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Aanart Jha

Classics


4.1  

Aanart Jha

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वैदेही

वैदेही

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चलो भाई उठ जाए सुबह हो गई। सब उठ जाए ये शब्द थे वैदेही के, वैदेही की भी सुबह हो गई रोज की तरह, वैसे भी हमारे समाज में ज्यादातर घरों में सुबह कुछ यूहीं होती हैं और हा सबसे पहले घर की महिलाएं ही उठती हैं क्योंकि शायद सबसे ज्यादा जिम्मेदारी का बोझ उन्हें भी उठाना पड़ता है सबसे पहले उठो बच्चों की तैयारी करो साफ सफाई का ध्यान रखो पति के सुबह के नाश्ते का बंदोबस्त, दिन के खाने के लिए टिफिन यही सब तो होती है हमारे ज्यादातर परिवारों के दिनचर्या का हिस्सा, तो वैसा कुछ है विमला के जीवन में भी पर विमला खुश थी वह खुश थी अपने हंसी खुशी वाले परिवार को देखकर अपने बच्चों की मुस्कुराहट देखकर अपने पति की तरक्की देखकर और अपने मां-बाप की खुशी देखकर और वैसे भी वह मान चुकी थी यही तो जीवन है, सच भी यही है, यही तो जीवन है यह शब्द बहुत भारी है । हम में से ज्यादातर लोग जिंदगी उसी तरीके की जीते चले जाते हैं जैसी वह चलती चली जाती है उससे आगे देखने की कोशिश भी नहीं करते या कहें हम में से ज्यादातर लोगों को अपनी हदें मालूम है जिसको कि वह ना तो तोड़ना चाहते हैं और ना ही भूलना चाहते हैं पर वक्त बहुत अलग चीज है जीवन में हमेशा होता वही है जो आप नहीं करना चाहते हैं और ऐसा ही कुछ है इस कहानी का हिस्सा चलिए खैर विमला की जिंदगी में वापस से आते हैं।                    

वैदेही अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी बहुत लाड प्यार से पली बड़ी, और इतने प्यार से क्यों ना पली हो आखिर बड़ी मिन्नतों के बाद उसके मां-बाप को औलाद नसीब हुई थी बचपन में फूल सी नाजुक अपने पापा की बहुत चहेती, जैसे-जैसे वैदेही बढ़ी हुई वैसे ही उसका दाखिला उस शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल में करा दिया गया और वैदेही पढ़ने में बहुत ही होशियार थी हर बार अपनी कक्षा में पहला दूसरा ही रहती, वक्त कब आगे बढ़ जाता है पता ही नहीं चलता और ऐसा ही हुआ वैदेही ने हाई स्कूल अच्छे नंबरों से पास किया उसके बाद हायर सेकेंडरी अच्छे नंबरों से पास की, वैसे भी पढ़ने में होशियार थी उसने इंजीनियरिंग के लिए होने वाले एग्जाम में बहुत अच्छी रैंक प्राप्त की और उसकी रैंक के हिसाब से उसे देश के प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला मिला जिसके लिए उसको अपने घर अपने मां बाप,

अपने शहर को छोड़कर उस प्रतिष्ठित कॉलेज के लिए शहर से दूर जाना होता जो शायद वैदेही को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं था वह अपने मां बाप को छोड़कर नहीं जाना चाहती थी वह जानती थी उसके मां-बाप उसे कितना चाहते हैं और वह उनके बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकती अच्छी रैंक आई थी जिसके कारण वैदेही के पिता जी ने उससे कहा बेटा जाओ उस कॉलेज में एडमिशन ले लो, हमसे दूर रहोगे कोई बात नहीं लेकिन तरक्की तो करूंगी, पर पता नहीं वैदेही को संस्कार कुछ विरासत में मिले थे जिसको वह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहती थी।

उसने अपने कैरियर और परिवार दोनों में से किसी एक को चुना और वह था उसका परिवार उसके मां-बाप शायद यही था जो उसको विरासत में मिला था खैर वैदेही ने अपने शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला ले लिया और जैसे-जैसे वक्त का पहिया घूमता गया वैसे वैसे वैदेही का कॉलेज का सफर भी अपने आखिरी चरण पर आ गया वैदेही के मां-बाप को वैदेही की शादी की चिंता सताने लगी क्योंकि वैदेही पड़ लिख चुकी थी तो पति भी उसके बराबर पढ़ा लिखा अच्छी नौकरी वाला होना चाहिए वैदेही के लिए रिश्ते तो बहुत आते हैं पर वैदेही मना कर देती थी कि शहर से बाहर नहीं जाएगी वह शादी करेगी तो इसी शहर में ताकि वह अपने मां बाप के पास रह सके, वैसे भी उसे बहुत कुछ नहीं चाहिए था वह शुरू से संतोषी प्रवत्ति की थी उसने शुरू से पैसे और परिवार, कैरियर और परिवार में से हमेशा परिवार को ही चुना और एक दिन वैदेही के पिताजी श्री गिरधारी लाल जी के पास शादी का रिश्ता आया।

पंडित जी रिश्ता लेकर आए और बोले सेठ गोपाल चंद के बेटे ने भी कुछ ही दिनों पहले अपनी कॉलेज की पढ़ाई कंप्लीट की है और शायद सरकारी नौकरी का एग्जाम भी वो पास कर चुका है आज नहीं तो कल कुछ दिन में उसकी नौकरी लग ही जाएगी,

उन्होंने बताया सेठ गोपाल चंद का परिवार बिल्कुल आपके जैसा है संस्कारी और फिर आपकी बात भी रह जाएगी वैदेही की बात भी रह जाएगी शादी एक ही शहर में होगी जिससे वह आपसे पास ही रहेगी गिरधारी लाल ने कहा चलिए ठीक है हम वैदेही से एक बार पूछ ले आप लड़के की फोटो भेज दीजिए फिर हम आपको कल बताते हैं और फिर उन्होंने विमला से बात की फोटो दिखाई । अरे क्या ये तो अविनाश की फोटो थी वैदेही को यकीन नहीं हुआ क्योंकि अविनाश ही तो था जिसे वो मन ही मन ही नहीं चाहती थी  और ऐसा होता भी क्यो ना अविनाश था भी उसी के कॉलेज का सीनियर पढ़ने में होशियार जरूरत के वक्त हर किसी के लिए उपलब्ध रहता और उसके हाव-भाव से उसके परिवार के संस्कार दिखते थे क्योंकि विमला अविनाश को पहले से जानती थी इसलिए वह ना नहीं कर पाई।

अविनाश और उसके घर वालों ने भी शादी के लिए हां कर दी और फिर क्या था गिरधारी लाल जी ने पंडित जी के साथ बैठकर शादी का मुहूर्त निकलवा लिया और वैदेही और अविनाश की शादी हो गई और शादी के बाद आई विदाई की बेला जाने की बेला, वैदेही का घर छोड़ने का वक्त अपने मां बाप को छोड़कर जाने का वक्त,उसने उस दिन कैसे अपने कलेजे में पत्थर रखा था वह वही जानती थी कि उससे यह सहन करना मुश्किल है वह अपने मां-बाप को छोड़ दे ये आसान नहीं है फिर भी उसने अपने को बांधे रखा शायद अपने मां-बाप के लिए और फिर वह अपने घर चल दी अपने जीवन की नई शुरुआत करने और वह अविनाश के साथ बहुत खुश थी अविनाश जी उसे बहुत अच्छे से रखता था के साथ ससुर भी व्यवहार से अच्छे थे वैदेही को बहुत प्यार से रखते थे उसे महसूस नहीं होने देते थे कि वह अपनी ससुराल में है उसे घर जैसा प्यार मिलता था।

देखते देखते कब दिन गुजर गए पता ही नहीं चला अविनाश के साथ शादी के 6 साल हो गए दोनों बहुत खुशी जिंदगी जी रहे थे अपने दो सुंदर बच्चो के साथ वैदेही की जिंदगी बस सबकी जिंदगी से जुड़ चुकी थी बच्चो के स्कूल की तैयारी अविनाश के ऑफिस की तैयारी यही वैदेही का जीवन था। और अविनाश भी अच्छी नौकरी में था तो पैसों की भी कोई कमी ना थी सारी जरुरते वैसे भी पूरी हो रही थी वैसे भी किसी ने सच ही कहा है सुख की उम्र बहुत लंबी होती नहीं है या कहूं जीवन में सारी चीजों का बराबर होना जरूरी है अब यही कुछ हुआ वैदेही के साथ हंसी खुशी अपने परिवार के साथ रहने वाली मुस्कुराने के जीवन में भी ऐसा ही कुछ तूफान आने वाला था।

उस दिन शाम को वैदेही पूजा करने जा ही रही थी कि अचानक से मंदिर का दीपक हल्की सी हवा में बुझ गया विमला को एहसास हुआ और वह मन ही मन सोचने लगी भगवान जाने कौन सी अशुभ बात का सूचक है यह पूजा के दीपक का बुझना । पूजा करके वैदेही उठी घबराए हुए मन के साथ कि तभी अचानक अविनाश के ऑफिस से फोन आता है किस ऑफिस में आईबी की रेड पड़ी है और जिस विभाग में पड़ी है उसको अविनाश हो देखता है और जिन फाइलों में गड़बड़ी पाई गई है वह सभी अविनाश के द्वारा स्वीकृत की गई है अब जांच कमेटी मिठाई जाएगी और शायद यह कहा जा रहा है यह देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है यानी कि जिन डॉक्यूमेंट की जानकारी बाहर नहीं जाना चाहिए वह बाहर जा चुकी है और पुलिस की नज़र भी अविनाश पर ही है,अविनाश को पुलिस ने रिमांड में ले लिया है और हो सकता है उसे उसे जॉब से भी बर्खास्त कर दिया जाए अचानक से यह सुनकर वैदेही के पैरों तले जमीन सरक गई ऐसी क्या जरूरत थी अविनाश को कि ऐसा करना पड़ा फिर उसने अपने मन को समझाया ऐसा नहीं हो सकता जरूर अविनाश को फंसाया गया है।

पर जो भी हो एक अलग तरह की जीवन की शुरुआत हो चुकी थी और इस लड़ाई में वैदेही को अकेले ही लड़ना था और अचानक उसनो खुदको संभाला फिर तैयार होकर आईबी के ऑफिस के लिए निकल पड़ी है जैसे ही ऑफिस पहुंची उसने पुलिस से अविनाश के बारे में पूछ पर उसे जैसा जवाब मिला तो उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह किसी अपराधी की बीवी हो और इस्पेक्टर से बात करने के बाद उसको पता चला कि अविनाश को तीन दिन की रिमांड में रखा गया है आप चाहें तो उससे कुछ देर के लिए मिल सकते हैं,

वैदेही अविनाश के पास जाती है और अविनाश से बड़ी रूखी आंखों से पूछती है ऐसी क्या जरूरत थी कि ऐसा कुछ करना पड़ा आपको, अविनाश बोला, ऐसा कुछ भी नहीं है वैदेही सिर्फ इतना समझ लो, और तुम मुझे जानती हो तो तुम सच बताओ कि मैं ऐसा कर सकता हूं यह बड़े लोगों के कारनामे है जिसके मोहरे हम हैं, क्या हुआ कैसे हुआ मुझे कुछ नहीं पता अब सब तुम ही करना है पर मैं कैसे कर पाऊंगी शायद यह सब तो मेरे बस की बात ही नहीं है तभी अविनाश कहता है नहीं तुम भूलो नहीं जिस कॉलेज में हम पढ़े थे वहां कि तुम टॉपर थी तो तुम्हारे पास सारी खूबियां है जो तुम्हें इस लड़ाई के लिए मजबूत बनाती है अब कैसे करना है क्या करना है तुम्हें जाकर वकील से बात करना पड़ेगी मुझे ऐसी मेरी जरूरत पड़ेगी मैं उपलब्ध रहूंगा हां मगर एक बात याद रखना यह गेम बहुत खतरनाक है जिसका हम हिस्सा है तो सारे काम सावधानी के साथ करना, हर एक पर नजर रखना क्योंकि कई नजरें अब तुम्हारे ऊपर होंगी अब जाओ वकील दीपक वर्मा जी से मिल लेना क्या करना है वह तुम्हें समझा देंगे पीछे से आवाज आती है मैडम चलिए आप का टाइम हो गया विमला को ऐसा महसूस होता है जैसे वह किसी अपराधी से बात करके आई हो फिर से वह अपने को संभालती है अब यहां से वैदेही की दूसरी जिंदगी की शुरुआत होती है चंद लम्हों ने जिंदगी को पूरी तरह से बदल दी थी                    

वैदेही सीधे दीपक वर्मा एडवोकेट के पास पहुंचती है तो पता चलता है दीपक जी अभी किसी काम से बाहर गए हैं दो दिन बाद आएंगे वैदेही मन ही मन सोचती है कि तीन दिन की तो पुलिस रिमांड है और दो दिन तो ऐसे ही निकल जाएंगे तो फिर कैसे होगा मुझे कुछ और करना होगा आज जीवन में पहली बार वैदेही को एहसास हो रहा था उसने अपने कैरियर की तरफ ध्यान ना देकर बहुत बड़ी भूल की है चुकी अविनाश का सस्पेंशन उसके लिए एक पैसों की तंगी भी लाने वाला था आज नहीं तो कल क्योंकि केस बहुत लंबा चलना है और वैदेही थकने वालों में से नहीं है वह लड़ेगी आखरी सांस तक लड़ेंगे पर हां उसने एक और प्रण लिया है वह अपने जैसी सारी महिलाओं को जागृत करेगी की स्थिति कैसी भी हो हर कोई मेहनत करें आगे बढ़े अपने पैरों पर खड़ा हो चाहे वह फिर महिला ही क्यों ना परिवार की जिम्मेदारी जरूरी है और साथ ही साथ जरूरी यह भी है कि अगर आप सक्षम है अगर आप लायक हैं तो जरूर आगे बढ़े विमला की लड़ाई चालू है सामाजिक भी और आर्थिक भी एक बात और समझी थी वो कि वक़्त कब और कैसा करवट लेगा आप नहीं जान सकते हो।


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