anuradha nazeer
Classics
देने के लिये धान।
पाने के लिए प्राण।
लेने के लिये ज्ञान।
त्यागने के लिए अभिमान।
पीने के लिए बान।
मानने के लिए अंदर ध्यान।
होंठों पर मुस्कान।
सब काम आसान।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से लिपट जाता है तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से ...
पीड़ित हो वो चिल्लाता रहता चिल्लाते थे जैसे उसके सताए हुए। पीड़ित हो वो चिल्लाता रहता चिल्लाते थे जैसे उसके सताए हुए।
नारायण कवच धारण करके रक्षा कर लेनी चाहिए शरीर की। नारायण कवच धारण करके रक्षा कर लेनी चाहिए शरीर की।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे।
नारद जी के बतलाये मार्ग का फिर से अनुसरण करने लगे वो। नारद जी के बतलाये मार्ग का फिर से अनुसरण करने लगे वो।
श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें। श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें।
भक्ति और प्रेम ब्रजवासियों का वहाँ देखा जो सुनाया उनको भक्ति और प्रेम ब्रजवासियों का वहाँ देखा जो सुनाया उनको
दूसरे प्राणियों की रक्षा के लिए अपने क्षण भंगुर प्राणों को उनके लिए बलि दे देते हैं दूसरे प्राणियों की रक्षा के लिए अपने क्षण भंगुर प्राणों को उनके लिए बलि ...
शिखंडिनी का था वह नव शिखंडी पुरुष रूप। किंतु यक्ष ने लिंग विनिमय से धरा स्त्री स्वरूप शिखंडिनी का था वह नव शिखंडी पुरुष रूप। किंतु यक्ष ने लिंग विनिमय से धरा स्त्...
वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में। वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में।
परन्तु प्रलोभन दिए जाने पर भी उन्होंने किसी वर की इच्छा नहीं की। परन्तु प्रलोभन दिए जाने पर भी उन्होंने किसी वर की इच्छा नहीं की।
विभूतिओं का संक्षिप्त वर्णन है विस्तार करो इसका जन जन में। विभूतिओं का संक्षिप्त वर्णन है विस्तार करो इसका जन जन में।
भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ। भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ।
कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल । कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल ।
मैंने इससे छल भरी बातें की मन में छल रख धर्म उपदेश दिया मैंने इससे छल भरी बातें की मन में छल रख धर्म उपदेश दिया
सत्कार या तिरस्कार और निंदा या स्तुति इस शरीर के ही होते हैं आत्मा के ये सब होते नहीं सत्कार या तिरस्कार और निंदा या स्तुति इस शरीर के ही होते हैं आत्मा के ये स...
किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित। किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित।
हे उद्धव ! बृज गोकुल जाओ , ज्ञान योग उनको समझाओ। हे उद्धव ! बृज गोकुल जाओ , ज्ञान योग उनको समझाओ।
वहां तपाये हुए लोहे के गोलों से यमदूत उसको हैं दागते। वहां तपाये हुए लोहे के गोलों से यमदूत उसको हैं दागते।
उद्धार प्रभु नारी अहिल्या तव चरण-रज से हुई । उद्धार प्रभु नारी अहिल्या तव चरण-रज से हुई ।