विरह व्यथा
विरह व्यथा
प्यासा था अंबर उस दिन
और आग लगी थी पानी में
बिछड़े थे दो दिल जिस दिन
जुड़ने को नयी कहानी में
समय चक्र गतिमान हुआ था
बिरह की ही ग्लानि में
बदल रहा था भाव हृदय का
बिछड़ रहे दो प्राणी में
बिछड़े थे दो दिल जिस दिन
जुड़ने को नयी कहानी में।
