Rajesh Chandrani Madanlal Jain

Fantasy


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Rajesh Chandrani Madanlal Jain

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यशस्वी (13) ...

यशस्वी (13) ...

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उस दिन मैंने, आत्महत्या से बचाकर यशस्वी में, निहित संभावनाओं को बचा लिया था। जबकि मरने को उतारू यशस्वी ने स्वयं ना मरते हुए, उस दिन अपने स्वार्थ एवं स्व-केंद्रित अपेक्षाओं को नर्मदा में तिरोहित कर दिया था।

उस दिन के बाद यशस्वी के किये प्रत्येक कार्य ने, मेरे उस विचार को पुष्ट किया था जिसके अनुसार, ईश्वर, प्रत्येक मनुष्य को अत्यधिक क्षमतायें से विभूषित कर दुनिया में भेजता है। मनुष्य का, अपनी क्षमताओं अनुरूप कार्य एवं प्रदर्शन न कर पाने में बाधक कारण, अति स्वार्थ एवं भोग लिप्सायें होती हैं। वास्तव में अति स्वार्थ एवं भोग लिप्सायें, एक वह खूँटा होता है जिसमें बँध जाने से, मनुष्य के जीवन शीर्ष पर पहुँच पाने की सीमायें निर्धारित एवं संकुचित हो जाती हैं।

युवराज के चंडीगढ़ जाने के बाद से, पिछले वर्षों में यशस्वी का उससे, कोई संपर्क नहीं रहा था। एक दिन दोपहर में यशस्वी की उम्र की ही, एक अत्यंत रूपवान लड़की, यशस्वी के प्रतिष्ठान में आई। उसने कुछ परिधान पसंद कर खरीदे। फिर सेल्सगर्ल से पूछ-परख की एवं यशस्वी से मिलने, उसके केबिन में पहुँची।

उसका पहना परिधान 'यशस्वीप्रिया ब्रैंड' का था। (यशस्वी के निर्मित कराये जा रहे परिधान अब तक, शहर में ब्रैंड बन चुके थे।) यशस्वी, उसके अनन्य सौंदर्य से प्रभावित हुई। यशस्वी ने प्रश्नवाचक दृष्टि से उसे देखा।

युवती ने बताया - मेरा नाम, जसलीन है, मैं चंडीगढ़ रहती हूँ। 

यशस्वी ने कहा - आपसे, मिलकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई। (साथ ही पूछ लिया) हमारे निर्मित वस्त्र क्या, चंडीगढ़ भी पहुँचने लगे हैं ?

जसलीन ने कहा - जो मैंने पहना है, यह मुझे युवराज से उपहार में मिला है।

जसलीन का उत्तर अचंभित करने वाला था। यशस्वी, युवराज का नाम सुनकर चौंकी थी। जसलीन ने यशस्वी के मुखड़े पर यह भाव पढ़ लिए थे। आगे जसलीन ने ही कहा था - युवराज और मैं, एक ही कंपनी में काम करते हैं। युवराज मेरे बॉस हैं। उनसा, उच्च आदर्श जीने वाला अब तक मैंने, कोई और नहीं देखा है। मैं, उनसे प्यार करने लगी हूँ, लेकिन युवराज, मुझे कुलीग एवं फ्रेंड की श्रेणी में ही रखते हैं। 

यशस्वी ने कहा - जसलीन, मैं लड़का होती तो आप पर मर मिटी होती। युवराज की आपके प्रेम के प्रति, उदासीनता उचित नहीं जान पड़ती।

जसलीन ने कहा - यशस्वी, युवराज की इस उदासीनता का कारण आप हैं। युवराज के हृदय में, इस रूप में आप समाई हुई हैं।

जसलीन के जवाब ने, यशस्वी को फिर चौंकाया था। यह सुनकर यशस्वी ने मन ही मन, जसलीन से अपनी तुलना की थी। जसलीन के अनुपम रूपवान एवं आकर्षक व्यक्तित्व के समक्ष, यशस्वी कहीं समतुल्य नहीं लगती थी। यशस्वी, सामान्य आकर्षक और कद में जसलीन से दो इंच कम ही थी। जबकि जसलीन छरहरी लंबी, रूपवान ऐसी कि मिस इंडिया में भाग ले तो, मिस इंडिया चुन ली जाए।

यशस्वी यह भी समझ सकी थी कि जसलीन, युवराज के इतने करीब तो है कि उसने, यशस्वी से अपना आत्मिक प्रेम का राज, जसलीन से व्यक्त कर रखा है। उसने मन ही मन तय करते हुए कहा -

युवराज, हमारे यहाँ अच्छे कस्टमर की हैसियत से आया करते थे। (फिर झूठ कहते हुए) उन्हें लेकर, मेरी भावनायें (Feelings)ऐसी नहीं कि वे मुझे, अपने हृदय में स्थान दें।

तब जसलीन ने कहा - हाँ, युवराज ने मुझसे कहा है कि उनका, आपसे प्रेम आत्मिक एवं एकतरफा है। जिसमें वे आपसे कुछ पाने की कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं। उन्होंने मुझसे कहा है कि अगर आप राजी होती हैं तो वे जीवनसंगिनी का स्थान, आपको ही देना चाहते हैं।

यशस्वी ने पूछा - उन्होंने, आपके माध्यम से, यह प्रस्ताव भेजा है?

जसलीन ने बताया - नहीं, मेरा आपसे मिलने आना युवराज की जानकारी में नहीं है। मैं, आपसे मालूम करने के उद्देश्य से स्वयं ही आई हूँ। युवराज के प्रेम को लेकर आपके उत्तर से, मैं तय कर सकूँगी कि युवराज से अपने प्रेम को लेकर, उनसे मैं कोई अपेक्षा रखूँ या अपने हृदय में इसे, निरपेक्ष एवं आत्मिक प्रेम जैसे ही रख लूँ ?

अब यशस्वी ने कहा - नहीं, आपके जैसी सुंदर नवयौवना के सुंदर हृदय में बसने वाला यह प्रेम एकतरफा नहीं रह जाना चाहिए। मैं, चाहूँगी कि युवराज से, आपको प्रेम का प्रतिदान अवश्य मिले। युवराज के अच्छे व्यक्तित्व से, आप जैसे ही मैं भी प्रभावित हूँ। मगर उनसे विवाह की नहीं सोचती। (फिर झूठ कहा) वास्तव में, मैं अपनी व्यवसायिक महत्वाकाँक्षाओं के प्रति इतनी समर्पित हूँ कि हृदय में, किसी के प्रति आप जैसा प्रेम, अनुभव नहीं करती। 

यशस्वी के उत्तर से जसलीन के मुखड़े के भाव, पहेली बूझने वाले जैसे दिखे। जैसे, उसे समझ नहीं आ रहा हो कि इस पर वह खुश हो या नहीं! प्रकट में जसलीन ने कहा - युवराज से मैं प्रेम अवश्य करती हूँ। आपसे मिलकर, मुझे लग रहा है कि युवराज ने अपने प्रेम के लिए सर्वश्रेष्ठ पात्र चुना है। जो उत्तर सुनने की अपेक्षा से मैं, यहाँ आई थी, वही उत्तर आपने दे दिया है। तब भी ऐसा सुनकर मुझे ख़ुशी नहीं हो रही है। सच मानो, मुझे युवराज पर दया आ रही है कि उस जैसा आदर्श युवक, अपना प्रेम पा सकने में असफल हो रहा है। मैं चाहूँगी कि आप, पुनः विचार कीजिए। युवराज जैसा जीवनसाथी दूसरा कोई, आपको शायद फिर नहीं मिल सकेगा। 

यशस्वी ने कहा - नहीं जसलीन, पुनर्विचार संभव नहीं।

फिर युवराज के लिए जसलीन की पात्रता परीक्षित करने के उद्देश्य से आगे पूछा - जसलीन, आप बताओ जिसने, अपने हृदय में किसी और को बसाया है, उसके साथ जीवन जीना, आपके लिए कठिन नहीं होगा?

जसलीन ने कहा - निश्चित ही कठिन होता। अगर युवराज के दिल में आपकी जगह कोई और बैठी होती। युवराज के हृदय में स्वयं मेरे अपने होने के अतिरिक्त, आपका होना मेरे लिए गौरव का विषय होगा। 

यशस्वी ने जसलीन से पूछा - अब आप युवराज को अपने पर, राजी करने के लिए, क्या करने की सोचती हो ?जसलीन - मैं चंडीगढ़, वापिस जाने के बाद आपसे हुई यह सारी चर्चा उनसे कहूँगी। फिर उन्हें आपसे वीडियो कॉल पर बात करवाने की सोचती हूँ। मुझे आशा है कि आपसे बात कर लेने के उपरांत युवराज, मेरा प्रेम निवेदन स्वीकार कर लेंगे। यशस्वी ने कहा - मुझे दिख रहा है कि युवराज एवं आपकी बनती जोड़ी, ईश्वर की इस पीढ़ी की बनाई, सर्वश्रेष्ठ जोड़ी (युगल) होगी। (फिर मुस्कुरा कर) कहा - मेरी शुभकामनायें एवं आप दोनों के लिए बधाई। जसलीन ने जाने के पहले यशस्वी को व्हाट्सएप, फेसबुक आदि में स्वयं से जोड़ा था। कहा था - आप अपने सारे व्यवसायिक मनोरथ सिद्ध करने में कामयाब हों। मैं चाहूँगी कि आप, मुझसे कॉल पर निरंतर बात करते रहें। ताकि मैं, आप जैसी अच्छी एवं सफल नारी बन सकूँ। यशस्वी ने अपने व्यस्त समय में भी जसलीन को, रात्रि भोज के लिए मनाया था। उसके उपरांत उसी रात, जसलीन वापिस चली गई थी। अवकाश वाले दिन आज, यशस्वी ने जसलीन से हुआ सारा वार्तालाप, जीवनी, प्रिया एवं मेरे समक्ष कहा। इसे सुन हम सभी अचंभित हुए।

जीवनी ने जिज्ञासा से पूछा - क्या फिर तुम्हारी, युवराज से बात हुई ?

यशस्वी ने बताया - हाँ, जसलीन के जाने के चौथे दिन, आज ही जसलीन ने ही युवराज से बात करवाई है।

इस पर चर्चा करना हम सभी को, अपने अपने दृष्टि से महत्वपूर्ण लगा।

चर्चा आरंभ करने को, प्रिया ने यह कहते हुए रोका कि - पहले पेट पूजा फिर भजन गोपाला। हम सब हँसे थे, तब प्रिया, यशस्वी एवं जीवनी, लंच के लिए टेबल तैयार करने अंदर चलीं गई थीं ...



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