Kusum Sharma

Comedy


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Kusum Sharma

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व्यंग्य-तौबा अब नही

व्यंग्य-तौबा अब नही

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जब देखो ...जहां देखो वाट्सएप्प ..फेसबुक या कोई भी जोक! मजाक का मुद्दा"सताया हुआ" या कि" बेचारा पति" तो आज मैनें भी भगवान से लेकर इंसान तक को लपेटने की ठान ली।


वैसे तो पुरुष प्रजाति में पिता ,भाई,पति, बेटा, चाचा ताऊ सभी आ जातें है ।और मुझसे लड़ने वाले भी है। पर क्या करूँ कुछ सूझ ही नही रहा है। तो आज बलि पर "सारे पति।"

शुरूआत करते है, भगवान से ही हालाँकि अगर भगवान को पता चल गया मैनें उनकी हँसी उड़ाई तो सीधे नरक में फेंकने वाले है मुझे।


एक कहावत है "कठिया गये" मतलब काठ के बन गए।

बेचारे भगवान विष्णु... एक जो ज्ञान विज्ञान की देवी मस्तिष्क में..., पत्नी चंचला पैरों में!! सोने को शेषनाग की शय्या: स्थान क्षीरसागर क्या करें क्या ना करे इसीलिए कठिया गए।


भगवान शिव बेचारे कैलाश पर विराज कर तपस्या लीन हो गए थे। किन्तु कामदेव जी ने उन्हें अपनी पत्नी सहित परेशान किया। और आखिर ग्रहस्थ बना दिया।। पत्नी देवी जिद्दी...करे तो क्या करे, जब भगवान खुद त्रस्त है तो उनके बनाये मानव की क्या बिसात।


कल पति महोदय से कहा आप कभी कोई गिफ्ट नही देते तो वे दीदे फाड़कर मुझे देखने लगे--"अभी तुम्हें अपनी पसन्द की शॉपिंग करवाई और कहती हो ,बरसों हो गए कोई गिफ्ट नही दिया" फिर कहा... कितना झूठ बोलती हो तुम!!


मैनें कहा तो जब बोलती हुँ, उसी समय मेरा झूठ पकड़ कर बताओ ,बोले---" इतनी तेजी से बोलती हो,कैसे पकड़ूँ"


हँसी आ गई बेचारे कितने मासूम हैं। जब मेरा झूठ नही पकड़ पाते तो, जेब से चुराए पैसे की चोरी कैसे पकड़ पाएंगे। और पकड़ भी लिया तो हिम्मत चाहिए!!!!

है भगवान इतनी बड़बोली--" कहीं सचमुच ये लेख पढ़ लिया तो मेरी बारह न बजा दे खड़ूस कहीं के, "हाय, राम ये क्या कह गई अब खुद ही अपने सबूत छोड़ दिये" 

अभी कल ही स्कूल के साथी टीचर से पूछा कि " और सर कब शादी कर रहे हो।"


बोले क्या बताऊं मेडम जब से उसे पता चला मैं सीधा सच्चा मास्टर हुँ । वो मेरी शक्ल भी नही देखना चाहती।

"कहती है तुममें औऱ आदिमानव में क्या अंतर है।"सर का रुआंसा चेहरा देख कर हँसी आई ।और उस लडक़ी की चतुर बुद्धि को मान गई।


लोग कहते हैं कि औरत की बुद्धि चोटी के नीचे होती है।पर वो बेचारे लोग भूल ही जातें है कि औरतों ने चोटियां बनाना ही छोड़ दिया !! बालों से बड़ा प्यार है माना, लेकिन उन्हें अपने लहराते बाल चाहिए ! तो , "डाबर आँवला" के एड के लिए; बाकी समय तो क्लचर से काम चल जाता है।  

हिम्मत है किसी में कि औरत को चोटी पकड़ के घसीट सके।


अरे कैसे??? हेड एंड शोल्डर का शैम्पू जो इस्तेमाल कर रही है।


चलो बहुत कुछ कह दिया ,कहना तो औऱ भी चाहती हूं,पर मेरे प्राचार्य! बंटी ओर उनकी बबली ... हाय, अब ये किनका नाम ले बैठी।ना अब ना बोलूंगी-वरना नोकरी गई।


कितना उलझा देते हो आप लोग में एक सीधी सादी टीचर ,गृहस्थी वाली नानी दादी।

और ये विषय---तौबा अब नही



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