ये कैसा प्यार भाग-१०
ये कैसा प्यार भाग-१०


(निकिता अंजलि के पीछे उसे रोकने को दौड़ रही है, निकिता परेशानी में इधर उधर देखती है उसे सोनू दिखाई देता है वह उसकी तरफ भागती है)
"सुनिऐ...सुन...सुनिऐ एक्सक्यूज मी....... "
(सोनु उसकी आवाज सुनकर एक पल के लिऐ सकपका जाता है फिर हौसला रखते हुए..)
"...क्या बात है...आप कुछ घबरायी सी लगती हैं..... "
"..व...वो..अंजलि....... "
"...क्या हुआ...पछता रही होगी अपनी गलती पर...हा हा हा....सोच रही होगी मैंने दोस्ती तोड़ दी...कल देखना कैसै हँसाता हूँ उसे... "
"..पर..सुनिए तो...( हाँफती है) ..उसे अपनी गलती पर पछतावा हुआ वो अपने को कोस रही थी...अचानक खड़ी हुई और तेजी से गुमसुम चली जा रही है... "
" अब बाकी घर जाकर रोऐगी ना...हा हा हा.... "
"..अ आप समझ नहीं रहे हैं, मैंने उसकी आँखों में देखा है वो कुछ भी कर सकती है...पता नहीं क्या करने वाली है..प्लीज कुछ कीजिऐ.... "
"..ये क्या कह रही हैं वह क्या कर सकती है ?"
"..कुछ भी..कुछ भी...प्लीज कुछ गलत होने से पहले उसे रोकिऐ... "
"..क्या....किस तरफ गयी है वो....?"
"..उस तरफ.....आप ही रोक सकते हैं उसे प्लीज ...जल्दी "
(सोनु उसी तरफ भागता है बाहर देखता है कि अंजलि स्कूटी स्टार्ट करके निकल रही है सोनु उसे अवाज देता है पर वह नहीं सुनती वह सीधे निकल जाती है...सोनू भागकर एक बाइक वाले लड़के के पास जाता है)
"...एक्सक्यूज मी.....अरे मनोज तुम यार....अचछा हुआ तू मिला...प्लीज बाइक देना..मैं जल्दी में हूँ यार "
"पर हुआ क्या है..? ...घबराया हुआ क्यों हैं ?"
"...बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी अगर देर हुई तो...तू गाड़ी की चाबी दे...बाद में बताऊँगा.... "
"..ये ले पर ठीक से जाना...केयर से"
"..तू चिन्ता मत कर...बाइक कहाँ है ?"
( मनोज सोनू को बाइक दिखा देता है सोनु बाइक को फटाफट उसी तरफ दौड़ा देता है जिधर अंजलि गई है थोड़ी दूरी पर अंजलि दिखायी देती है वह उसे आवाज देता है, अंजलि आवाज सुनकर स्पीड और बढ़ा देती है)
"...अंजलि......ये क्या पागलपन है...अंजलि....! "
(वह सुनती नहीं, सामने से एक बोझ लदा हुआ ट्रक आ रहा है...वह उसे नहीं देखती बल्कि उसे सोनु और अपनी लड़ाई के ख्याल ही दिख रहे हैं..सोनू की नजर ट्रक और अंजलि दोनों पर पड़ती है..)
"..अंजलि किधर जा रही हो...सामने देखो..सामने से...ओह माई गॉड...! .....उस तरफ से गाड़ी मूव करो......अंजलिsss !"
(अपनी बाइक की स्पीड तेज करता है अंजलि के करीब पहुँचकर उसे साइड करने के लिए कहता है पर अंजलि गुमसुम है वह सीधी चली जा रही है उसकी आँखों में आँसु हैं यह देखकर सोनू अपनी बाइक से अंजली के ऊपर कूदता है और उसे उसकी स्कूटी से अलग कर किनारे ले जाता है दोनों साइड की झाड़ियों में गिरते हैं...जैसे ही वे गिरते हैं ट्रक से बाइक और स्कूटी दोनों टकराते हैं ट्रक ड्राइवर घबरा जाता है और सीधा भाग जाता है वह गाड़ी रोकता ही नहीं..लोगों की भीड़ जमा हो जाती है....इधर सोनु और अंजलि खड़े होते हैं..और अंजलि को देखता है)
"...(देखकर कि कहीं चोट तो नही लगी,फिर गुस्से में..).. ये क्या कर रही थी तुम....?"
"...(रोते हुए)... तुमने मुझे क्यों बचाया..मर जाने देते...क्यों बचा
या क्यों ?"
(यह सुनकर सोनु उसके जोरदार तमाचा जड़ देता है तड़ाsssss....क !)
"..क्या...? ...जान देना चाहती थी..घरवालों परिवार...दोस्त साथियों किसी का ख्याल नहीं आया तुम्हें...?"
"...दोस्त ? ....(जोर-जोर से रोती है).. दोस्त कहाँ..तुमने तो दोस्ती तोड़ दी ...... "
"....एक दोस्त से दोस्ती टूटने पर जान दी जाती है भला....और मैंने कोई दोस्ती नहीं तोड़ी, मैंने ऐसा सिर्फ मजाक में कहा था, मैं नही जानता था तुम इतना कुछ कर बैठोगी.... मैं हुँ तुम्हारा गुनाहगार मुझे सजा देती...तुम्हारा खुद का क्या कसूर था...अ..और मैंने तुझ जैसी अच्छी दोस्त पर हाथ भी उठाया....मैं इस हाथ को ही तोड़ देता हूँ ।(जमीन पर हाथ को मारने लगता है)"
"..यये..ये क्या कर रहे हो तुम ? .....(उसका हाथ रोक लेती है) तुमने थप्पड़ मारा न..ठीक किया..दोस्ती तो मैं तोड़ने चली थी ठीक किया....बल्कि फिर मारो...ताकि मैं ऐसी गलती दोबारा न करुँ...सॉरी.. "
"प्लीज अंजलि दुबारा ऐसा मत करना...मैं तुझ जैसी दोस्त खोना नहीं चाहता..(अपने कान पकड़ लेता है) "
"(उसके हाथ उसके कान से हटाकर अपने कान पकड़ लेती है) ...मुझे माफ कर दो मैं भी तुम्हारे जैसा दोस्त नहीं खोना चाहती सोनु.. "
"....अरे हाँ....जल्दी चलो अब...वो तुम्हारी सहेली तुम्हारा मूड देखकर परेशान हो गयी थी...वो तब से परेशान होगी...उसी ने बताया कि तुम होश में नहीं हो... "
"...बहुत अच्छी तरह जानती है वो मुझे और प्यार भी बहुत करती है... "
"...फिर भी तुमने ऐसी हरकत की..इतना भी नहीं सोचा कि उस पर क्या गुजरेगी ?"
"..सॉरी यार..यू नो आई एम ए टेमंपरर गर्ल ...मुझे जब गुस्सा आता है तो मैं होश खो बैठती हूँ....पर आई होप वो मुझे माफ़ कर देगी।"
"...तो जल्दी चलो उसके पास और माफी माँगो...जाने क्या हाल होगा उसका... "
(दूर से ही लोगों की भीड़ की तरफ ध्यान जाता है.....और फिर स्कूटी और बाइक देखता है...दोनों गाड़ियों की हालत देखकर .....)
"...ओह माई गॉड.....बाइक...? (सिर पकड़ लेता है).. अब क्या होगा ?"
(अंजलि सोनू की तरफ देखकर दोनों कान पकड़ लेती है और सॉरी कहने जैसा मुहँ बना लेती है)
"...आई एम सॉरी प्लीस फॉरगिव मी प्लीज... "
"अंजलि तुम्हारे सॉरी कहने से क्या होगा मनोज की बाइक तो गयी ! ...उसका तो कचूमर निकल गया......अब वो शायद आगे से मेरी मदद न करे बल्कि दुश्मनी न मोल ले ! ......अ...ओ..और मेरा तो ऐसी हैसियत भी नहीं कि उसे नई बाइक लेकर दे सकूँ... "
"...यू डॉन्ट बी फिक्र....मैं उसे नई बाइक दूँगी.... "
"...हूँ.....ओ ssssss...ओ हाँ......( गुस्से में) ....मैं तो भूल ही गया था कि तुम तो बड़े घराने की हो..तुम तो ऐसी दस बाइक खड़ी कर सकती हो...पर तुम ये क्यों नहीं सोचती कि आगे से मैं उसे विश्वास में ले सकूँगा ? .....वो मुझसे पहले जैसी दोस्ती रखेगा इस बात की गारण्टी दे सकती हो.... "
"...( शर्मिन्दगी से).. मैं तुम्हारे दिल की बात समझ सकती हूँ...एन्ड बिलीव मी..ऐसा कहने का मेरा मतलब था कि उसे बाइक का नुकसान नहीं होगा...रियली मुझे अपने पैसों पर कभी गुरूर नहीं...बिलीव मी ! "
"..फिर भा अंजलि उसकी और मेरी दोस्ती में कहीं तो खोट आऐगी न ?"
"..नहीं आएगी...मैं बात करूँगी, मैं कहूँगी कि मेरी वजह से ऐसा हुआ है ? ( सोचकर) बल्कि वो तुम पर और भी नाज करेगा कि तुमने किसी की जान बचायी है इसमे उसकी चीज लगी है बस ... मुझे लगता है जैसे अच्छे तुम हो तुम्हारे दोस्त भी अच्छे होंगे।"
"..तुम्हे लगता है वो मानेगा ? मुझे माफ करेगा ?"
"यस फ्रैड....चलो अब मुस्कुराओ नहीं तो अपनी टूटी स्कूटी का हरजाना भी तुमसे लूँगी ( हँसती है) "
"...क्या..??? ......मैंने तोड़ी है तेरी स्कूटी ? ....( फिर अंजलि का मिजाज समझकर) ....अबसे ऐसी हरकत की तो अभी स्कूटी के पुर्जे टुटे हैं तेरा माइण्ड भी ऐसे ही रिफ्रेश कर दूँगा..... "
"...यूsssss....मतलब क्या है तुम्हारा...अई हेव नॉट माइण्ड? "
"...हा हा हा.....यस...यू आर ए गर्ल विदाउट माइण्ड......हाहाहा.... "
"...छोड़ूँगी नहीं तुम्हें (उसे हल्के से मुक्के मारती है) .....तुम गन्दे हो...(बनावटी रोती है) "
"...ऐ..ऐ..मैं मजाक कर रहा हूँ यार ?"
"...रियली... प्रॉमिज़...?? "
"....हाँ हँ चलो वो वेट कर रही होगी।"
"..हाँ उसका तो रो रो के बुरा हाल होगा।"
( फिर दोनों वापस कॉलेज ग्राऊण्ड में आ जाते हैं। निकिता दौड़कर अंजलि को गले लगा लेती है)
"ये क्या कर रही थी तुम अंजलि..मैं तुमसे नाराज हूँ।"
"स..सॉरी यार (दोंनों कान पकड़ लेती है)"
(फिर से दोंनों गले लग जाते हैं। निकिता वैसै ही आँसूओं भरी आँखों से अंजलि के गले से लगे हुऐ सोनू की तरफ देखती है जैसे वह उसका धन्यवाद कर रही हो.।,सोनू फिर से उसकी मासूम आँखों में खो जाता है)
[तो दोस्तों देखा आपने अंजलि किस हद से सोनू को चाहती है मगर सोनू इससे अन्जान होकर निकिता में खोने लगा है]
(क्रमश:)