Jisha Rajesh

Tragedy Inspirational


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Jisha Rajesh

Tragedy Inspirational


वो वैम्पायर है

वो वैम्पायर है

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अंधेरी रात, सन्नाटे की चादर ओढ़ कर खड़ी थी। जंगल के पेड़ भी नतमस्तक हो गए थे। उन पेड़ों की पत्तियाँ तक नहीं हिल रही थी जैसे मानो सबने मिलकर मौन व्रत रख लिया हो। तभी एक हवा का झोंका आया और पत्तियों की सरसराहट रात की ख़ामोशी में गूँज उठी। लेकिन अगले ही पल, उस जंगल ने एक ऐसी आहट सुनी की उसने फिर से ख़ामोशी का नक़ाब पहन लिया। वो आहट, उसके क़दमों की आहट थी। वो, जो अँधेरे के साम्राज्य के राजा के नाम से जाना जाता था। वो, एक वैम्पायर था। वो तेज़ कदमों से जंगली घास और बेलों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा। वो भूख से व्याकुल था और शिकार की तलाश में न जाने कब से जंगल में घूम रहा था। अब तो, उस पर पागलपन सवार हो गया था। भूख ने उसका बुरा हाल जो कर दिया था। वो कईं गुना अधिक खूंखार और वहशी बन गया था।


तभी, उसे कई से रक्त की गंध आयी। मनुष्य के रक्त की गंध पाकर जैसे वो ख़ुशी से झूम उठा। वो उस गंध को पीछा करता हुआ, उसके स्रोत की तरफ बढ़ा। जॅंगल जहाँ ख़त्म होता था, उसके आगे से एक सड़क जाती थी। उसे यकीन था, उस सड़क पर ज़रूर कोई मनुष्य घूम रहा होगा। अपनी क्षुधा को शांत करने के विचार ने उसके मन में एक नयी उमंग भर दी। किसी ने सच ही कहा है, चाहे मानव हो या दानव, सबके लिए क्षुधा से बड़ी कोई व्यथा नहीं है। जैसे -जैसे, वो सड़क के पास पहुंचा, रक्त की गंध और भी तीव्र हो गयी और वो उत्साह से मदिर हो उठा। जंगल के अंत में, एक पेड़ों का झुरमुट था। वो उन पेड़ों के पीछे छुप गया और फिर धीरे से सड़क की तरफ झाँक कर देखा। वो अपने शिकार की एक झलक पाने को आतुर था। लेकिन, उसने सड़क पर जो नज़ारा देखा, तो बस बिना पलकें झपकाए देखता ही रह गया। उसकी भूख - प्यास न जाने कहाँ हवा हो गयी थी।


 सड़क के किनारे एक बस स्टॉप था। वहां एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी। उसके सुन्दर चेहरे पर परेशानी का भाव था। वो बार-बार बड़ी बेचैनी के साथ अपनी घड़ी देख रही थी। वैम्पायर की नज़र थी की, लाख कोशिशों के बाद भी उस लड़की से हटने को राज़ी ही नहीं होती थी। वो कभी उस लड़की की हिरनी जैसी आँखों में डूब जाता, तो कभी उसके खूबसूरती से तराशे चेहरे को मंत्र -ंमुग्ध होकर देखता रह जाता। इतने में, वहां दो आदमी आये और उस लड़की से छेड़खानी करने लगे। वो बेचारी डर गयी और बस स्टॉप के एक कोने से चिपक कर खड़ी, उन लोगों को लाचारी भरी नज़रों से देखती ही रही। ये देख कर उनकी हिम्मत और बढ़ गयी कर उनके कदम उस अबला लड़की की तरफ उन्मत्त होकर बढ़ने लगे। उसने उनके आगे हाथ जोड़े और करुण रुदन करने लगी। पर उसके आँसू देखकर भी उनका दिला न पिघला बल्कि उनका अहंकार और बढ़ गया। दोनों आगे आये और उनमें से एक ने झपट्टा मारकर उस लड़की को अपनी बाहों में कस लिया। वो डर गयी और रोने -चिल्लाने लगी। उसने खुद को छुड़ाने के लिए संघर्ष भी किया, पर वे दोनों उसे मज़बूती से पकड़े रहे। उसका झटपटाना देखकर, उसकी लाचारी पर वे दोनों ठहाके मारकर पागलों की तरह हँसे।


 वो लड़की मदद के लिए चिल्लाई। लेकिन, उस सूनी सड़क पर उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था। सड़क के आस-पास के घरों में रहने वालों ने उसकी चीख-पुकार सुनी तो, मगर कोई उसकी मदद करने आगे न आया। सब घर की बत्ती बुझाकर, अनजान बनकर बैठ गए। कोई भला क्यों, किसी अजनबी लड़की के पचड़े में पड़ कर अपनी जान गँवाना चाहेगा ? हाँ, कल जब ये खबर, अखबारों और सोशल मीडिया पर आएगी, तो एक मोमबत्ती जला लेंगे और उन अपराधियों की आलोचना कर, एक सच्चा इंसान होने का फ़र्ज़ निभा लेंगे। बस और क्या ?


 वो दोनों, उस लड़की को बाँहों में जकड़े हुए, उसकी विवशता का मज़ाक उड़ा रहे थे। वो बेबस लड़की फूट-फूट कर रो पड़ी। और वो कर भी क्या सकती थी ? उसके लिए सारे रास्ते बंद हो चुके थे। उस मनहूस रात का अँधियारा, ग्रहण बनकर उसके सम्मान और जीवन दोनों पर हावी होने को था। उन दोनों आदमियों ने अब ज़्यादा देर करना ठीक नहीं समझा। एक ने दूसरे को इशारे किया की, उन्हें जल्दी से अपनी तृष्णा को तृप्त कर के, रात के अँधेरे में ही कहीं गुम हो जाना चाहिए। दूसरे ने भी हामी भरी।


वो वैम्पायर दूर खड़ा, सब कुछ देख रहा था। उस लड़की की विवशता और आंसूओं ने उसके दिल में अजीब सा दर्द पैदा कर दिया था। वो समझ नहीं पा रहा था की ये उसके साथ क्या हो रहा था ? किसी और की पीड़ा, उसे क्यों तड़पा रही है ? उसका धर्म तो केवल दर्द देना है। ये स्नेह, सहानुभूति और दया जैसी भावनाएं उसके अंदर कैसे पैदा हो गयी ? उसने तो केवल हिंसा, घृणा और अत्याचार करने के लिए जन्म लिया है। फिर, ये संवेदनाएं, उसके वजूद का हिस्सा कब बन गयी ?


 इतने में, उन पापियों ने अपने अत्याचारों के कोड़े, उस लड़की पर बरसाने शुरू कर दिए। उनकी कामाग्नि की लपटों में जल रही वो लड़की ज़ोर से चीखी। उसकी चीखों ने उस वैम्पायर के ह्रदय को विदारित कर दिया। उस दर्द की तीव्रता इतनी घातक थी, की उसे लगा उसका कलेजा अभी फट पड़ेगा। उसे एहसास हो गया की अगर उसने कुछ किया नहीं तो उस लड़की की चीखें उसे जीवन भर शांति नहीं देंगी। वो चीखें, उसके कानों में गूँजती रहेंगी और उसे हर पल अपराधी करार देती रहेंगी। क्यूंकि, पाप करने वालों से भी बड़ा पापी तो वो होता है जो अपने सामने पाप को होते देखकर भी, नपुंसक बन, चुप-चाप बैठा रहता हैं। नहीं, वो चुप नहीं बैठ सकता। क्यूंकि, न तो वो नामर्द हैं, न ही इंसान, वो तो वैम्पायर है।


 वो तूफान की तरह जंगल से बाहर आया और उन इंसान रुपी हैवानों पर टूट पड़ा। उसने उन दोनों को अपनी सशक्त भुजाओ में उठाया और उन्हें बीच में से तोड़ दिया। उनकी कई हड्डियों के एक साथ टूटने की आवाज़, रात के सन्नाटे में, न्याय की अन्याय पर विजय-घोष के समान गूँज उठी। अब दर्द में कराहने और दया की भीख मांगने की बारी उन पापियों की थी। उनका रुदन सुनकर, जंगल में पेड़ों के पत्ते ज़ोर से सरसराने लगे जैसे बड़े जोश से ताली बजाकर उस वैम्पायर का अभिनन्दन कर रहें हो। उसने अपने लम्बे, खूंखार नखों से उनके शरीर को चीर -फाड़ कर रख दिया। फिर, जी भरकर उनका रक्त पिया और अपनी क्षुधा को शांत किया। अपना भोजन समाप्त करके जब वो उठा, तो उन दुष्कर्मियों के शरीर के छोटे-छोटे, बेजान टुकड़े चारों और बिखरे पड़े थे।


आज उस वैम्पायर का पेट ही नहीं, मन भी तृप्त था। इससे पहले भी उसने शिकार तो बहुत किये, लेकिन कभी इतनी तृप्ति का आभास उसे नहीं हुआ था। आज उसने बड़े पुण्य का काम जो किया था। आज की रात, एक इंसान जब दूसरे इंसान के साथ हैवानियत से पेश आ रहा था, तो एक हैवान ने आकर इंसानियत का फ़र्ज़ अदा कर दिया। उस वैम्पायर ने ये साबित कर दिया की कोई जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मों से ही इंसान या हैवान बनता है। वैम्पायर ने बहुत सुना था, इंसानियत और उन इंसानी आदर्शों के बारे में, जो इंसानों को दानव की श्रेणी से ऊपर उठाते हैं। लेकिन आज रात जो उसने देखा, उस घटना ने इंसानों के प्रति उसका दृष्टिकोण ही बदल दिया। अगर इंसान ऐसे होते हैं, तो उसने खुद पर फ़क्र महसूस किया, की वो इंसान नहीं बल्कि एक वैम्पायर है।


वो लड़की उस वैम्पायर को जंगल की तरफ जाते हुई देखती रही। उसने सोचा दानव तो घृणा के पात्र होते हैं, मगर आज इस दानव ने वो काम किया है की इसका स्थान मानव से भी कई ऊपर उठ गया है। अब, वो ईश्वर के सामान पूजनीय हो गया है। वो लड़की दौड़ कर उसके पैरों में गिर गयी और उसके चरण छूकर अपनी कृतज्ञता प्रकट की। उसने उस लड़की की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन उन इंसान रुपी दरिंदों की तरह उसका चीर हरने के लिए नहीं बल्कि उसके आँसू पोछने के लिए। अगले पल, वो जंगल के अँधेरे में कहीं गुम हो गया। उसके जाने के बाद वो लड़की सोचती रही, 'अगर, हर अंधेरे कोने में ऐसे वैम्पायर छुपे बैठे होते तो कोई भी लाचार लड़की कभी, मानव के भेष में घूम रहे, वहशी भेड़ियों की हवस का शिकार न बनती। काश, दुनिया के हर गली, हर मोहल्ले में ऐसे दानव होते, जो मानव को मानवता का पाठ याद दिला सकें।'



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