STORYMIRROR

Kaushal Upreti

Abstract

2.1  

Kaushal Upreti

Abstract

भूख सरेआम बिकती है

भूख सरेआम बिकती है

1 min
27.8K


 

भूख

सरेआम बिकती है

चौराहों पर

सड़क के किनारे

मंदिरों के बाहर

मस्जिदों के

छोटे गलियारों पर

पेट कि भूख

विचारों कि भूख

अरमानो कि भूख

दरअसल

रोटी का अस्तित्व

ही तब-तक है

जब तक भूख है

 

 

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract