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Anjneet Nijjar

Abstract


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Anjneet Nijjar

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सीमा

सीमा

2 mins 270 2 mins 270

कठिन होता है

कठिन तो होता ही है

अपनी सीमा में रहना

सीमाओं का अनंत आकाश

और आजादी का एक कोना

बँध कर सीमा में

उन्मुक्त उड़ान कहां है मुमकिन

सब नजरिए का है रोना

मुश्किल है हां मुश्किल तो है

जानना और पहचानना

अपनी सीमा को

सीमा की परिधि किसने की है तय

कोई मुझे समझाएं

कौन चंचलता को काबू करे

और कौन भावनाएं दबाए

यह नियम आखिर

किसने हैं बनाए

दायरे, सीमा ,अपवाद है उन्मुक्तता के

कोई स्वच्छंद क्यों ना रह पाए

हर बंधन हर सीमा

सिर्फ बंधना समझाए

गर करे मन कलरव और

उड़ान का ध्यान

तो परिधि छोटी पड़ जाए

फिर क्यों कोई सीमा में बंध जाए

जो किसी नश्वर द्वारा ही बनाई जाए

क्यूँ सिमटता अपनाई जाए

क्यूँ सीमा मन को समझाई जाए

क्यूँ………..


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