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Prakash Chavhan

Romance

3  

Prakash Chavhan

Romance

सोनव सुंदर लागे

सोनव सुंदर लागे

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*सोनव सुंदर लागे 

तुजला सहवास ग 

सुरवळ सुरेख रूप 

न्याहरतें हुर्दय नयं*

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*भुलतं हारथाक ग 

विसावंतं काही मन 

जगावंतं जग मज 

वेध तुझाच घेऊन*

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*उजेड अंधारात 

चढ उतार जिणं 

विचारवळी तुझी 

मज मात्र दुःख हिरावतं *

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*जिणं उन्हातली तहान 

चेहेरा बघूनच भागते 

मज सोनूलं पानी तु 

झरा प्रेमाच हुर्दयी वाहते *

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*तसं तु जीवच खरं माझं 

सकाळ सांजचा सदा 

 जीवन काळीज खरं तु 

 पाहूनच जिणं लागे*

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*असा सुमन सुमित तु 

दरवळ गधं मना चाले 

मुरझू नको कधी 

आले वादळं कितीही*

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*तु स्मित आहे मजला 

 समजून घे सखी

दोन आत्मा पण 

एक जीव आहो आपण*

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