STORYMIRROR

Neha Saxena

Inspirational

4  

Neha Saxena

Inspirational

कोमल काया

कोमल काया

1 min
18

कोमल काया मन है निश्छल

सम्मान अधिकार ही चाहत है


कम न समझे कोई इन्हें

इनसे ही सृष्टि निर्माण है


यही देवी माँ दुर्गा है तो

यही कालिका विकराल है


यही अन्नपूर्णा है तो

यही शारदा समान है


यही रानी लक्ष्मीबाई तो

यही मीरा दीवानी है


यही गृह स्वामिनी है तो

यही गृह लक्ष्मी सुजान है


यही दो कुल की देवी है तो

यही वंश भी सजाय है


यही शिवशक्ति यही सावित्री

यही निःस्वार्थ प्रेम का सार है


यही मैदान में क्रिकेट खेले

यही जहाज उड़ाए है


यही पुलिस की वर्दी पहने

देश का मान बढ़ाए है


यही आर्मी बॉर्डर पर डटकर

दुश्मन को मार गिराय है


यही आठों प्रहर दक्षता दिखाती

यही नारी रूप सुहाय है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational