Kaushal Upreti

Abstract


2.1  

Kaushal Upreti

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विश्वास मुझे है इस धरती पर

विश्वास मुझे है इस धरती पर

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२)

विश्वास मुझे है इस धरती पर

एक नयी “सुबह” भी आयेगे

जब मिट जायेगे ये दूरी

कट जायेंगे जात-पात की बेडी

मानव रहेगा सिर्फ मानव

न कोई धर्म न कोई मजहब

हर आदमी के दिल में होगा एक सपना

प्यार करो सारी दुनिया से

हमें है मिलकर रहना

उस दिन बन जायेगी धरती

स्वर्ग से भी बढकर

नहीं दिखेगा कोई भूखा-नंगा

सब सोयेंगे स्नेह की छाँव

मानवता हर और कही

मडराएगी , हर्षाएगी,

हँसते मुस्काते चेहरे

बच्चो के हो जायेंगे

उस दिन सचमुच धरती माँ अपनी

स्वर्ग रूप हो जाएगी

 


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