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Shishpal Chiniya

Drama

3  

Shishpal Chiniya

Drama

वो कौन थी

वो कौन थी

3 mins
582

हम अक्सर सफर करते रहते हैं और इस सफर में हमें कई बार अनजान लोग मिलते हैं। जिन्हें हम जानते तो नहीं लेकिन पहचान जरूर जाते है और उन लोगों की बाते हमें दिल से सुनने की इच्छा रहती है। मैं एक बार पेपर देने के लिए राजस्थान से दिल्ली गया था।

मुझे ट्रेन में जाना था तो मैं रेलवे स्टेशन गया और टिकट लिया और ट्रेन में चला गया। ट्रेन चलने वाली थी तो मैं खुद को सचेत रखना चाहता था तो बैग को आगे की तरफ करके बैठा था। तभी मेरी पास वाली सीट पर एक लड़की आकर बैठी वो थोड़ी अपसेट थी क्योंकि ट्रेन चल पड़ी थी तो वो दौड़कर आई थी। मुझे देखकर उसने खुद को कुछ कहा और बड़ी विनम्रता से बोली - " अगर आज ट्रेन छूट जाती तो शायद मेरा पेपर छुट जाता " मैंने पूछा - " आपने कुछ कहा तो नहीं।"

मेरी तरफ अनजानी सी देखकर बोली- " जी नहीं।"

ट्रेन चल पड़ी थी और रास्ता लगभग 6 घंटे का था। तो मैंने सोचा - क्यों न पापा को सूचना दे दूं की ट्रेन मिल चुकी हैं , और फिर सो जाऊं। मैनें अपना फोन निकाला और पापा को फोन किया और कहा - " पापा मुझे ट्रेन मिल चुकी है और मैं अब जा रहा हूं , पेपर देकर कल तक आ जाऊंगा। मुझे देखकर उसने लड़की ने भी फोन किया और वही कहा जो मैंने कहा।

फिर मैंने पूछ लिया - " आप पेपर देने जा रही हैं।

" जी हां " - उसने कहा।

मैनें फिर पूछा - "आप कहां से हो।"

"झुंझुनूं जिले से " और आप - उसने पूछा।

"जी मैं चूरू जिले से।"

फिर हमारी बातचीत शुरू हुई। मैं - " क्या करती हैं आप।"

वो - " जी कुछ नहीं सेकंड ईयर में हूं कॉलेज चल रही है और आप।"

जी मैं भी कॉलेज सेकंड ईयर में हूं।

"कौन कौन है आप के घर में "- उसने पूछा

"जी मैं और मेरे दो भाई है एक बहन भी है जो मौसी की है लेकिन हमारे साथ रहती है ।" - मैनें जवाब दिया ।

और आप

" जी मेरी एक बड़ी बहन है जो राजकीय अध्यापक है और मैं तैयारी कर रही हूँ।"

मैनें पूछा - " आप दिल्ली किस पेपर के लिए जा रही हैं ।

जब जवाब दिया तो संयोग से हम एक ही पेपर देने जा रहे थे लेकिन सेंटर अलग अलग थे।

वो अपनी कॉलेज की सुनाने लगी और मैं अपने कॉलेज की।

उस अनजान सफर में हम एक दूसरे को बेहद करीब से जानने लग गए।

जब सफर ख़तम हुआ तो उसने कहा कि - हम जाते वक़्त भी साथ चलेंगे।

"जी जरूर " मैनें कहा।

पेपर देकर मैं रेलवे स्टेशन आ गया 4 घंटे के इंतजार के बाद मैं गांव के लिए निकल पड़ा।

पता नहीं वो कहां थी।

ये एक ऐसा सफर थे मेरे लिए जो मुझे न चाहकर भी याद रहेगा।


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