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Varsha Pannase

Tragedy

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Varsha Pannase

Tragedy

मर्म

मर्म

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नेत्री नभ अवकाळी

वाचा ही मुक झाली

काळजात सर काळी

मोत्या सम दव गाली


का दुखरी वळ भाळी

उलगड मन मर्म कळी

हास जरा पाड खळी

जाई तम सोनसळी


साहित्याला गुण द्या
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