Nandini Upadhyay

Drama


Nandini Upadhyay

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वो दस दिन

वो दस दिन

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   ममता ने सोचा भी नहीं था , की उसकी शादी हो जाएगी । और आज वह दुल्हन बनकर मंडप में बैठी है मंत्रोच्चार हो रहे हैं । और वह किसी की अर्धांगिनी बन रही है । यह सब ममता के लिए सपने जैसा ही था ।


     ममता एक गरीब परिवार की लड़की थी पिताजी थे नहीं । घर में माँ और ममता ही थे जो दूसरे लोगो के खेतों में काम करके अपना गुजर-बसर कर रहे थे । उनके पास स्वयं का एक कच्चा घर भी था दो कमरों का । जो माँ बेटी के लिए काफी था । उनकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नही थी, मगर ममता कर्मठ थी उसे किसी के आगे हाथ फैलाना मंजूर नही था । वह मेहनत व लगन से काम करती थी , उसकी मेहनत देखकर अच्छे अच्छे लोग दंग रह जाते थे । अब ममता 25 बरस की हो गयी थी ।माँ को उसकी शादी की चिंता होने लगी, वह सोचती थी किसी भी तरह मेरी बेटी का विवाह हो जाए । मगर ममता किसी भी तरह समझौता करना नही चाहती थी । ये लोग गरीब थे इसलिये बूढे व अपाहिज लोगो के रिश्ते जरूर आते थे जो धनाड्य वर्ग के भी होते थे, मगर ममता जानती थी यहाँ विवाह किया तो दबकर रहना पड़ेगा , जो स्वाभिमानी ममता को यह कतई मंजूर नही था ।

       

     ममता का कुंवारा मन सपने जरूर देखता था अपने राजकुमार के। मगर वह जानती थी कि यह केवल सपने ही है और कभी पूरे नही होंगे । वह अपनी सुखी गृहस्थी का सपना देखती । उसे बहुत प्यार करने वाला पति होगा सुंदर से बच्चे होंगे । घर मे , किसी चीज की कोई कमी नही होगी । पर वो जानती थी कि उसका यह सपना शायद ही पूरा हो । क्योकि कोई भी उससे शादी करेगा तो , उस पर दया करके करेगा ।


    मगर भगवान को शायद कुछ और ही मंजूर था पास के गांव में एक शिक्षक रामबाबू थे उनकी धर्मपत्नी असमय ही भगवान के पास चली गयी थी , अब घर मे वे और उनका आठ वर्षीय पुत्र रहता था । पड़ोस में ही उनके चचेरे भाई का परिवार रहता था वे ही उनकी व उनके पुत्र राहुल की देखभाल करते थे । रामबाबू सोचते थे बच्चे की देखभाल अच्छी तरह से होती रहे तो वह अपने आधी तनख्वा चचेरे भाई को दे देते थे । मगर भाई व उसके परिवार के मन मे खोट था । वे बस पैसा चाहते थे राहुल का ख्याल ढंग से नही रखते थे । राहुल बेचारा अभाव में जी रहा था । बिनमाँ का बच्चा बेचारा पेट भर खाने को तरस रहा था , प्यार तो दूर की बात है ।


    चचेरे भाई के परिवार में चार बच्चे थे तो राहुल को कौन प्यार करता । उसकी दुर्दशा तो होनी ही थी । रामबाबु इस सबसे बेखबर नही थे । उन्हें लगता तो था राहुल का अच्छे से ख्याल नही रखा जा रहा है । मगर सोचते थे इतना तो काम हो रहा है कम से कम । इसीलिये उनकी पैसे से भी मदद कर देते थे ।

       

     उनकी रिश्ते की बुआ ममता के गांव में रहती थी । उन्होंने सोचा की रामबाबू कैसे अपना पूरा जीवन अकेले काटेंगे , अभी उम्र ही क्या हुई है उनकी 32 वर्ष के ही तो है ।उन्होंने रामबाबू से दूसरे विवाह के लिए बात करी और राहुल का भी हवाला दिया । पहले तो रामबाबू ,राहुल की विमाता लाने को बिल्कुल तैयार नही थे । मगर बार बार कहने पर मान गए । उन्होंने बुआ से कहा "" बुआ आप लड़की को स्प्ष्ट बता देना मेरा एक बेटा भी है ,और मैं उसी के लिए यह विवाह कर रहा हुं । मैं नही चाहता की बाद में कुछ झंझट हो "" 


   ' अरे नही बेटा मै सब पहले से ही बता दूंगी लड़की को मंजूर होगा तभी यह रिश्ता होगा" बुआ ने समझाते हुए कहा।


     बुआ ने गांव जकर ममता कीमाँ से बात करी , और बहुत खुश होकर कहा " अरी सुभद्रा तेरे तो भाग ही खुल गये , इत्ता अच्छा जवाई तुझे चिराग लेकर ढूढने पर भी नही मिलेगा " 


तो सुभद्रा ( ममता की माँ ) ने खुश होते हुये कहां " कौन है जीजी जरा बताओ तो सही " 

    बुआ राम बाबू के गुणगान करती हुई बोली " अरे मेरा भांजा है बहुत अच्छा आदमी है, पास ही के गांव में रहता है , राम बाबू नाम है , सरकारी स्कूल में अध्यापक है " । 

   

    तो माँ आश्चर्य से कहती है " ये तो बहुत अच्छी बात है मगर वे क्यो राजी होंगे हम गरीबो के घर रिश्ता जोड़ने के लिये " 


  फिर बुआ ने बताना शुरू किया "" वह विदुर है, और एक पुत्र भी है आठ बरस का । उसको माँ मिल जाएगी यह सोचकर उन्होंने शादी के लिए हां कही है । तुम्हारी ममता राज करेगी राज ।"


   मां ने उदास होकर कहा "मगर जीजी ममता यह ब्याह करने को तैयार ना होगी आप तो जानते ही हो उसे " ,


   बुआ ने थोड़ा समझाते हुये कहा "तुम बताओ मत बाद में जब शादी हो जाएगी तो उसे मानना ही पड़ेगा । हम जो कर रहे है उसकी खुशी के लिये ही तो कर रहे है "। 


    माँ कहती है " मगर जीजी मैं अपनी बेटी के साथ कैसे धोखा कर दु " ।


     तो बुआ थोड़ सख्त होकर कहती है " मैं जो बात कहतीहूँ खरी खरी कहतीहूँ । अगर झूठ नही बोलेगी तो कब तक अपनी बेटी को घर में बैठाये रखेगी, अगर तुझे उसे विदा करना है तो यह तो करना पड़ेगा , नही तो कर ले बूढ़ी अपनी लड़की को ।


     सुभद्रा मान जाती है, वह सोचती है अगर उसने मना कर दिया तो इतना अच्छा रिश्ता हाथ से निकल जायेगा । 


    शाम को ममता घर आती है उसकीमाँ बताती है कि "तेरे लिए एक रिश्ता आया है । अच्छा लड़का है स्वभाव भी बहुत अच्छा है । पड़ोस के गांव में रहता है , शिक्षक है । ममता खुश हो जाती है । उसे अपने भाग्य पर भरोसा नहीं होता । वह कहती है " मेरे लिए रिश्ता कैसे आ गयामाँ ,वह मेरे से शादी करने के लिए क्यों तैयार होंगे , हम तो इतने गरीब लोग हैं, उन्हें कुछ दे भी नही सकते ,"


    तो माँ ने कहां "बेटा उनकी बुआ अपने गांव में रहती है । उन्होंने तुझे देखा और भतीजे के लिए पसंद कर लिया " 


   ममता बहुत खुश हो जाती है मगर उसके मन में संशय बना रहता है वह सोचती है ऐसे कैसे हो सकता है मेरे लिये इतने अच्छे घर का रिश्ता कैसे आ गया , क्या कारण हो सकता है, मगर जब माँ ने समझाया कि उन्हें गरीब घर की लड़की ही चाहिये थी जो उनके घर को अच्छे से संभाल सके उसके बाद ममता आस्वस्त हो गयी और अपनी नयी जिंदगी के सपने बुनने लगी ,


   और आज उसकी शादी है , 

विदाई के समय ममता बहुत रोई , उसे अपनी माँ की फिक्र ज्यादा हो रही थी , वह आस पड़ोस में बोल गयी की मेरी माँ का ख्याल रखना, सरपंच काका को खास तौर पर बोल कर गयी,


    विदा होकर ममता ससुराल आ गयी , अब ममता ने राम बाबू की तरफ ध्यान से देखा , गेहुआ रंग, गठा हुआ शरीर, सधे हुये नैन नक्श , कुल मिलाकर आकर्षक । कोई भी उन्हें देखकर आकर्षित हो सकता था , और ममता के साथ भी यही हुआ । वह पहली नजर में राम बाबू की हो गयी थी, घर भी बढ़िया था । जरूरत का सब समान था घर में, ममता का कुँआरा मन सपने देखने लगा । 


     मगर उसकी किस्मत को किसी की नजर लग गयी, ससुराल मे पहले ही दिन ममता ममता की मुलाकात उसकी चचेरी जेठानी से हो गई जो उनके पड़ोस में रहती थी, वही जो राहुल की देखभाल करती थी । वह ममता से पहले ही खार खा के बैठी थी , क्योंकि ममता के आ जाने से उन्हें अब आधा पैसा नहीं मिलने वाला था । 

      वह ममता के पास आके बड़ी मीठी मीठी बातें करने लगी । "कितनी खूबसूरत हो तुम , पर मुझे तुम्हारी किस्मत पर दुख होता है, बड़ा रोना आता है बहन"। 


    ममता ने आश्चर्य करते हुये कहा "क्यों क्या हो गया? मेरी किस्मत तो बहुत अच्छी है , इतना अच्छा पति मिला है ।इतना अच्छा घर है ।


   " हॉ वो तो है " जेठानी बोली सम्भल कर बोली ,"मगर तुम इतनी नाजुक सी हो उस शैतान बच्चे को कैसे संभालोगी " ।  


    "कौन बच्चा कैसा बच्चा " ममता ने तेज आवाज में पूछा 


    तो जेठानी आश्चर्य करने लगी "अरे तुम्हें नहीं पता क्या ? राम बाबू का एक आठ साल का बच्चा है , बहुत ही शैतान है, दिनभर खाता रहता और मुझे परेशान करता है ,अभी तक तो मैं ही देखभाल करती थी अब तो तुम उसकीमाँ बन गई हो, तुम उसकी देखभाल करना "। 

    ममता को काटो तो खून नहीं , वह स्तब्ध रह गई, ये बाते सुनकर उसके मुंह से शब्द ही नही निकल रहे थे ।


    पर जेठानी वह तो बोलती ही जा रही थी । "रामबाबू से भी बच के रहना बहुत ही जालिम आदमी है उनकी पहली बीवी,  अरे अपने राहुल कीमाँ , उसको उन्होंने बहुत तड़पा तड़पा कर मार डाला , बहुत परेशान करते थे , बेचारी को उसको नौकरानी बना कर रखा था । बहन तुम तो बच के ही रहना वैसे मेरी ज्यादा बोलने की आदत तो है नही । मुझे तो बस तुम्हारी चिंता थी । इसीलिये इतना कुछ कह दिया । बस तुम मेरा नाम मत लगाना । "राम राम क्या जमाना आ गया है" बड़बड़ाते हुए , ममता को तिरछी नजर से देखा और चली गयी ।

    ममता की आंखों से आँसू बहने लगे । उसके सपने पलभर में ही चूर हो गये । वह सोचने लगी हम लोगों को इतना बड़ा धोखा दिया इन लोगों ने । मेरीमाँ को और मुझे धोखे में रखा । सच्चाई बता देते तो क्या हो जाता । और कैसा आदमी है अपनी बीवी को ही तड़पा तड़पा कर मार डाला । अब ममता को रामबाबू से घृणा होने लगी । 


     धीरे-धीरे करके सभी मेहमान चले गए रात को सुहाग की सेज पर बैठी ममता सोच रही थी । कैसे इस नीच आदमी का सामना करूंगी मैं। इस आदमी का मुह भी देखना नहीं चाहती मैं । 

    

     उधर रामबाबू बेचारे भोले भाले इस पूरी बात से अनजान थे । वह भी सोच रहे थे कि, अभी वह पहली पत्नी की यादें भूले ही नहीं है और कहीं नई वाली पत्नी के साथ कुछ अन्याय ना कर बैठे । मुझे सामंजस्य बना कर रखना होगा ।

    

    रामबाबू जैसे ही कमरे में घुसे ममता पलंग पर से खड़ी हो गई अपना घूंघट खुद ही उठा कर बोली, मेरे पास भी मत आना दूर रहना मुझसे । घृणा है मुझ आपसे , आप लोगों ने हमें फरेब में रखा । बताया ही नहीं कि आप विदूर है ,और आपका एक 8 वर्ष का बेटा भी है । मैं और मेरीमाँ बेचारे सोच रहे थे भले लोगों के घर का रिश्ता है ,और हम ने हां कर दी । रामबाबू बेचारा सकपका गए । यह तो उन्होंने सपने में भी नही सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है । उन्होंने सयंत होते हुये धीमे स्वर में कहा , नहीं ऐसी बात नहीं है । हमने पहले ही बता दिया था और बुआ को भी कह दिया था कि आपको भी स्पष्ट बता दे। हम कुछ भी छुपाना नही चाहते । पर पता नहीं क्यों आपको क्यों नहीं बताया गया । मैं क्षमा चाहताहूँ अगर आपको नहीं बताया गया। क्योकि मैने यह शादी ही अपने बेटे के लिये की है , की उसे माँ मिल जाएगी । मैं आपका सम्मान करता हु । आप पूरे हक के साथ इस घर में रह सकती है। और जब जाना चाहे आप जा भी सकती है । आपको कोई रोकेगा नहीं । पर कृपया कर मुझ पर ऐसा लांछन ना लगाए । इतना कहकर रामबाबू कमरे से बाहर चले गए ।


    ममता के कान जेठानी द्वारा इतने भरे थे कि उसे राम बाबू की इन बातों में भी धृष्टता दिखाई दी। वह रात भर अपनी किस्मत पर रोती रही ।


   सुबह ममता की आंख देर से खुली ,उसने देखा एक मासूम से बच्चा उसे उठा रहा है । माँ माँ उठो , चाय पीलो , उसके हाथ में चाय का कप था ।


ममता ने पूछा "कौन हो तुम" 

बच्चा - मैं राहुल हु और आप मेरी माँ हो ।

ममता ने सोचा तो ये है राम बाबू का लड़का , उसे उस मासूम से भी नफरत होने लगी।


    बच्चे ने कहा "आप मेरीमाँ हो ना , मेरे दोस्त बोलते थे मेरे नईमाँ आएगी वह मेरे लिए अच्छा अच्छा खाना बनाएगी । जो मुझे पसंद है वह खाना बनाएगी ,और मुझे पेट भर कर खिलाएगी की । 


     ममता सोचने लगी ,हूँ ... मुझे नौकरानी समझ के रखा है । 

    " कहो ना, कहो ना माँ आप मेरे लिए खाना बनाओगी ना ,बच्चे ने ममता को हिलाते हुए पूछा । ममता ने उसे, धक्का देकर दूर कर दिया , और कहाँ " दूर हटो यहां से मुझे कुछ खाना-वाना बनाना नहीं आता " 

  

     बेचारा बच्चा अपना सा मुंह बना कर चला गया ।


    अब ममता उठ कर खड़ी हुई और उसने वहाँ रखी चाय पी । उसने सोचा चाय किसने बनाई होगी । शायद रामबाबू ने ही बनाई होगी , बाहर आकर देखा रामबाबू से कहीं नहीं दिखे राहुल गुमसुम सोफे पर बैठा था । उसने राहुल से पूछा" तुम्हारे पापा कहां गए "  तो उसने कहा " मेरे पापा स्कूल चले गए आपको कुछ चाहिए क्या पापा मुझे बोलकर गए हैं मैं आपका ख्याल रखु "

    'नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए " ऐसा कहकर ममता अंदर चली गई ।

   11:00 बजने में आ गए ममता को जोरों से भूख लगने लगी उसने सोचा चलो चल कर देखो तो सही किचन है कहां । वह बाहर आयी और राहुल से पूछा ,तो राहुल ने इशारा कर दिया , ममता किचन में गयी , पूरा किचन जमा हुआ था ।

तो उसने राहुल से पूछा ," तुम्हारे यहाँ खाना कौन बनाता है राहुल कहता है कोई नही, हम तो ताईजी के घर खाते थे , अब आप आ गयी हो ना माँ तो आपके हाथ का बना खाएंगे तब ममता का ध्यान गया कि इस बच्चे ने भी अभी तक कुछ खाया नही होगा।


  उसने से पूछा क्यों तुमने अभी तक कुछ खाया नही क्या ? तुम्हारे पापा कुछ बनाकर नहीं गए। 

     राहुल ने कहां "नहीं मैंने कुछ नहीं खाया ,मेरे पापा को खाना बनाना नहीं आता । रोज ताई जी टिफिन देती थी । अगर आज से आप आ गई हो तो ताई जी ने भी टिफिन नहीं दिया और मुझे भी खाने के लिए नहीं बुलाया मुझे बहुत भूख लगी है " उसने अपने पेट की तरफ हाथ लगाते हुए कहाँ 


ममता गुस्सा तो थी मगर उसके दिल में ममता भी थी। उसने सोचा इतना छोटा सा बच्चा अभी तक भूखा है ,और मुझे भी भूख लग रही है चलो कुछ बना लेते हैं । बस आज की बात है, शाम को उस दुष्ट इंसान को बोल दूंगी मुझे घर जाना है । अभी कुछ बना लेती हुँ । उसने टटोला तो पूरा किचन में किराने का सामान भरा हुआ था ।और उसने फिर सोचा कि देखो खुद को तो खाना बनाना आता नही, और मेरे आते ही समान के आये , सोच रहे होंगे मुफ्त की नोकरानी मिल गयी 


     उसने जल्दी से दाल चावल बनाएं दोनों खाना खाने बैठे । उसने देखा राहुल दाल चावल भी बड़े चाव से खा रहा है । उसके चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव देखा ममता ने , दोनो के खाना खाने के बाद ममता ने किचन साफ कर दिया । और राहुल ने भी उसकी मदद करी।

      ममता ने सोचा जैसे वह पड़ोसन बोल रही थी वैसे यह बच्चा शैतान नहीं है  बड़ा ही अच्छा बच्चा है ।


     अब वह कमरे में चली गई 4:00 बजे रामबाबू आए। ममता जग रही थी । वह कमरे मे ही थी, और बाहर की आवाज आ रही थी,। रामबाबू ने राहुल से पूछा "खाना खाया"। तो राहुल बोला "हां पापा मम्मी ने बनाया था, दाल चावल खाया था " ।


      "कुछ बचा है क्या "

  

 "नहीं पापा खत्म हो गया आप ने कुछ नहीं खाया क्या"


"नहीं आज स्कूल के कैंटीन भी बंद थी मैं कुछ नहीं खा पाया"


     इतने में ममता बाहर आती है वह कहती है "मुझे अपनीमाँ के घर जाना है मुझे छोड़ आइए "।


, रामबाबू कहते हैं "तुम्हारीमाँ सरपंच जी के परिवार के साथ तीर्थ यात्रा पर गई है कम से कम 10 दिन लगेंगे तब तक तुम यहीं रहो, वह आ जयेगी फिर मैं तुम्हें छोड़ आऊंगा"


ममता कहती है "माँ ने तो कुछ बताया ही नहीं था इस बारे में आप झूठ बोल रहे हो "


   रामबाबू ने कहा "आप मेरी बात पर विश्वास करें आपकी माता जी का तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय शायद पहले से ही था इसलिए वह सरपंच जी के साथ चली गई "


    ममता मन ममोस के रह गई उसने सोचा 10 दिन और इस आदमी के निकालने पड़ेंगे अंदर जाकर लेट गई । रामबापू के लिए खाना नहीं बनाया ।


   शाम को भी खाना नहीं बनाया तो रामबाबू बाहर से खाना ले आए फिर उन्होंने राहुल को बुलाया मम्मी को आवाज देदो राहुल ने ममता को बुलाया और तीनों ने खाना खाया । ममता के लिये यह नई बात थी, बाहर से मंगाकर खाना उसको मन में ग्लानि हुई की मेरे रहते हुए इन्हें बाहर का लाना पड़ रहा है। और उसे इस बात पर भी हैरानी हुई की जैसा पड़ोसन ने बताया था वैसा तो इनमें कोई भी लक्षण नहीं दिख रहे दोनों बाप बेटे बड़े ही सभ्य है ।


     रात में ममता अंदर पलंग पर सोई रही रामबाबू और राहुल बाहर सो गए दूसरे दिन ममता की नींद सुबह ही खुल गई उसने देखा रामबाबू उठ गए हैंऔर दूध लेकर आये है, 


    उस ने उनसे कहा कि अब 10 दिन में यहाँ रह रहीहूँ तो खाना भी मैं बना लिया करूंगी ।


    और उसने चाय बना दी फिर रामबाबू के लिए टिफिन भी बना दिया , घर में कुछ था नहीं केवल आलू थे तो आलू की सब्जी और पराठे बना दी रामबाबू टिफिन ले लिया और फ्रिज पर कुछ पैसे रखते हुए कहाँ अगर तुम चाहो तो बाजार जाकर कुछ सब्जी भाजी ला सकती हो राहुल को साथ ले जाना। और ममता के जवाब का इंतजार किए बिना ही चले गए ।


    इधर सुबह जब राहुल उठा तो ममता ने उसे ब्रश करने का कहा और गिलास भर के दूध दे दिया। तो राहुल ने बोला "मां आप मुझे रोज दूध दोगी ना "

      

      "क्यों तुम रोज नहीं पीते"


"नही मैं रोज नही पीता, जिस दिन पापा की छुट्टी होती है उस दिन पीता हु"


 "तुम्हारी ताईजी नही देती थी, "


"नही उनके घर तो खत्म ही हो जाता था," राहुल ने बेचारगी से कहा


ओह!

ममता ने कहा "चलो में तुम्हे नहला देतीहूँ फिर हम बाजार चलेंगे "


राहुल ने कहा में तो खुद ही नहाता ह।


"इतने छोटे से बच्चे होकर खुद नहाते हो।"


"हा कोई मुझे बोलने वाला नही है, कभी नहाता हु कभी नही नहाता हु,"


चलो आज से मैं तुम्हे नहलाऊंगी, 


    ममता राहुल को नहलाती है , तो राहुल को बहुत अच्छा लगता है , वह रोने लगता है , ममता उससे पूछती है क्या हुआ । 


"मुझे माँ की याद आ रही है वह मुझे ऐसे ही नहलाती थी " ममता राहुल को गले लगा लेती है ।


दोनो तैयार होकर बाजार जाते है, 

ममता सब्जियां और बहुत सा जरूरत का सामान लेकर आती है । आकर घर की सफाई करती  


  रामबाबू शाम को घर आते हैं तो घर की रंगत बदली बदली नजर आती है ।अब घर , घर लग रहा है । हर चीज करीने से सजी हुई है । वे खुश हो जाते है उन्हें अपनी पहली पत्नी की याद आ जाती है । वह जब थी घर ऐसे ही सजा रहता था ।कितना खुशहाल था सब मगर ,उस बीमारी ने इनका सब कुछ छीन लिया । सीता के जाने के बाद उनकी जिंदगी ही वीरान हो गयी। 


  राहुल ने पानी और चाय लाकर दी, रामबाबू ने उसे गौर से देखा आज राहुल अच्छा लग रहा था खुश भी बहुत था । 

उन्होंने कहा राहुल आज स्मार्ट लग रहे हो ,


"हा , पापा आज मुझे माँ ने नहलाया है ना ,"


रामबाबू सोचते है , चलो कुछ समय के लिए ही सही बच्चे को प्यार तो मिल रहा है ।


   शाम को ममता पूरा खाना बनाती है ,दाल, चावल, रोटी,सब्जी ,रामबाबू ने बहुत समय बाद इतना स्वादिष्ट भोजन किया था । ,


  रात को सोते समय रामबाबू सोचते है , कही ऐसा 

न हो की हमे इसकी आदत हो जाय, फिर दस दिन बाद तो यह चली ही जायेगी , मैं तो किसी तरह सम्भल जाऊंगा मगर यह बच्चा सहन नही कर पायेगा ,पर जो खुशी इसको थोड़े से दिनों के लिए मिल रही है उसको कैसे छीन लू, वह राहुल की तरफ देखते है , उनकी आंखें नम हो जाती है ।


 दूसरे दिन सुबह रामबाबू के नींद खुलती है ,तो ममता पहले ही उठ चुकी होती है । रामबाबू दूध लेकर आते हैं और खुद ही चाय बनाने लगते है । तो ममता कहती है "मैं बनातीहूँ " "अरे 10 दिन बाद तो मुझे ही बनानी है इसलिए मैं क्यों अपनी आदत खराब करु " रामबाबू कहते हैं और मेरा टिफिन भी बनाने की जरूरत नहीं है । मेरी स्कूल में कैंटीन है उसी में खाना खा लिया करूंगा पहले भी यही करता था । और हां एक बात और मैं कहना चाहताहूँ राहुल से थोड़ा दूर ही रहना वो मासूम बच्चा है मैं नहीं चाहता कि उसे तुमसे लगाव हो जाए । उसे तुम से लगाव हो गया और जब तुम चली जाओगी तो उसे बहुत परेशानी होगी , 


   ममता गर्दन हिला कर हा कह देती है ,और सोचती है कितना खडूस आदमी है । मैंने सोचा 10 दिन इनके घर रह रहीहूँ तो क्यों एहसान लिया जाय, इनका काम ही कर दो । मगर यह इंसान इस लायक ही नहीं है । 


   इतने में राहुल भी उठ जाता है , सुबह उठते से ही माँ माँ कहकर ममता के गले लग जाता है । ममता गुस्से में रहती है। पर वह सोचती है । इसमें इस मासूम की क्या गलती है । वह राहुल के साथ अपना व्यवहार चेंज नहीं करती । राहुल के साथ रोज की तरह ही रहती है ।


  इस तरह चार दिन निकल जाते है । ममता और राहुल में अच्छी दोस्ती हो जाती है, ममता राहुल का पूरा ध्यान रखती है । राहुल भी अपनी माँ पर जान छिड़कता है । मगर रामबाबू जे साथ बस काम की बाते होती थी, रात का खाना वह घर पर ही खाते थे ।


  ममता और राहुल छुपन छुपाई खेल रहे थे , दोनो ऐसे ही मस्ती कर रहे थे , की उनकी पड़ोसन जो ममता की चचेरी जेठानी थी वह आती है । 


  अरी बहन कैसी हो, मैने तो सोचा था तुम अपनी किस्मत पर रो रही होगी, मगर तुम तो इस सपोले जे साथ मस्ती कर रही हो ।  


   "अरे नही दीदी ये तो बच्चा है , इसमे इसका क्या दोष है । ये तो कितना मासूम है देखो ।" राहुल की तरफ इशारा कर कर बोली


  "अरे यह बहुत शैतान है तुम्हारी नाक में दम कर देगा अपनी माँ को तो खा गया तुम्हें भी नही छोड़ेगा ।"


  "अरे दीदी, आपको बात करने की तमीज नही है कोई बच्चो के सामने ऐसी बाते करते है क्या"


   वह नाराज हो जाती है और कहती है, तुम कल की आयी मुझे तमीज सिखाती हो, मैं तो तुम्हारे भले के लिए कह रही थी, मानना या ना मानना तुम्हारा काम है । मैं तो ये चली ,और चली जाती है। 


    ममता को भी बहुत गुस्सा आता है , वह कहती है कैसी औरत है , उसे यह भी नही पता कि बच्चों के सामने कैसी बाते की जाती है ।


   राहुल आता है और ममता के गले लग जाता है और कहता है "मांमाँ आप मुझे छोड़ कर तो कहीं नहीं जाओगे ना" 

   ममता पूछती "क्यों बेटा क्या हो गया ऐसा क्यों बोल रहे हो "

" पहले आप बोलो मुझे छोड़ कर तो नहीं जाओगी ना "


  "नहीं तो मैं कभी छोड़कर नहीं जाऊंगी मेरे राजा बेटे को"


"माँ ये ताईजी है ना मुझे बहुत मारती थी और मुझे पेट भर खाना भी नहीं देती थी मुझे बहुत टाइम तो भूखा ही रहना पड़ता था प्लीज मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाना" ओर वह कसकर गले लग जाता है । 

   

   ममता भी रोते हुए बोलती है "नहीं बेटा मैं तुझे कहीं छोड़कर नहीं जाऊंगी "


   अब उसे समझ में आ जाता है यह जो उसकी जेठानी ही अच्छी महिला नहीं है और शायद उसका काम ही है घर में आग लगाना अब राहुल और ममता का बंधन और मजबूत हो जाता है ।


    दूसरे दिन ममता देखती है उसकी चचेरी जेठानी राहुल से कुछ बात कर रही है तो ममता ध्यान से उनकी बातें छुपकर सुनने लगती है ।


    उसकी जेठानी राहुल को कहती है । "जो तुम्हारीमाँ है ना, वह सौतेलीमाँ है । तुम नहीं जानते हो सौतेलीमाँ बहुत बेकार होती है पहले तो बहुत प्यार करेगी । फिर बाद में तुमसे पूरे घर का काम करवाएगी तुम बिल्कुल भी उसकी बातों में मत आना । और हा उसके साथ ढंग से बातें मत किया करो । हर चीज की जीद किया करो । वह जो खाने को दे वह चीज मत खाओ दूसरीमाँ गा करो । उसे बहुत परेशान करो । नहीं तो वह तुम्हें परेशान करेगी "।


    राहुल कहता है "ताई जी वह मेरीमाँ है वह मुझे बहुत प्यार करती है ,आप उनके बारे में ऐसी बातें मत कीजिए। और वह चला जाता है ।


     ममता की आंखों से आंसू आने लगते हैं । और वह सोचती है। बच्चे कितने निश्चल होते हैं । वह छोटा सा बच्चा मुझे कितना प्यार करता है । वह मेरे लिए अपनी ताई जी के सामने बोल गया । जिससे वह इतना डरता था । 


  " मैंमाँ हूँ उसकी, और वो मेरा बेटा " कुछ रिश्ते दिल के बने होते है


पर मुझे तो जाना है अब गिनती के दिन ही बच गए हैं।

कैसे रहूंगी उसके बिना और वह मेरे बिना । यह सोचते सोचते वह सो जाती है । 


    फिर शाम होती है राम बाबू घर आते हैं ।खाना खाकर वो टहलने जाते हैं तो ममता को कुछ आवाजें सुनाई देती है वह देखती है कि उसकी चचेरी जेठानी रामबाबू से कुछ बातें कर रही है । वह खिड़की मै से सुनती है ,जेठानी रामबाबू को भड़का रही थी । 

    

    वह कह रही थी कि ममता राहुल के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती है उसे मारती पिटती है । और घर का सारा काम भी उसी से करवाती है । राहुल बच्चा होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रहा है । और राहुल ने खुद ने आकर उनसे कहा है । 


   तो रामबाबू चिल्लाते हुये कहते है "भाभी आप कैसी बात कर रहे हो । ममता ऐसी हो ही नहीं सकती । मैंने उसकी आंखों में राहुल के लिए ममता देखी है . वह राहुल का इतना ख्याल रखती है जितना की सीता रखती थी । मैं आपकी बात पर विश्वास कर ही नहीं सकता । ममता ऐसा कुछ करती होगी कृपया आप इस तरह की बातें करना बंद कीजिए , मेरे घर में जो चल रहा है मुझे पता है । और आपको उसमें दखलअंदाजी करने की कोई जरूरत नहीं है । 


     यह बातें सुनकर ममता की आंखें भर आती है वह सोचती है जिससे मैं इतनी नफरत करतीहूँ उसे मुझ पर कितना विश्वास है । वह अपनी भाभी तक से लड़ाई कर बैठा मेरे लिए। 


    रामबाबू घर में वापस आते हैं सब ममता ऐसा दर्शाती है कि उसने कुछ सुना नहीं है वह अपने काम में लगी रहती है रामबाबू भी टीवी देखने लगते हैं । और राहुल से कहते हैं कि 10 दिन बाद तुम्हारी भी स्कूल खुलने वाली है तो तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो । दिन भर खेलकूद में निकाल देते हो पढ़ाई भी कर लिया करो ।


    राहुल बोलता है पापा वह तो मैंने पहले ही चालू कर दी है । माँ मुझे रोज 2 घंटे पढ़ाती है । 


   रामबाबू ममता की तरफ देखकर उसको धन्यवाद देते है । ममता खुश हो जाती है । वह सोचती है जो जेठानी ने बात बताई थी की रामबाबू बड़े जालिम इंसान है वह गलत ही होगी । क्योंकि वह ऐसे लगते तो नही । पर उन्होंने झूठ बोलकर मुझसे शादी करी है ,मैं उन्हें माफ् नही कर सकती, झूठे तो वो है ही ।


    खड़ी होकर किचन में जाने लगती है कि उसका पैर फिसल जाता है और वह गिर जाती है । राम बाबू उसको उठाते हैं , बिस्तर पर लेटाते है और डॉक्टर को लेकर आते हैं।  


     डॉक्टर कहता है "पैर में मोच है ज्यादा घबराने की बात नहीं है 2 दिन आराम करेगी तो सही हो जाएगी । रामबाबू स्कूल से 2 दिन की छुट्टी ले लेते हैं और वह पूरी लगन से ममता की सेवा करते हैं । लेट्रिन बाथरूम तक ले जाना , चाय पानी देना ।


     रामबाबू दलिया, दाल चावल खिचड़ी यह चीजें बना लेते थे वही चीजें बनाकर ममता को भी खिलाते थे राहुल भी पूरे मनोयोग से अपनीमाँ की सेवा कर रहा था ममता तो बहुत अच्छा लग रहा था । उसने भी सोचा वह जितना सोच रही थी उतने गंदे इंसान नहीं है राम बाबू । मगर झूठे तो है, शायद कुछ मजबूरी रही होगी । नही तो लगता नही है जान बूझकर झूट बोलेंगे ।


   दो दिन निकल जाते है, ममता अब लगभग सही हो चुकी है। इन दिनों ममता ने रामबाबू को ध्यान से देखा । बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व है उनका, गठा हुआ, बलिष्ठ शरीर, छः फुट हाइट, गेहुआ रंग, बाते करने का ढंग। और कोई होता तो उन्हें देखकर ही फिदा हो जाता। वह गिरी थी तब रामबाबू ने ही उसे उठाकर बिस्तर पर लिटाया था । यह सोचकर ममता के शरीर मे फुरफुरी सी दौड़ने लगी, व उसके गाल शर्म से लाल हो गये ।

   

  रविवार आने से एक दिन और छुट्टी का मिल गया । ममता काम करना चाहती थी मगर रामबाबू चाहते थे कि यह एक दिन और आराम कर ले ।


  अब आठ दिन बीत चूके है। रामबाबू सोचते है , दसवें दिन ममता की माँ आ ही जायेगी ,तो ममता को उसके घर भेजना ही पड़ेगा , कितनी अच्छी लड़की है पूरे घर को संभाल लिया है । राहुल तो उसके बिना एक पल भी नही रहता । कैसे रोकु उसको कैसे , किस मुंह से रोकु । उसके साथ भी तो गलत हुआ है । मगर मेरा राहुल फिर से अनाथ हो जाएगा फिर से बिनमाँ का हो जाएगा । रामबाबू भी ममता को पसंद करने लगे थे वह भी दिल यही चाहते थे कि ममता हमेशा के लिये यही रह जाय । यह सोचते सोचते उन्हें नींद आ गयी ।

   सुबह हो जाती है रामबाबू स्कूल के लिए निकल जाते हैं । घर में ममता और राहुल ही रह जाते हैं । ममता राहुल को पूछती है की "राहुल में चली जाऊंगी तो मुझे याद करोगे,"

राहुल कहता है "मैं आपको जाने नही दूंगा "

राहुल रोने लगता है आप मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाना मैं आपके बिना नहीं रह सकूंगा मैं मर जाऊंगा" 

ममता उसको कस के गले लगा लेती है ,और कहती है बेटा ऐसी बात नही करते,।

     

    शाम को रामबाबू घर आते हैं , ममता ने खाना बनाया वह राहुल को खाना खिला देती है । राम बाबू से भी कहती। है खाना खा लीजिए । रामबाबू कहते है मेरा मन नहीं हो रहा है ।तुम खाना खा लो । 


    उन्हें अंदर से बुरा लग रहा है कि कल ममता चली जाएगी ममता का भी मन नहीं लग रहा था उसने भी खाना नहीं खाया । 


    दूसरे दिन रामबाबू स्कूल जाते समय ममता को कहते हैं "शाम को मैं तुम्हें तुम्हारीमाँ के घर छोड़ आऊंगा " 


और चले जाते है

   ममता भी अपना बैग जमाने लगती है ,राहुल पूछता है "आप कही जा रही हो"

  ममता कहती है " बेटा मैंमाँ के घर जा रहीहूँ "


    " नहीं मैं आपको नहीं जाने दूंगा "


"मैं कुछ दिनों में वापस आ जाऊँगी '


 ' मैं भी आपके साथ चलूंगा "


"नहीं तुम नहीं जाना अभी तुम्हारी स्कूल चालू हो रही है, और पापा का ख्याल रखना मै आ जाऊंगी । 

  इतने में दरवाजे में दस्तक होती है । वह सोचती है इतनी दोपहर में कौन आ गया । वह दरवाजा खोलती है तो उसकी देखती क्या है उसकी माँ खड़ी है ।


     वहमाँ की गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगती है मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी , माँ कहां चली गई थी तुम । 

मां कहती है "बेटा में तीर्थ यात्रा पर गई थी "


" आपने तो बताया ही नहीं था कि आप की तीर्थ यात्रा पर जा रही हो , और इतने पैसे कहां से आये ।


"अरे बेटा मुझे भी कहां पता था , वह तो रामबाबू की कृपा से मेरी तीरथ यात्रा हो गई । नहीं तो मुझ को कौन तीरथ यात्रा करवाता "


  "मैं समझी नहीं जरा ढंग से तो बताओ क्या बात है"


" बेटा तेरी शादी के बाद मैं तो अकेली हो जाती ,रामबाबू की बुआ जो अपने गांव में रहती वह तीरथ यात्रा पर जा रही थी तो ,रामबाबू ने मेरा इंतजाम भी उनके साथ करवा दिया ,और हमारे साथ सरपंच जी का पूरा परिवार था ।हम लोग चारों धाम की तीर्थ यात्रा पर गए थे मेरा पूरा खर्चा रामबाबू ने ही किया । भगवान उन्हें हमेशा खुश रखे ।


"पर माँ इन्होंने तो मुझे कुछ नहीं बताया "


"बेटा अच्छे लोग ऐसे ही होते हैं , एक हाथ से काम कर लेते हैं दूसरे आपको पता भी नहीं चलता "


"माँ वह बहुत ही झूठे इंसान है "


"क्यों क्या हो गया"


ममता रोते हुये कहती है


" माँ हमे धोखा दिया गया है । रामबाबू विदुर है, और उनका एक आठ साल का बेटा भी है । और शादी के वक्त हमे यह बताया भी नही "


   माँ कहती है " ममता यह सब मेरी गलती है, मुझे भी सब पता था ,और रामबाबू ने भी स्पष्ठ कह दिया था कि लड़की को सब बातें बतायी जाय ,मगर मैं जानती थी अगर तुझे बताया जाएगा तो तू शादी नही करेगी , और मैं तेरे हाथ पीले करना चाहती थी इसलिये मैंने झूठ बोला"

  

  " माँ तुम ये क्या कह रही हो, तुम्हे मुझे ये सब पहले ही बता देना चाहिये था । अब मैं क्या करूँ माँ, अब मैं क्या करूँ"। रोने लगती है 


"बेटा मैंने जो किया तेरे भले के लिये किया"


पर माँ......


    इधर रामबाबू शाम को घर आते हुए दोच रहे थे, आज ममता को उड़की माँ के घर छोड़ना ही पड़ेगा, मेरा घर फिर से वीरान हो जाएगा , और राहुल.... उसको कैसे समझाऊंगा, वह रह लेगा क्या ममता के बिना ।


 इसी उधेड़बुन में वह घर पहुच जाते है । ममता चाय पानी लाकर देती है । वे पूछते है" राहुल कहाँ है "


"वह बाहर गया है खेलने"


"उसको बुला लो फिर तुम्हे तुम्हारी माँ के घर छोड़ आते है "


"उससे पहले मैं आपसे कुछ बात करना चाहतीहूँ "।


"हाँ कहो"


मैं यहाँ से नही जाना चाहती, मैं इस घर में रहना चाहतीहूँ । आपकी पत्नी बनकर ,राहुल की माँ बनकर।


रामबाबू दंग रह जाते है उसकी बात सुनकर । और कहते है "मगर तुम्हारे साथ धोखा हुआ था...."


वो धोखा मेरे अपनो के द्वारा दिया गया था, इसमे आपकी कोई गलती नही है, दोपहर मे माँ आयी थी, मुझे सब बाते पता चल गई है । आपका क्या फैसला है ।


"ममता मैं तो हमेशा से चाहता हूँ की तुम यही रहो।"

और अपनी बाहे फैला देते है।


और ममता उनके चौड़े सीने में समा जाती है 


   

   













   

    



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