Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
बाप रे बाप!
बाप रे बाप!
★★★★★

© Mohanjeet Kukreja

Comedy Drama Thriller

4 Minutes   8.4K    20


Content Ranking

वैधानिक चेतावनी: धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है!



अनिल दिल्ली का ही था; अपने परिवार के साथ लाजपत नगर में कहीं रहता था। एक दिन मैं और मेरा यह दोस्त एक उबाऊ लेक्चर बंक करके कॉलेज के सामने वाले उस छोटे से ढाबे पर बैठे हुए थे, जहाँ हम सबका काफ़ी आना-जाना था। ख़ाली बैठे गप-शप करते मैंने चाय के लिए इशारा कर दिया। पाँच मिनट से भी कम समय में गर्म चाय के दो गिलास हमारी मेज़ पर थे। इससे पहले कि हम अपना-अपना गिलास उठाते, अनिल उठा और ढाबे की बगल में स्थित पान-बीड़ी वाली छोटी सी दुकान से एक विल्स नेवी कट का पूरा पैकेट और एक माचिस ले आया। ब्रांड उन दिनों मेरा भी वही था, मगर मैं तब पैकेट नहीं, एक-दो सिगरेट ही ख़रीदा करता था।


उसने एक सिगरेट निकाल कर मुझे थमाई, दूसरी अपने होठों में दबा कर बड़ी दक्षता से दोनों को सुलगाया।


"माचिस से सिगरेट सुलगाने में एक्सपर्ट हो गए हो!" मैंने तारीफ़ की, क्यूँकि मुझे वो काम तब लाइटर से ही आसान लगता था।

"शुक्रिया!" वो मुस्कुराया, और हम दोनों ने अपनी-अपनी चाय उठा ली।

"यार, कल पता है क्या हुआ," अनिल अचानक बोला, "बड़ी मुसीबत में फंस गया था मैं..."

"क्यों? क्या हुआ?" मैं जानने को उत्सुक था।

"कल रिश्तेदारी में एक शादी थी," उसने शुरू किया, "मोटी पार्टी है..."

"तो?!"

"चल तुझे पूरी बात बताता हूँ।" वह ख़ाली गिलास मेज़ पर रखते हुए बोला, "महरौली-गुडगाँव रोड़ पर किसी बैंक्वेट हाल में शादी थी।"

"हम्म!" मैंने भी अपनी चाय ख़त्म की और गिलास रखता हुआ बोला, "उस महंगे इलाक़े में शादी-ब्याह फ़ैशन ही हो गया है आज-कल।"

"छोटी बहन के बोर्ड-एग्ज़ाम्स चल रहे हैं, जिसके चलते मेरी मम्मी भी नहीं जा पायी।" अनिल बोला, "मुझे न सिर्फ़ शादी में जाना पड़ा, पापा को भी अपने साथ बाइक पर ले जाना पड़ा!"

"ठीक है, भाई! तो ग़लत क्या है इसमें?"

"यार तू मेरे बाप को जानता नहीं! पीछे बैठ कर सारा रास्ता सेफ़ ड्राइविंग पर उपदेश झाड़ते रहे..."

"माँ-बाप को बच्चों की फ़िक्र रहती ही है, यार।"

"अब तू तो लेक्चर मत दे!" अनिल थोड़ा चिढ़ा हुआ था, "पहले ही लगी पड़ी है।"

"अरे, हुआ क्या?"

"वो एक बड़ा सा फ़ार्म-हाउस निकला, जिसको पूरी राजसी शानो-शौक़त के साथ सजाया हुआ था; बाक़ी तो छोड़, दारु भी सर्व कर रहे थे - खुले-आम! और मुझे अपने पापा की वजह से शरीफ बच्चा बनके, मन मार कर बैठना पड़ रहा था!"

"अच्छा; तो जनाब इसलिए फुंके पड़े हैं!"

"नहीं, और भी तो लोचा हो गया!"

"अच्छा! अब और क्या?" मैंने पूरी तवज्जो उसकी तरफ़ की।"

"पहले पापा ने शगुन-वगुन दिया। फिर साले उस छप्पन-भोग की बढ़िया दावत ख़त्म करते ही पापा एकदम से उठे, और मुझे वहीं बैठा रहने को कह कर पंडाल से बाहर की ओर चल दिए। उनको मेरे बारे में नहीं पता, लेकिन मैं जानता हूँ कि पापा सिगरेट पीते हैं - बड़ी गोल्ड फ्लैक... दिन में सिर्फ़ एक, और वो भी रात को खाने के बाद!"

"वाह! क्या कंट्रोल है, यार!"


"कोई प्रॉब्लम है, पापा ?" मैंने कुछ देर बाद उनको थोड़ा परेशान-हाल वापिस आते देख कर पूछा।

"अनिल बेटा," उन्होंने बताया, "आस-पास कोई सिगरेट की दुकान ही नहीं है!"

"पापा, यह जगह शहर से बाहर जो है ! मैंने अपनी राय ज़ाहिर की, "आप रुकिए, मैं देख कर आता हूँ !"

बाहर आकर थोड़ा दूर पहुँचते ही मैंने जेब से अपना पैकेट निकाला और एक सिगरेट निकाल कर ताबड़तोड़ फूँकनी शुरू कर दी, जैसे साला सदियों के बाद सिगरेट मिली हो! फिर थोड़ा आस-पास घूम कर देखा, कोई दुकान, कोई घर, कुछ नहीं था। पान-बीड़ी का ठीया तो कहाँ से होता! मैंने आख़िर कुछ सोच कर अपने ही पैकेट में से एक सिगरेट निकाली और पंडाल में लौट आया, जहाँ मेरा बाप मुझसे ज़्यादा सिगरेट के इंतज़ार में परेशान बैठा था…

"पापा, आपका ब्रांड तो नहीं मिला..." मैंने सिगरेट और माचिस उनकी तरफ़ बढ़ाते हुए कहा।

"कोई बात नहीं;" कोई और विकल्प तो था नहीं, सो उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी उसी को क़ुबूल कर लिया।

मैं उनके पास ही बैठ कर उनको धुँआ उड़ाते देखता रहा।

"लेकिन एक बात तो बता बेटा!" दो-चार कश के बाद चेहरे पर सुकून और एक शरारती मुस्कान लिए हुए वे बोले, "तुझे इतना घूम कर आने की क्या ज़रुरत थी? यहीं अपने पैकेट में से एक सिगरेट निकाल कर दे देता!"


"हा! हा!!" मैंने एक ज़ोर का ठहाका लगाया, "तुम्हारा बाप वाक़ई तुम्हारा बाप है!"

"तुझे हँसी सूझ रही है!" अनिल मासूमियत से बोला, "मेरी सोच, कितना शर्मिंदा होना पड़ा होगा...!"

सिगरेट शादी पिता पुत्र

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..