उत्तरदायित्व का ज्ञान

उत्तरदायित्व का ज्ञान

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       तु.. तु मुझे.. मेरा उत्तरदायित्व सिखाएगा, छोटा है छोटा ही बनकर रह। रमेश ने लगभग चीखते हुए सुरेश से कहा। सुरेश ने कहा नहीं भाई मैं यही चाह रहा हूँ कि आप भी माँ को रखो । माँ आपके साथ भी रहना चाहती है । कुछ समय आप रखो कुछ समय हम रखेंगे । इस तरह मां का भी मन बहलता रहेगा। अगर मैं इस समय माँ को घर लेकर गया तो तुम्हारी भाभी कलह मचा देगी । अरे भैया 6 महीने से माँ यहाँ रह रही है । अगर और रुकी तो कांता भी मेरा जीना हराम कर देगी। बहुत परेशान करेगी । आप ही बताओ मैं क्या करूँ। कांता से माँ की सेवा होती नहीं है। रमेश कहता है तेरी भाभी का भी यही हाल है । मां की सेवा नहीं करना चाहती ।तो आप ही बताइए भैया हम क्या करें ।

         कुछ सोचकर रमेश कहता है ठीक है हम माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं इस तरह हमारे घर में सुख और शांति रहेगी। और यह सोचकर दोनों भाई माँ के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करने चले।


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