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कविता
कविता
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© Rashi Singh

Inspirational

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चलो दिलों को दिलों से मिलाते हैं,

रिश्तों में आई अहंकार की दीवार गिराते हैं,

वक्त जाये न यह यूँ ही गुजर,

हर लम्हे को गैरों की खुशी में बिताते हैं,

सहारा देकर बेसहारों को,

सच्ची खुशहाली का चिराग जलाते हैं,

सेंक न सके जाति -धर्म की रोटी कोई ,

एकता की मिलकर ऐसी मिशाल बनाते हैं,

बहुत जी लिये मर-मर कर,

काम आये वतन क,कुछ जतन ऐसा करते हैं,

दिल लम्हा ख़ुशी देश

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