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Ram Chandar Azad

Romance

3  

Ram Chandar Azad

Romance

मैंने तुम्हारी चाह में

मैंने तुम्हारी चाह में

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मैंने तुम्हारी चाह में क्या –क्या नहीं किया

फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया।


जिस दिल के आइने में तस्वीर थी मेरी,

तुमने वो सरेआम क्यों सबको दिखा दिया।


मेरे वास्ते महफ़िल में कभी रोक नहीं था

किस वास्ते तुमने वहाँ पहरा लगा दिया।


जब सिजदे- मिन्नतों का कोई दौर नहीं है,

फिर दिल के मंदिरों में हमें क्यों बसा लिया।


माना कि तुमने मुझको धोखा नहीं दिया,

आज़ाद जो किया वो अच्छा नहीं किया।


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