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Madan lal Rana

Inspirational

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Madan lal Rana

Inspirational

गुरूदेव

गुरूदेव

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जीवन में अपने जो गुरु होते हैं,

सभी नातों-रिश्तों से वो परे होते है।

उनसे बड़ा कोई परोपकारी नहीं

उन जैसा हितकारी नहीं

क्षण-क्षण शिष्य के चिंतन में

जो जी रहे होते हैं

जीवन में अपने...........................।


चमकते सितारों को वो चूमना चाहते हैं,

शिष्यों को उनमें वो में ढूंढना चाहते हैं।

जमाने में ऐसा हितैषी नहीं,

वास्तविकता है ये अतिशयोक्ति नहीं।

शिष्य के वर्चस्व का,

जो सपने संजोते हैं।

जीवन में अपने ...........................।


मां तो केवल चलना सिखाती है,

सीख गुरु की जीना सिखाती है।

मां का त्याग नि:स्वार्थ नहीं,

पर, गुरु के तप में भी स्वार्थ नहीं।

शिष्य के बोझ को,

जो मरकर भी ढोते हैं।

जीवन में अपने........................।


गुरु आदित्य हैं जीवन में नित्य हैं,

अज्ञान तमस् का तब क्या औचित्य है।

मुश्किलों से डरते नहीं,

तूफानों से घबराते नहीं।

भंवर में भी कश्ती को,

वो संभाल लेते हैं।

जीवन में अपने..............................।



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