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Dr.R.N.SHEELA KUMAR

Romance

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Dr.R.N.SHEELA KUMAR

Romance

आकर्षण

आकर्षण

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इसको बताने केलिए कोइ

अक्षर नहीं है

इस गड़बड़ से मेरा मुँह से कोई

बात नहीं आया

एकांत मे जब मै रहा

तब तुम्हारी यादों

मुझे कैसे सताते है

मै किससे बताऊँगा

ओ यादों मुझे छाया की जैसे

मेरे सात आ रहा है

मेरा ओर तुम्हारा सांगत्य

केलिए मै इंतजार करूँगा

जबतक तुम्हारे दिल मे

मै बसूँगा तब तक मै इंतज़ार करूँगा

ओ मेरे यार जब मै तुमसे पहली बार मिला

तब ही तू मेरा आकर्षण बना

तू ही मेरा जीवन की अमोल रत्न हो

तू ही मेरा सर्वस्व हो

ओ मेरा यार कब तक मै इंतजार

करना है एक बार

तू आजा मेरा नयानों की रानी तू. 


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