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Dr.Madhu Andhiwal

Tragedy Inspirational

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Dr.Madhu Andhiwal

Tragedy Inspirational

वसुधा का बसेरा

वसुधा का बसेरा

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 अरे वसुधा आज फिर एक बच्ची तेरे घर के बाहर पालने में आ गयी। वसुधा जैसे ही सुबह अपने इस कच्चे मकान के बाहर आई पड़ोस की रमा चाची बोली। वसुधा बड़ी मोहक अदा से मुस्कराई हां काकी आज मैं 8 बच्चियों की मां बन गयी। देखना काकी किसी दिन तुम्हारी वसुधा का ये ही बेटियाँ नाम रोशन करेंगी जिनके मां बाप अंधेरे में अपना पाप दुनिया से छुपाने के लिये मेरे पालने में छोड़ जाते हैं। वसुधा की शादी उसके मां बाप ने गरीबी के कारण बहुत अधिक उम्र के विधुर राम प्रसाद से इस लिये कर दी थी क्योंकि उसका कर्जा वसुधा के मां बाप पर था ‌। राम प्रसाद की पहली पत्नी से दो लड़के व एक मानसिक रुप से कमजोर लड़की थी। दोनों बेटों की शादी हो चुकी थी। वह दोनों अलग रहते थे रामप्रसाद को अपनी इस बेटी के लिये कोई देखरेख करने वाली चाहिए थी बस वसुधा से अच्छा कोई और उपाय नहीं दिखा और कर्ज के बदले वसुधा को घर ले आया। अचानक रात को वह सोया तो सुबह उठा ही नहीं। ये वसुधा के लिये बहुत बड़ा आघात था दोनों बेटों ने वसुधा के साथ साथ अपनी बहन को भी घर से बेघर कर दिया। वसुधा कहां जाती उसने पड़ोस के गांव में एक सज्जन व्यक्ति के घर काम करना शुरू कर दिया उनके मकान में बहुत बड़ा हिस्सा खाली पड़ा था उन्होंने उस हिस्से में एक कमरा बना कर वसुधा को दे दिया क्योंकि वह दोनों भी बुजुर्ग थे और अकेले रहते थे। वसुधा जी जान से उनकी सेवा करती वह भी वसुधा और उसके पति की मन्द बुद्धि बच्ची का पूरा ध्यान रखते। एक दिन पता ना कैसे वह बच्ची शाम के छुटपुटे में बाहर चली गयी और दो दरिन्दों ने रौंद दिया। जब घर नहीं लौटी तब उसने बाहर ढूंढा और पड़ोसी भी उसकी सहायता कर रहे थे। एक जगह वह मरणासन्न अवस्था में मिली जब तक उसे चिकित्सा मिलती उसने वसुधा के हाथों में आखिरी सांस ले ली। बस उसी दिन वसुधा ने अपने अहाते के बाहर बोर्ड लगा दिया "नन्ही कलियों का बसेरा।"

    आज उसके बसेरे में आठवीं बच्ची आ गयी। वह बहुत खुश थी। रमा चाची सब से कह रही थी देखो यह है असली धरा जैसे धरती मां सबका बोझ उठाती है चाहे उसको सब कष्ट देते हैं पर वह मां की तरह सबको पालती है इसी तरह ये असली मां ना होकर भी सब बच्चियों को अपने आंचल में सुरक्षित रख रही है। ऐसा था वसुधा का ये बसेरा।


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