Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
स्पंदन
स्पंदन
★★★★★

© Ashish Kumar Trivedi

Inspirational

1 Minutes   1.9K    28


Content Ranking

यहाँ मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को रखा जाता था। कोई कुछ भी नहीं बोलता था। सभी अपने आप में खोए हुए सिर्फ शून्य में ताकते रहते थे। लोगों का मानना था कि इन्होंने ऐसे भयानक दुःख झेले हैं कि अब पत्थर बन चुके हैं।

इसी मानसिक रुग्णालय में शामली रहने आई। वह करीब सात माह की गर्भवती थी। परिवार ने त्याग दिया था। सड़कों पर भटकते हुए वह भी मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गई थी। अतः उसे यहाँ भेज दिया गया।

दो एक दिन बीते कुछ नजरें उसकी तरफ उठने लगीं। उनमें यहाँ सहानुभूति की हल्की झलक दिखाई पड़ी। पचास वर्षीय कुंती अधिक आकर्षित थी।

एक दिन वह शामली के पास आई और उसके उदर पर प्यार से हाथ फेरने लगी। अब अपने खाने में से कुछ निकाल कर शामली की थाली में रख देती थी। धीरे-धीरे सभी की आँखों में ममता झलकने लगी।

दो माह बाद वहाँ खुशनुमा माहौल था। सभी आँखें नव आगंतुक पर लगी थीं। सब अपने अपने हिसाब से शिशु का स्वागत कर रहे थे।।

माँ शिशु स्वागत मानसिक रोगी घरवाले

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..