नसीब
नसीब
हर व्यक्ति सोचते है
क्या नसीब है हमारा
कोईभी इसको छोडेंगे नहीं
हम बाहर आने के समय
सोचते ही आएँगे क्या होगा
हमारा नसीब क्या है
अगर वर्षा की बूँद ऐसा
सोचा है तो कमल कैसा
विकसित होगा औऱ
सीप में बूँद नहीं बैठा हुआ है तो
मोती कहाँ से आएगा
ऐसा ही मनुष्य अपने कार्यों
कुछ भी न सोच कर
नसीब के बारे में
चिंता न करके चलना है।
