Aanart Jha

Romance Classics Abstract


4.7  

Aanart Jha

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इश्क़ के धागे

इश्क़ के धागे

12 mins 166 12 mins 166


          सुबह का सूरज बस सर पर पहुंचने ही वाला था कि सिद्धांत की मम्मी ने सिद्धांत को जगा दिया अभी दोपहर के 12 बजने वाले थे जैसे ही सिद्धांत की आंख खुली उसने घड़ी की ओर देखा वह तुरंत बिस्तर से उठ कर बैठ गया हड़बड़ाते हुए बाथरूम की तरफ भागा और कुछ देर में वापस आकर छत की तरफ चल दिया छत पर सिद्धांत की नजरें किसी को ढूंढ रहे थीं बड़ी बेचैनी के साथ, उसकी नजरें कुमार साहब की खिड़कियों पर टिकी हुई थी वैसे ऐसा रोज नहीं होता था आज रविवार का दिन था इसलिए आज स्कूल की छुट्टी थी पर सिद्धांत कि नहीं थीं वह तो आज व्यस्त था बस स्कूल में नहीं अपने घर की छत पर उसकी नज़रें अभी भी किसी को ढूंढ रही थी, सिद्धांत की नजर कुमार साहब की खिड़कियों पर रुकी हुई थी अब करीब 45 मिनट से ज्यादा हो चुके थे पर कुछ भी नज़र नहीं आया , निराश होकर सिद्धांत लौटने ही वाला था कि अचानक कुमार साहब की खिड़की पर कुछ हलचल हुई देखा तो उस ओर एक जुल्फों की चादर ने दस्तक दी अपने बालों को लहराते हुए कुमार साहब की बेटी खिड़की पर आ चुकी थी फिर क्या सिद्धांत की नजरें वापस से उसी खिड़की पर टिक गई वैसे भी उन दिनों किसी को एक झलक देख लो तो आप तो एक अलग ही एहसास से तृप्त हो जाते थे और इसी तरह से तो प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता चला जाता था वैसे बता दूं यह वह दौर है जिस दौर में बॉलीवुड में अजय देवगन अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी जैसे स्टार की एंट्री हो चुकी थी अब हर तरफ दिलजले नजर आने लगे थे खैर अभी सिद्धांत दिलजला तो नहीं हुआ था पर उस ओर जरूर था । सिद्धांत की नजरें अभी भी अनन्या पर टिकी थी वैसे भी अनन्या खूबसूरत थी इतनी खूबसूरत कि उसकी तुलना फिल्मों की हीरोइन से की जाती थी पर अनन्या इस सबसे बेखबर थी वह अपने काम पर लगी हुई थी उसका ध्यान एक क्षण के लिए भी खिड़की से बाहर नहीं गया था धूप सर पर आ चुकी थी तो वह खिड़की की ओर गई खिड़की को बंद करने जैसे ही उसने खिड़की बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया उस पार उसे कुछ नजरें उसकी तरफ देखती हुई दिखी हां शायद पहली बार था जब अनन्या की नजरें भी सिद्धांत से टकराई थी एक अलग सा कुछ मीठा सा प्यार वाला एहसास अनन्या के भीतर भी आ चुका था जिसे आप प्यार का अंकुर कह सकते हो अनन्या ने खिड़की ना चाहते हुए भी खुली छोड़ दी कुछ देर छूप छूप कर सिद्धांत को देखने का उसका भी मन कर रहा था खैर इस उम्र का प्यार होता भी ऐसा ही है, हो ना हो ऐसी नज़रों का मिलना एक बैचेनी तो पैदा कर ही देता है अनन्या ने सिद्धांत की तरफ थोड़ी और नजरें बढ़ा ही थी कि पीछे से एक आवाज आई, अनन्या की मां की मां ने अनन्या को कुछ काम से अपने पास बुला लिया था और इसी बीच पापा के कहीं जाने का टाइम हो गया था तो काम में उसे वक्त का पता ही नहीं चला और इधर सिद्धांत की आंखें उस खिड़की की ओर टिकी हुई थी अभी भी इस इंतजार में थी कि बस फिर से एक बार दस्तक हो जाए तो वह चला जाए पर अनन्या तो अपने काम में व्यस्त थी और वैसे भी एक बार ही तो नजर मिली थी अनन्या की काम खत्म होने के बाद अनन्या को अचानक से ध्यान आया तो वह भी बेचैनी के साथ खिड़की की ओर गई पर अब उस खिड़की के उस ओर कोई ना था कुछ देर उसने इंतजार किया और कोई नहीं आया 

          खैर उसके बाद दोनों अपने काम पर लग गए सिद्धांत भी व्यस्त हो गया था, अब अनन्या जब भी उस ओर से गुजरती खिड़की की तरफ उसकी नजरें जरूर जाती और अब तो यह उसकी रुटीन का हिस्सा हो गया सिद्धांत कभी छत पर आता तो कभी अनन्या खिड़की से सिद्धांत को देखती यूं ही नजरों का मिलना लगातार दोनों तरफ से हो रहा था सिद्धांत बहुत अच्छे लड़कों में से एक था किसी भी तरह की कोई बुरी संगति नहीं पर सरकारी स्कूल में उसकी पढ़ाई होती थी और अनन्या की प्राइवेट गर्ल्स स्कूल में दोनों ही स्कूल के बच्चे थोड़े रिजर्व होते थे उस समय बॉयज स्कूल के बच्चों को गर्ल से मिलने नहीं मिलता था और गर्ल्स स्कूल की बच्चियों को लड़कों से मिलने नहीं मिलता था तो दोनों का ही नेचर थोड़ा सा रिजर्व था क्योंकि उस वक्त लड़के और लड़कियों का आपस में बात करना इतना आसान नहीं था और कहीं अगर आपने हिम्मत कर कर कर भी ली और कहीं बात बिगड़ गई तो लेने के देने पड़ ना निश्चित है पूरे मोहल्ले में बदनामी परिवार में बदनामी स्कूल और कॉलेज में बदनामी तो उन दिनों लोगों के प्यार के किस्से को असल प्यार में बदलने में बहुत वक्त लग जाता था क्योंकि ना तो उस समय कुछ ऐसे साधन होते थे कि आपने किसी को फोन लगा लिया और बात हो गई या फिर आपने व्हाट्सएप पर बात कर ली मैसेज भेज दिया ऐसा कुछ नहीं था उस समय, उस समय किसी से मिलने के लिए आपको सही जगह सही वक्त सही मुहूर्त और सामने वाले की फीलिंग का सही सही अनुमान होना चाहिए जब तक सामने वाले की फीलिंग का सही सही अनुमान नहीं होगा तब तक बात बिगड़ने के आसार रहते है तो ऐसा ही कुछ अनन्या और सिद्धांत के साथ भी था खिड़की के इस पार से उस पार झांकते नजरों के मिलते मिलते हैं करीब दो-तीन महीने का वक्त हो गया पर दोनों के मिलने का कोई मुहूर्त ही नहीं बना अभी तक। पर शायद कुछ तो ऐसा होने वाला था जो इस प्यार को आगे ले जाता मोहल्ले के मिश्रा जी के घर में शादी का एक फंक्शन था जिसमें दोनों परिवार अनन्या के और सिद्धांत के शामिल थे सिद्धांत वैसे तो किसी पार्टी में जाता नहीं है पर उसे पता था कि यह मोहल्ले की शादी है अनन्या जरूर आएगी तो सिद्धांत भी अच्छे से तैयार होकर शादी में शामिल हो गया वो शादी में तो था पर उसकी नज़रें अनन्या को ही ढूंढ रही थी अचानक से अनन्या का परिवार उसकी नजरों के सामने था पर अनन्या कहीं नहीं दिख रही थी सिद्धांत के चेहरे से उसकी बेचैनी देखी जा सकती थी उसका पार्टी में मन बिल्कुल नहीं लग रहा था पर फिर भी अब घर वालों को छोड़कर वह जा नहीं सकता था खैर वह अपने परिवार के साथ डिनर करने चल दिया मम्मी पापा सबने में प्लेट उठा ली सिद्धांत भी अपनी प्लेट उठाकर पकवानों को थाली में सजा रहा था पर खाने की जगह कुछ भीड़ थोड़ी ज्यादा थी तो भीड़ से बचने के लिए उसने बाहर निकलने के लिए वापस मुड़ा अपनी प्लेट को ऊपर उठाकर अचानक से किसी की प्लेट से टकराया उसे गुस्सा आया की प्लेट का कुछ सामान उसके नए कपड़ों के ना लग गया हो गुस्से से वह पलटा और जैसे ही पलटा उसका गुस्सा पूरी तरह से शांत हो गया पीछे अनन्या थी वह दोनों पहली बार इतनी पास थे एक टक एक दूसरे को देख रहे थे कि धीरे से अनन्या ने सॉरी बोला सिद्धांत ने भी रिप्लाई में कोई बात नहीं कहा, उस वक्त दोनों एक अलग दुनिया में थे मिले भी और बात भी नहीं कर सकते क्योंकि घर वाले आसपास थे अजीब सी बेचैनी ने दोनों को जकड़ लिया खैर अनन्या अपने रास्ते चल पड़ी सिद्धांत अभी भी वहीं खड़ा था पीछे से मां ने आवाज लगाई तो सिद्धांत भी वहां से चल दिया खैर उस पूरी भीड़ में सिद्धांत की नजरें अनन्या को और अनन्या की नजरें सिद्धांत को ढूंढ रही थी इसी बीच दूल्हा दुल्हन के जयमाला का वक्त होने वाला था सारे के सारे लोगों का ध्यान अब सिर्फ स्टेज पर था पर सिद्धांत का तो कहीं और ही था अनन्या का भी मन नहीं लग रहा था भीड़ से थोड़ा दूर आ गई थी सिद्धांत भी धीरे से भीड़ से अलग अनन्या के पास आकर खड़ा हो गया उसके लिए यह सपने के सच जैसा होना था दोनों आसपास तो खड़े थे पर फिर भी समझ नहीं आ रहा था क्या बात करें धीरे से सिद्धांत ने बात को आगे बढ़ाया अनन्या से बोला आपको वरमाला नहीं देखना है क्या अनन्या ने भी धीरे से जवाब दिया भीड़ बहुत है और भीड़ में अच्छा नहीं लगता इसलिए मैं पीछे आकर खड़ी हो गई इतनी बात ने ही माहौल को थोड़ा नॉर्मल कर दिया अनन्या ने सिद्धांत से कहा आपको जयमाला नहीं देखना है क्या सिद्धांत ने जवाब दिया नहीं मेरा इन सब में मन नहीं लगता सिद्धांत ने पूरी हिम्मत जुटा कर अनन्या से पूछ ही लिया वैसे आपका नाम क्या है अनन्या ने भी धीरे से अपना नाम बताया और सिद्धांत से उसका नाम पूछा फिर अनन्या ने कहा आप भी यही रहते हैं क्या सिद्धांत ने भी फट से जवाब दिया हां आपके घर की खिड़की मेरे घर की ओर ही तो खुलती है देखिए कैसे इत्तेफाक होते हैं आपका घर और मेरा घर इतनी पास है तो भी हमारी आज पहली बार बात हो पा रही है वैसे आप किस क्लास में है अनन्या ने जवाब दिया इस साल 10th का एग्जाम दे दिया है रिजल्ट आना बाकी है तो आप कह सकते हो की 11th में हैं क्योंकि पास तो मैं हो जाऊंगी और आप किस क्लास में है सिद्धांत ने जवाब दिया आप जिस में जाएंगे उस क्लास से मैं बाहर हो जाऊंगा यानी कि 12th इतनी बात हो ही रही थी कि पीछे से आवाज आई बेटा चलें अब तो जयमाला भी हो गई यह आवाज थी अनन्या की मम्मी की दोनों ने एक दूसरे को बाय बोला और अपने अपने घर की ओर चल दिए बस यह वह वक्त था कि प्यार के अंकुर पर आज कोपले निकल आई थी खैर इसके बाद एक सिलसिला चालू हो गया अब जब सिद्धांत और अनन्या खिड़की के इस पार और उस पर से टकराते तो दोनों के बीच में इशारों इशारों में कुछ बात होती पहले बातें एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने तक रहती फिर इशारे कुछ बढ़ने लगे अब दोनों बेचैन थे दोनों ही एक दूसरे को दिल की बात नहीं बता पा रहे थे अनन्या सोचती थे सिद्धांत कुछ कहे तो मैं जवाब दूं और सिद्धांत को डर लगता था की अनन्या से कुछ कहा क्या पता वह क्या जवाब दें इसलिए वह कुछ नहीं कह पाया था पर कहते हैं ना किस्मत को जब आपसे किसी को किसी से मिलाना हो तो सारी कायनात उसको मिलाने पर जुट जाती है और ऐसा ही कुछ हुआ सिद्धांत के पापा और अनन्या के पापा दोनों मॉर्निंग वॉक में अक्सर मिलने लगे और मिलते मिलते इतनी घनिष्ठता हो गई कि सिद्धांत के पापा ने अनन्या के पापा को फैमिली के साथ सिद्धांत की छोटी बहन के बर्थडे में बुला लिया पर यह बात सिद्धांत को पता नहीं थी सिद्धांत तो यूं ही तैयारी में लगा हुआ था पर जैसे ही उसने अनन्या के पापा को देखा तो एकदम चौक गया पर फिर पूरी फैमिली को जब देखा तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा क्योंकि अनन्या आज उसके घर आई हुई थी यह वैसा वाला प्यार था जो उन दो दिलों को छोड़कर किसी और को महसूस भी नहीं हो सकता था और वैसे भी उन दिनों इतना खुलापन नहीं होता था कि आप अपने प्यार को जग जाहिर कर दो ,तो ऐसा ही कुछ था इन लोगों के बीच में दोनों फैमिली आपस में एक दूसरे से मिल रही थी अनन्या के पापा ने सिद्धांत के पापा को अपनी पूरी फैमिली से मिलवाया दोनों परिवार आपस में बड़े घुले मिले से लग रहे थे वही आपस में बातें होती रहें सिद्धांत के पापा ने सिद्धांत से कहा बेटा जाओ अनन्या को अपनी बहन से मिला दो सिद्धांत ने धीरे से जवाब हां में दिया और अनन्या से कहा आइए अनन्या ने भी मुस्कुराहट के साथ हां में जवाब दिया और सिद्धांत के साथ चल दी सिद्धांत ने अपनी बहन से अनन्या को मिलवाया अनन्या ने भी बहन को विस किया पर उसकी बहन के पास ज्यादा वक्त था नहीं उसके और भी दोस्त लोग आए हुए थे तो उनसे मिलने में व्यस्त हो गई, उसने सिद्धांत और अनन्या से थोड़ा सा वक्त मांगा और अपने दोस्तों के पास चल दी अब सब आपस में व्यस्त थे अनन्या के पापा सिद्धांत के पापा से बात कर रहे थे अनन्या की मम्मी सिद्धांत की मम्मी से बात कर रही थी और सिद्धांत की बहन भी अपने दोस्तों के साथ व्यस्त थी तो किस्मत ने पूरी शिद्दत के साथ इन दोनों को आपस में बात करने का मौका दिया था तो सिद्धांत ने भी इस मौके को जाया नहीं जाने दिया बात करते-करते सिद्धांत ने अनन्या को धीरे से कहा यहां शोर ज्यादा है चले बाहर चल के बातें करते हैं अनन्या ने भी धीरे से हा कहा और दोनों घर से बाहर आ गए अब दोनों अकेले थे फिर भी बेचैन थे एक शब्द भी दोनों की जुबान से नहीं निकल रहे थे यहां वहां की बातों के साथ बात आगे बढ़ती इससे पहले ही सिद्धांत की बहन बाहर आकर दोनों से बोली अरे अंदर चलो बातें तो बाद में भी हो जाएंगे मम्मी पापा खाने के लिए बुला रहे हैं जल्दी चलो और दोनों चल दिए आज भी कुछ बातें अधूरी रह गई किसी ने किसी को फिर से एक बार दिल की बात नहीं बताई दोनों की फैमिली ने खाना साथ में खाया और घर को चल दिया सिद्धांत का भी मन तो लग नहीं रहा था उसने भी पापा को धीरे से कहा पापा मैं इन लोगों को बाहर तक छोड़ कर आ जाता हूं, क्योंकि वह थोड़ी देर और देर अनन्या को देखना चाहता था आज अनन्या लग भी बहुत खूबसूरत रही थी सिद्धांत की नजरें उससे हट ही नहीं रही थी ऐसा ही हाल अनन्या के साथ भी था दोनों ही बेचैन थे अनन्या के पापा ने सिद्धांत से बोला बेटा अब आप भी वापस जाओ रात बहुत हो गई है हम चले जाएंगे सिद्धांत ने भी हां में सिर हिलाया और घर की ओर चल दिया दोनों अपने घर पहुंच चुके थे पर इतनी पास आकर भी अपने जज्बातों को एक दूसरे को नहीं पता पाने की टीस उन्हें बेचैन कर रही थी रात ज्यादा हो गई थी दोनों अपने बिस्तर में जा चुके थे पर नींद ना तो अनन्या को आ रही थी और ना ही सिद्धांत को और दोनों यही सोच रहे थे आज अगर कुछ बात हो जाती तो बात ही कुछ और होती सिद्धांत सोच रहा था अब मौका मिलेगा तो अपने दिल की बात अनन्या को बता कर ही रहूंगा फिर देखा जाएगा जो होगा और अन्य सोच रही थी न जाने कब दिल की बात हम आपस में एक दूसरे से शेयर कर पाएंगे दोनों बिस्तर में पड़े पड़े कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।

अनन्या और सिद्धांत पार्टी के बाद इतनी गहरी नींद में सो चुके थे कि उन्हें वक्त का ध्यान ही नहीं रहा सुबह के 10:00 बज गए वैसे भी आज सन्डे का दिन था तो किसी ने उठाया भी नहीं पर सिद्धांत की नींद जैसे ही खुली तो वो अपना सन्डे वाला काम नहीं भुला फटाफट तैयार होकर छत पर पहुंच गया और अनन्या के खिड़की में आने का इंतज़ार करने लगा और अनन्या भी कुछ देर बाद खिड़की पे आ गई ये मंज़र तो हर सन्डे का था पर आज माहौल कुछ अलग सा था कल की मुलाकात ने दोनों को और पास ला दिया था नज़रों में एक अलग सा अहसास था अब आखे मिल नहीं रही थी बल्कि आज तो आंखे आपस में बातें कर रही थी दिल की धड़कनों की धमक दोनों दिलो में एक सी थी और आज तो मौसम भी महरबान सा है ठंडी हवाएं चल रही है हवाओं में एक अजीब सी खुश्बू बिखर रही है इशारों से कुछ बातें हुईं इशारों में ही सिद्धांत ने अनन्या को काफ़ी के लिए कहा अनन्या भी ना नहीं कर पाई। वक़्त आज शाम 6 बजे का तय हुआ दोनों के बीच में एक शब्द भी नहीं निकला सारी बाते इशारों में हो गईं ,फिर दोनों ने कैसे 6 बजे तक वक़्त काटा वो वहीं जानते हैं सिद्धांत तैयार होकर काफ़ी हाउस पहुंच गया 6 बजने ही वाले थे कि अनन्या ने भी दस्तक दी आज वो सुर्ख गुलाबी रंग का सलवार सूट , आंखों में काजल और लंबे लटकन वाले झुमके में किसी परी से कम नहीं लग रही थी सिद्धांत की नज़रे अनन्या पर जाकर रुक गई जैसे ही अनन्या उसकी टेबल तक पहुंची सिद्धांत की सांसे तेज चलने लगी अनन्या सिद्धांत से बोली" कैसे हो , बैठने के लिए भी नहीं बोलोगे " सिद्धांत हकलाते हुए बोला ना ना ब ब बैठो असल में तुम आऊंगी मुझे यकीन नहीं था अब जब तुम आ गई हो तो भी मुझे यकीन नहीं हो रहा है इसीलिए शायद मेरा बस मुझ पर नहीं है  अनन्या हंसते हुए बोली क्यों ऐसा क्यों सोचा कि मैं नहीं आऊंगी कुछ नहीं बस यूं ही सिद्धांत ने कहा। फिर धीरे से पूछा बताओ क्या लोगी पहले आर्डर कर देते हैं मीनू कार्ड हाथ लेते हुए अनन्या ने कहा मैं कटलेट खाऊंगी और तुम क्या खाओगे सिद्धांत कुछ बोलता उससे पहले ही अनन्या ने बोला तुम क्या खाओगे तुम भी कटलेट खाओ दोनों ने कटलेट का ऑर्डर दे दिया दोनों सामने बैठे हुए थे पर फिर भी समझ में आ नहीं रहा था कि क्या बात करें इन तेज धड़कनों के बीच में कोई कुछ बात करने के लिए तैयार ही नहीं था यहां और वहां की बातें चलती रही यूं ही बात करते-करते कटलेट आ चुका था दोनों खाने लगे मगर धीरे धीरे ताकि वक्त थोड़ा ज्यादा मिल सके उन दोनों इतना खुलापन नहीं होता था कि आप जिस को पसंद करते हो आसानी से आई लव यू बोल दो किसी से प्यार करना एक ना टूटने वाले वादे जैसा होता था भविष्य के बारे में बहुत सारी चीजें होती थी जिनके बारे में सोचना होता था खैर दोनों ने कटलेट खाया यहां वहां की बातें की वहां से उठ कर चल दिए, सिद्धांत और अनन्या कॉफी हाउस से बाहर अपनी गाड़ी तक पहुंचने वाले थे कि सिद्धांत अनन्या के साथ उसकी गाड़ी तक पहुंच गया अनन्या को छोड़ने से पहले उसने सिर्फ इतना कहा अनन्या थैंक्स यहां आने के लिए अनन्या ने भी कुछ जवाब नहीं दिया मुस्कुराया और चल दी अनन्या मन ही मन सोच रही थी कैसा लड़का है मुझे कॉफी हाउस में बुलाया इतनी देर मेरे साथ बैठा भी रोज मेरे को छत से देखता भी है फिर भी इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाया कि अपने दिल की बात मुझे बता दें खैर वही बताएं तब तो बात है क्योंकि इतनी हिम्मत तो होना ही चाहिए अगर आप किसी से प्यार करने जा रहे हो, खैर चलो देखते हैं आगे आगे होता है क्या। ऐसा ही कुछ हाल सिद्धांत के साथ भी था वह मन ही मन अपने को कोस रहा था कह रहा था तू कैसा है तेरे सामने तेरी चाहत बैठी हुई थी मुस्कुरा रही थी लोगों से छुपते छुपाते आई थी तो भी दिल की बात उसको बता ही नहीं पाया अब नहीं बताएगा तो कब बताएगा और अगर वह आई है तो सीधी सी बात है कुछ तो उसके दिल में है ना कोई बात नहीं अगली बार ऐसा मौका नहीं जाने देंगे आज दोनों घर तो पहुंच गए थे पर रात को दोनों को ही नींद नहीं आ रही थी एक अजीब दुनिया में थे आंखें खोले हुए सपने देख रहे थे अपने मिलन के फिर तो यूं ही मिलने मिलाने का सिलसिला चालू हो गया दोनों ही एक दूसरे की चाहत को समझ रहे थे अभी तक दोनों में से किसी ने अपने प्यार का इजहार नहीं किया था और फिर आज वो दिन आया आज अनन्या का बर्थडे था अनन्या और सिद्धांत के परिवार वाले आपस में काफी घुल मिल चुके थे तो अनन्या के बर्थडे में अनन्या के घर में एक छोटी सी पार्टी रखी गई थी जिसमें सिद्धांत की फैमिली को भी जाना था अनन्या आज 17 साल की हो गई थी सिद्धांत भी आज बहुत खुश था वह अपने सबसे अच्छे ब्लैक कलर के सूट के साथ तैयार होकर अनन्या की पार्टी में चल पड़ा जैसे ही अनन्या के घर के अंदर पहुंचा वैसे ही उसकी आंखें 1:00 तक अनन्या को निहारती रह गई आज अनन्या रेड कलर की फ्रॉक में किसी परी से कम नहीं लग रही थी अनन्या ने भी जैसे ही सिद्धांत की तरफ देखा वह भी उसे एकटक देखती रह गए सिद्धांत भी अपना ब्लैक सूट में किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था केक काटने का वक्त हो गया था सभी लोग पास आ गए सिद्धांत और अनन्या एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे और ना जाने क्यों दोनों के दिल की धड़कनों की गति थोड़ी तेज थोड़ी धीमी हो रही थी लगातार केक कट गया सब खाने पीने में लग गए अनन्या धीरे से सिद्धांत के पास आई सिद्धांत की फैमिली से मिली आने के लिए धन्यवाद बोला और सिद्धांत से बोली चलो मैं तुम्हें अपना घर दिखाती हूं सिद्धांत भी हां मैं बोला और दोनों साथ चल रही है सिद्धांत को लेकर अनन्या अपना घर दिखाने चल पड़ी घर देखते देखते आखिर में दोनों छत पर पहुंच गए आसमान बहुत साफ था उस दिन सारे सितारे जगमगाते हुए दिख रहे थे अनन्या ने सिद्धांत से कहा वह देखो तुम्हारा घर दिख रहा है नाना तुम्हारे घर की वह खिड़की दिख रही है जिससे तुम मुझे देखते रहते थे यह सुनते ही सिद्धांत थोड़ा घबरा गया चारों तरफ अंधेरा था धीरे से अनन्या ने सिद्धांत का हाथ अपने हाथ में लिया और बोली सिद्धांत आसमान कितना साफ है ना सारे सितारे देखो जगमग आ रहे हैं हवाएं भी कितनी है गुलाबी गुलाबी सी बह रही है तुम्हें नहीं लगता यह कुछ समझाने की कोशिश कर रही है धीरे से सिद्धांत की ओर देखा और पूछा क्या हुआ सिद्धांत धीरे से बोला नहीं कुछ नहीं नहीं कुछ तो है किस बात का डर है तुमको जो बात तुम्हारे दिल में है वह जुबान पर क्यों नहीं आ पा रही अनन्या बोली धीरे से सिद्धांत बोला पता नहीं डर सा लगता है अनन्या ने दूसरा हाथ भी सिद्धांत का हाथ में लिया और सिद्धांत की आंखों में आंखें मिलाते हुए बोली मेरी तरफ देखो अभी भी डर लग रहा है क्या सिद्धांत ने देखा और बोला नहीं बातों बातों में दोनों इतना पास आ चुके थे कि एक दूसरे की सांसो को महसूस कर सकते थे सिद्धांत ने धीरे से पीछे होते हुए घुटनों के बल बैठकर अनन्या के हाथ को हाथों में लिया और अपने दिल की बात जुबान पर लाही दी धीरे से बोला अनन्या आई लव यू सो मच दोनों एक दूसरे की बाहों में समा चुके थे दोनों की तमन्नाओं ने नए पंख लगा लिए थे पर वक्त की सोनिया लगातार टिक टिक कर रही थी अनन्या ने अपने को संभालते हुए कहां चले मुझे सब इंतजार कर रहे होंगे सिद्धांत भी बोला मन तो नहीं कर रहा है यहां से जाने का पर मजबूरी चलना ही पड़ेगा चलो चलते हैं और दोनों चल पड़े। पर दोनों के प्यार की शुरुआत हो चुकी थी 


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