anuradha nazeer
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किसी को जज मत करो,
तुम बहुत खुश होओगे,
तुम सब को माफ कर दो,
तुम खुश रहोगे
प्यार सब कुछ तुम खुश रहोगे,
प्यार शाश्वत,
प्यार ही जीवन में सब कुछ है,
प्यार प्यार प्यार।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
मंजिल पाने को इस जग में, निज पथ पर खुद बढ़ना होगा। मंजिल पाने को इस जग में, निज पथ पर खुद बढ़ना होगा।
देर रात तक हम उसी के बारे मैं सोचते हैं, और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है । देर रात तक हम उसी के बारे मैं सोचते हैं, और खिलौनों की तरह सपने टूट जाते है ।
मुठ्ठी भर आसमान भी बाक़ी हैं ! अभी तो पूरा जहान बाक़ी हैं। मुठ्ठी भर आसमान भी बाक़ी हैं ! अभी तो पूरा जहान बाक़ी हैं।
मैं गुलाम हूं तो हां मुझे गर्व है कि मैं जोरू का गुलाम हूँ। मैं गुलाम हूं तो हां मुझे गर्व है कि मैं जोरू का गुलाम हूँ।
देखो कैसे कैसे हथकंडे, आजमाते जा रहे हैं। देखो कैसे कैसे हथकंडे, आजमाते जा रहे हैं।
साथ चले हर आवाजाही आसान हो चला हर सवाल चाह अनचाह हसीन ये जीवन की राह। साथ चले हर आवाजाही आसान हो चला हर सवाल चाह अनचाह हसीन ये जीवन की राह।
अकस्मात एक तूफान सा आया जो कुछ भी था सब कुछ गया अकस्मात एक तूफान सा आया जो कुछ भी था सब कुछ गया
यही आस मैं रखती हूँ मन में, जब -जब मैं पूजती हूँ माता तुम्हें। यही आस मैं रखती हूँ मन में, जब -जब मैं पूजती हूँ माता तुम्हें।
देखा है जो सपनों मे हमने सारे जहां से अच्छा मेरा "हिंदुस्तान" लिखूं। देखा है जो सपनों मे हमने सारे जहां से अच्छा मेरा "हिंदुस्तान" लिखूं।
मगर मैं इसे होली के रंग कहूंगा ही नहीं !! मगर मैं इसे होली के रंग कहूंगा ही नहीं !!
कितनी टूटी है वही जानती है पर कहती कभी नहीं अकेले में आँसू बहाती है। कितनी टूटी है वही जानती है पर कहती कभी नहीं अकेले में आँसू बहाती है।
मानवता राष्ट्रीयता मानक लौह पुरुष सरदार भारत की पीढ़ियों का अभिमान। मानवता राष्ट्रीयता मानक लौह पुरुष सरदार भारत की पीढ़ियों का अभिमान।
इतना सख्त की दूरी को जल्दी हो जाए खत्म होने की। इतना सख्त की दूरी को जल्दी हो जाए खत्म होने की।
खुशहाल बनाने इस जहाँ को, तुम चले तुम चले, तुम चले तुम बढ़े। खुशहाल बनाने इस जहाँ को, तुम चले तुम चले, तुम चले तुम बढ़े।
वो सब खुशियों के मेले भीड़ में भी होंगे बिलकुल अकेले। वो सब खुशियों के मेले भीड़ में भी होंगे बिलकुल अकेले।
जाओ विजयी होकर आना, तिरंगे का सम्मान बढ़ाना। जाओ विजयी होकर आना, तिरंगे का सम्मान बढ़ाना।
पर जन जन को चेताना होगा ! आगे कदम बढ़ाना होगा ! पर जन जन को चेताना होगा ! आगे कदम बढ़ाना होगा !
देवी नहीं बना सकते तो कोई बात नहीं कम से कम औरतों को गाली मत बनाओं। देवी नहीं बना सकते तो कोई बात नहीं कम से कम औरतों को गाली मत बनाओं।
पितृसत्ता हैं बेटे के नाम पर आगे पीढ़ी उसे ही बढ़ानी है। पितृसत्ता हैं बेटे के नाम पर आगे पीढ़ी उसे ही बढ़ानी है।
वह अकेली ही चल रही है, संतानों में आदर्श भर रही है, वह अकेली ही चल रही है, संतानों में आदर्श भर रही है,