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ashok kumar bhatnagar

Tragedy

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ashok kumar bhatnagar

Tragedy

खामोशियाँ प्यार की

खामोशियाँ प्यार की

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मैं डा विदिशा मनोविज्ञान में पी एच डी हूं और लोगो के चेहरे पढ़ने से उनके मन की बात जान लेती हूं। इसमें मुझे स्‍पे᠎̮शलाइˈज़ेश्‌न्‌ हैं और इसी में मैंने पी एच डी की हैं। वर्तमान में एक डिग्री कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की हेड हूँ। 


पिछले पंद्रह दिन बहुत व्यस्त रहे। लगभग दस साल बाद मैंने अपने परिवार को एक दूसरे से हंसते हुए और बात करते देखा हैं। मेरी ननद की शादी थी और घर में काम करने बाला कोई नहीं था। मेरे सास ससुर बहुत बूढ़े हैं और जवान बेटे की मौत से टूट गए हैं। शादी में कोई परेशानी नहीं हुई। मेरे पति की यूनिट से सैनिक और उसके दोस्त आर्मी अफसर आ गए थे। उन्हों ने शादी का सारा काम सम्हाल लिया था। सब कुछ ठीक टाक निपट गया। 


पंद्रह बरस पहले मैं इस घर में बहु बन कर आयी थी। दर बाजे पर एक चुलबुली लड़की खड़ी थी। जोर जोर से खिलखिला कर हंस रही थी और बोल रही थी ," बगैर नेक दिए आप अंदर नहीं जा सकते हैं और नेक में मुझे चार सोने की चूरी चाहिए बिलकुल भाभी जैसी। " मैं उसकी खिलखिलाती हंसी पर मोहित हो गयी और अपने हाथ से चार चूरी निकाल कर उस को दे दी। 


मेरे ससुराल का माहौल बहुत ही खुशनुमा था। सब लोग खूब हंसते थे और एक दूसरें से खूब बात करते थे। मेरी ननद मुझसे खूब बातें करती थी कभी अपने फ्रैंड की ,कभी रिश्तेदारी की ,कभी अपने भाई यानी मेरे पति की और खूब जोर से हंसती थी। कई बार मुझे उसे डाटना पड़ता था और मुझे उससे कहना पड़ता था ," इतनी बातें मत किया करो और इतनी जोर से मत हंसा करो। शादी हो के जब ससुराल जा योगी तब दिक्कत हो सकती हैं। 


उसका भाई जब यूनिट से घर आता था। डाइनिंग रूम में ही उस को रोक लेती थी और अपने भाई से बोलती थी ," आप जो भाभी और मेरे लिए गिफ्ट लाये हो उसे अलग अलग कर दो। " वो देखती थी कि उसके और मेरे गिफ्ट बराबर हैं तो वो थोड़ा सैड हो जाती थी और तब उसका भाई एक ऐक्स्ट्रा गिफ्ट जो उसकी जेब में होती थी मुस्कराते हुए अपनी बहिन को देता था। और वो खुश हो कर एक विजयी मुस्कान के साथ चली जाती थी। 


कभी कभी वो कॉलेज से आती थी और चुपचाप बैट जाती थी। तब घर बहुत उदास लगता था। मैं उसके पास जाती और उसके पेट में गुद गुदी करती और कहती ," लाडो जी आज कैसे मूड ऑफ हैं। क्या किसी लड़के से इश्क़ हो गया हैं। "


वो कहती ," भाई की याद आ रही हैं। जब मैं आप से बात करती हूँ और हंसती हूँ। आप मुझ को डाट देती हो। मेरा भाई मुझे कभी नहीं डाटता हैं। चाहे में उसके सामने कितनी भी जोर से हंसू या में उससे कितनी भी बात करू। " और जब में उससे सौरी बोलती। वो बच्चे की तरह खुश हो जाती थी। 


मेरे ससुर बहुत ही हंसमुख थे। खाने बनाने में बहुत ऐक्सपर्ट थे और किचन में मेरी बड़ी मदद करते थे और भाँति भाँति पकवान बनाने के लिए कहते थे। इस चक्कर में वो  मेरी सास से डाट खा जाते थे। 


मैं बहुत जल्दी प्रिग्नेंट हो गयी थी और शादी की पहली बरसगॉँठ पर मैं एक बेटी की माँ थी। मेरे परिवार के सब लोग बहुत खुश थे। लेकिन उनकी यह खुशी ज्यादा समय रह ना सकी। मेरे पति कारगिल में दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हो गए। घर की सारी खुशीआं गायब हो गयी।मैंने अपनी ननद को उसके भाई की बॉडी से बहुत बुरी तरह से चिपकते हुए रोते हुए देखा था। इसके बाद ना तो मैंने उसे हंसते हुए देखा और ना ही उसे बात करते देखा। बस स्कूल जाना। कुछ देर अपनी भतीजी से बात करना। ज्यादातर अपने कमरे में रहना। 


मैंने एक बात नोट की। रात के समय मेरी बेटी अपनी बुआ के के साथ छत पर चले जाते हैं और लगभग दोनों आधा घंटे बाद लोट ते हैं। फिर दोनों अपने अपने कमरों में चले जाते हैं। मैं समझ ही नहीं पायी थी की आखिर यह दोनों छत पर जा कर ,' क्या करते हैं ?"। 


और मैंने एक दिन उनके पीछे जाने का फैसला कर लिया। मैंने छत पर जाकर देखा वो दोनों बुआ भतीजी एक चमकते हुए तारे को देख कर एक साथ बोलती हैं ," यह रहे पापा। यह रहे भैया "। फिर दोनों उस तारे को हाथ हिला कर बाय बाय करते हैं। चुप चाप रोते हैं। एक दूसरें के आंसू पोछते हैं और नीचे आ जाते हैं। मैं स्तब्ध रह गयी। मेरी इच्छा हुई मैं भी उन दोनों के साथ पहुँच जाऊ और खूब रोऊँ । मगर मैं ऐसा कर ना सकी। 


बेटी के नीचे आने पर मैंने उससे पूछा ," आप और बुआ छत पर जा कर क्या करते हो ? " बेटी बोली ," जब मैं आपसे बार बार पूछती थी की पापा कहाँ चले गए ? पापा घर क्यों नहीं आते ? और आप कोई जबाब नहीं देते थे। तब एक दिन बुआ मुझे छत पर ले गयी। बुआ ने मुझे बताया की उसके पापा देश के लिए शहीद हो गए हैं। जो देश के लिए शहीद होते हैं ,तारा बन जाते हैं और आकाश से हम सबको देखते हैं। हम छत पर पापा से मिलने और उनको देखने गए थे। 


अपने बेटे यानी मेरे पति की मौत के बाद मैंने अपने ससुर को कभी हंसते हुए नहीं देखा। मैं उनसे पूछती हूँ ," पापा आज क्या खायोगे ?" और वो बहुत धीमी अबाज में कहते हैं ," कुछ भी। " कई बार मैंने उनको अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाए चुपचाप घर के किसी कोने में रोते हुए देखा हैं।


 मैंने अपने ससुर को मेरी बेटी यानी अपनी पोती को गोद में लेकर उसके बालों को चूमते हुए चुपचाप रोते हुए देखा हैं। मैं मन मसोस कर रह गयी हूँ। लेकिन मैं कुछ कर नहीं पायी हूँ। ऐसा ही हाल मेरी सास का हैं। वो हमेशा अपने बेटे की ऐल्बम अपने साथ रखती हैं और रोतींहैं। 


अब मेरी ननद का कमरा खाली हो गया हैं। यह सोच कर मैं उसके कमरे को साफ़ करने गयी हूँ। उसकी अलमारी को साफ़ करते हुए एक पैकेट नीचे गिर गया हैं। मैंने उस पैकेट को खोला हैं और मैं अवाक रह गयी हूँ। उसमे कार्ड हैं ,बर्थ डे विश के , मैरिज डे विश के ,रक्षा बंधन की राखी हैं और भाई दूज के मेरे पति के फोटो पर टीके हैं।

                 

जो मेरी ननद ने अपने भाई को लिखे हैं। इसका मतलब कि यह जानते हुए भी की उसका भाई इस दुनिया में नहीं हैं वो उसे बर्थ डे और मैरिज डे विश करती रही तथा राखी भाई दूज का त्यौहार अपने भाई के साथ मनाती रही |अब मेरे सब्र का बाँध टूट गया हैं। जिन आंसुओ को वो इतने समय से रोक रही थी ,वो बह रहे थे। ननद के दिए गिफ्ट को सीने में लगाए हुए मैं रो रही हूँ।



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