचती थी और मजेदार गाना सुनाया करती थी। मुझे हॉस्पिटल भी जन्नत लगने लगा था। वहां का हर स्टाफ मुझसे अच्छा व्यवहार करता था। जिनकी ड्यूटी दूसरे वार्ड में हो गई थी वो लोग भी मिलने आते थे। मुझे अखबार पढ़ने की आदत थी तो मेरे बेड पर मेरा पसंदीदा अखबार मुहैया कराया गया। मेरी इतनी खातिरदारी की जा रही थी ....उनकी सोच चाहें जो हो मैं तो यही सोचती रही कि दुनिया बहुत खूबसूरत है और यहां के लोग बहुत स्नेही , फिक्रमंद और सहृदयी। शायद इसीलिए लोगों का व्यवहार भी मेरे प्रति बहुत अच्छा होता रहा। बिना दवा और इलाज के मैं ठीक होने लगी। जो साढ़े तीन साल तक बेड पर थी। मेरा दाहिना हाथ और दाहिना पांव सुन्न हो गया था। मैं चल नहीं पाती थी खड़ी नहीं हो सकती थी देश भर के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। हमारे पंडित, पुरोहित और ज्योतिषों ने भी दोहरी मारकेस योग बता कर मेरे मौत की तारीख़ मुकर्रर कर दी थी। लेकिन मुझे तो सिर्फ एक बात का यकीन था कि मेरे टीचर ने कहा है कि मैं ठीक हूं और बहुत जल्दी बिल्कुल ठीक हो जाऊंगी तब वो मिलने आएंगे। 34 साल से मैंने देखा भी नहीं है अपने गुरु जी को लेकिन उनका एक संदेश मेरे मृत शरीर में प्राण फूंक दिया और 2018 अगस्त के बाद आज 28 अप्रैल 2021 है। मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं। दिल्ली से अकेली बैंगलोर , बैंगलोर से पटना और पटना से दिल्ली आती-जाती हूं। चलती फिरती हूं , खाना बनाती हूं , गाना गाती हूं , पहाड़ों पर घूमने भी गयी थी 11 मार्च 2020 को ये और बात है कि वहां से लौटने के बाद कोरोना फैल गया लॉकडाउन हो गया और हम फिर से कैद हो गये लेकिन मेरा लूडो और कैरम चलता रहा और शाम को कभी बेटी और कभी अपने पति के साथ बैडमिंटन खेलती हूं। 

हैरानी हो रही होगी जिसकी रीढ़ की हड्डी कमर और गर्दन पर ज़ख्मी हो चुका है देश भर के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है उसे एक "झूठ" ने बिल्कुल ठीक कर दिया है। चुकी मेरे टीचर कभी झूठ नहीं बोलते थे और बातें भी बहुत कम करते थें इसलिए उनकी हर एक बात की बहुत कद्र करती थी और दूसरी सबसे बड़ी बात कि मुझे विश्वास था इसलिए मन में हमेशा साकारात्मक विचार आ रहे थे और साकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगा था मेरे आस-पास। मेरे पति और चारों बच्चों ने मेरी खूब सेवा की। मेरी हर इच्छा , हर ख्वाहिश , हर तमन्ना पूरी कर दी जाती रही। मैं हर पल स्वर्गिक आनन्द का अनुभव करने लगी। सब कुछ खुशनुमा लगने लगा और हम सभी का जीवन सचमुच खुशहाल हो गया।


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