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Kumar Vikrant

Comedy Drama


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Kumar Vikrant

Comedy Drama


ताड़का की जंग

ताड़का की जंग

8 mins 349 8 mins 349

प्रस्तावना

रामगढ़ और भवानी के बीहड़ के चारो और से गुजरने वाली ५० फ़ीट चौड़ी और सैकड़ो फ़ीट गहरी अंधी खाई आज रामगढ़ के लिए अभिशाप बन चुकी थी। तीन महीने पहले ठाकुर की रिक्वेस्ट पर जब सी आई डी की टीम भवानी के बीहड़ में छिपे गब्बर सिंह को पकड़ने आई तो ठाकुर ने ए सी पी प्रधुमन को कहा था, "ए सी पी साब आपके पास आदमी भी है और हथियार भी......आओ चलकर गब्बर सिंह और उसके गिरोह को भून डालते है।"

तब ए सी पी प्रधुमन ने जवाब दिया था, "ठाकुर साब हम सी आई डी के लोग हर मामला बिना हिंसा और हथियार के सुलझाने की महारथ रखते है। बल का प्रयोग तो हम बहुत मजबूरी में करते है।"

"ए सी पी साब गब्बर ताकत की भाषा ही जानता है; वह बहुत धूर्त है, आप जो भी चाल चलोगे वो उसका भयानक जवाब देगा।" ठाकुर ने ए सी पी प्रधुमन को कहा था।

"ठाकुर साब हमे कुछ दिन अपनी मर्जी से काम करने दीजिए; यदि कामयाब न हुए तो जैसा आप कहोगे वैसा कर लेंगे।" उस दिन ए सी पी प्रधुमन ने थोड़ा चिढ़कर कहा था।

उसी दिन ए सी पी प्रधुमन ने इंस्पैक्टर दया को भेज कर भवानी के बीहड़ को नखलिस्तान से जोड़ने वाला पुल डायनामाइट से उड़वा दिया था। ऐसा करने से उसने गब्बर को रसद और गोला बारूद मिलने का हर रास्ता ब्नद कर दिया था, उसे उम्मीद थी कि रसद और गोला बारूद न मिलने से गब्बर लाचार होकर या तो उनपर हमला करेगा या आत्मसमर्पण कर देगा; वो दोनों ही स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार थे।

इसके बाद गब्बर सिंह ने भी ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए रामगढ़ को नखलिस्तान से जोड़ने वाला पुल रामगढ़ में रहने वाले उसके ही किसी भेदिये से उड़वा दिया था। रामगढ़ को नखलिस्तान से जोड़ने वाला पुल के टूट जाने से सी आई डी की टीम को जबरदस्त झटका लगा क्योकि अब उनके पास भी रसद और गोला बारूद लाने का कोई रास्ता न बचा था।

जब दोनों और से हिंसक कार्यवाही शुरू हो गई तो ठाकुर के कहने पर सी आई डी टीम ने अपना तंबू रामगढ़ से पाँच किमी दूर ताड़का मैदान में गाड़ लिया ताकि गब्बर से हो रही जंग में गाँव वाले सलामत रहे।

अब सी आई डी खेमा रामगढ़ में रहकर गब्बर खेमे के आक्रमण या आत्मसमर्पण का इंतजार कर रहे थे और गब्बर खेमे को इंतजार था कि वो कब तक इंतजार करेंगे; एक दिन तो उन्हें यहाँ से जाना ही पड़ेगा।

सी आई डी खेमा

घेराबंदी के तीन नाकामयाब महीनों को याद करते हुए सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत थोड़ा गुस्से में बोला, "सर तीन महीने हो गए इस बीहड़ में पड़े हुए; रामगढ़ के जितने भी दो पैर और चार पैर वाले जानवर थे वो तो हम लोग हजम कर चुके है अब राशन डिपो पर मिलने वाला चावल और आलू की सब्जी खा कर कब तक गुजारा होगा?"

"बस इतने में ही परेशान हो गए.......अभी तो ये घेराबंदी और लंबी चल सकती है।" ए सी पी प्रधुमन अपने खेमे के सामने चारपाइयाँ बिछाकर सोये सिपाहियों की तरफ देख कर बोला।

"सर तीन महीने हो गए इन बीहड़ों में पड़े हुए, बाल और दाढ़ी बढ़कर जटा बन चुके है, आप तो भयंकर साधु लग रहे हो; अब सरकार को संदेश भेज दो कि गब्बर मिशन फेल हो चुका है........" इंस्पैक्टर दया तेज स्वर में बोला।

"बकवास बंद, हमारी योजना कामयाब हो रही आज रात हम गब्बर के अड्डे पर हमला करेंगे और गब्बर को जिन्दा या मुर्दा पकड़ लेंगे।" ए सी पी प्रधुमन गुर्रा कर बोला।

"मै भी साथ चलूँगा और गब्बर को लात मरूँगा......हम अठन्नी बाई के अड्डे की तरफ से गब्बर के अड्डे पर हमला करेंगे।" ठाकुर खुश होकर बोला।


गब्बर सिंह खेमा 

"क्यों बे कालिया कितने आदमी है वहाँ सी आई डी खेमे में?" गब्बर गुर्रा कर बोला।

"सरदार तीन अफसर और सत्रह सिपाही, कुल बीस आदमी है......" कालिया ने गब्बर के हाथ में भरी रिवॉल्वर देख कर कहा।

"ये तो बहुत नाइंसाफी है वो २० और हम सिर्फ १९......." गब्बर थोड़ा चिंतित स्वर में बोला।

"सरकार हमारा एक आदमी उनके दो आदमियों के बराबर है......" सांभा ने जानकारी दी।

"फिर ठीक है आज की रात उनके लिए मौत की रात बना दो.......आज रात हम उनके खेमे पर छमिया के अड्डे वाले रास्ते से हमला करेंगे।" गब्बर गुर्रा कर बोला।


उजड़े खेमे 

रात के १० बजे ही सी आई डी के लोग गब्बर सिंह के अड्डे में जा घुसे और गब्बर सिंह और उसके आदमी सी आई डी खेमे में जा घुसे। दोनों दल एक ही समय में अलग-अलग रास्तो से एक दूसरे के अड्डों में आ घुसे थे और दोनों अड्डों को खाली पाकर दोनों दल सुलग उठे थे। उन्होंने गुस्से में आकर एक दूसरे के अड्डों में आग लगा दी। आग में उन अड्डों में रखी खाद्य रसद तो जल ही गई लेकिन जमीन खोद कर कर छिपा कर रखे गए हथियारो और गोला बारूद भी धमाकों के साथ आग में स्वाहा हो गए।

दोनों दलों ने एक घंटे तक एक दूसरे के अड्डों पर तांडव मचाया और उसके बाद एक दूसरे को गाली देते हुए फिर से विपरीत रास्तो से अपने-अपने उजड़े अड्डों की तरफ चले गए।


सी आई डी खेमा

"अबे ये क्या हो गया? हम लुट गए बर्बाद हो गए हमारा सरकारी असलाह और गोला बारूद जला दिया........अब हम लोगो की नौकरिया तो अब गई।" इंस्पैक्टर दया दहाड़े मार कर रोता हुआ बोला।

"बकवास बंद कर दया........." ए सी पी प्रधुमन गुर्रा कर अपने राख हुए खेमे की और देखते हुए बोला।

"सर आप कैसे इंसान हो? देखिये तो सही उन्होंने हमारा राशन डिपो वाला चावल और आलू भी जला दिए......अब हम क्या खाकर जिन्दा रहेंगे? सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत अपने भूखे पेट पर हाथ मलते हुए बोला।

"चुप हो जा अभिजीत........देख आग में कुछ आलू भुन गए होंगे उन्हें ही खा ले, कल मै राशन डिपो से और चावल मंगा लूँगा और मंडी से एक कुंतल आलू भी मंगा लूँगा।" ए सी पी प्रधुमन अपने बाल नोचते हुए बोला।

"किन भुक्खड़ों को बुला लिया मैंने गब्बर को पकड़ने, अच्छा होता मै जय और बीरु जैसे बदमाशों को ही बुला लेता....बहुत भूल हो गई मुझसे।" ठाकुर अपना सिर सी आई डी खेमे के जले हुए तंबू के बंबू में मारते हुए बोला।

"ठाकुर साब ताना मारना छोड़ो और कल का इंतजार करो कल हम गब्बर के अड्डे पर हमला कर उससे भिड़ेंगे और उसका अंत करेंगे......छोकरो कल की जंग के लिए तैयार हो जाओ।" ए सी पी प्रधुमन जोश में बोला।

"हथियारों का क्या करे......वो तो जल कर स्वाह हो गए।" इंस्पैक्टर दया चिंतित स्वर में बोला।

"पगले अगर हमारे पास हथियार नहीं है तो गब्बर खेमे के पास भी गोला बारूद और हथियार नहीं है......रात में न उसके पास हथियार आ सकते और न हमारे पास अब ये सिर्फ ताकत की जंग है......लाठी डंडा जो मिले उठा लो हम कल सुबह १० बजे नाश्ता करके जंग पर निकलेंगे।" ए सी पी प्रधुमन जोश हुंकार भरकर बोला।


गब्बर सिंह खेमा

"क्यों बे हरिया क्या खबर लाया है गाँव से?" गब्बर सिंह आग में स्वाह हुए आलूओ में से कुछ भुने आलू निकाल कर खाते हुए बोला।

"सरदार कल सुबह सी आई डी के लोग नाश्ते के बाद तुम्हारे अड्डे पर हमला करेंगे।" खबरी हरिया इनाम की उम्मीद में गब्बर सिंह की तरफ देखते हुए बोला।

"रस्सी जल गई पर बल नहीं गया......गब्बर पे हमला करेंगे वो भी १० बजे नाश्ता करके, सांभा तू कल ८ बजे ही नाश्ता तैयार करा लेना हम उनके ऊपर उनके नाश्ते के समय टूट पड़ेंगे......हरिया ले तू आज भुना आलू खा यही इनाम है तेरा।" गब्बर हरिया की तरफ एक आलू फेंकते हुए बोला।

हरिया के जाने के बाद सांभा चिंतित स्वर में बोला, "सरदार असलाह, गोला और बारूद सब जल गया......जंग कैसे जीतेंगे हम?"

"अबे न असलाह, गोला और बारूद उनके पास और न हमारे पास......लाठी डंडे उठा लो उनसे ही हम ये जंग जीतेंगे।" गब्बर भुना आलू अपने मुँह में रखते हुए बोला।


ताड़का की जंग

अगले दिन सुबह जिस समय सी आई डी खेमा नाश्ते में मशगूल था उसी समय गब्बर सिंह और उसके गिरोह ने हमला कर दिया। हमला अचानक हुआ था इसलिए सी आई डी खेमा थोड़ा लड़खड़ाया लेकिन उसके बाद वो भी लाठी डंडे लेकर गब्बर के गिरोह पर टूट पड़े।

पूरे एक घंटे लट्ठ युद्ध हुआ, खूब लाठियां भांजी गई, एक घंटे बाद दोनों खेमो की लाठियां टूटने लगी। लाठियां टूटने के बाद आपस में मुक्का युद्ध छिड़ गया।

दोनों तरफ से जबरदस्त मुक्के बरसाए गए लेकिन दोनों और के योद्धा मजबूत होने के कारण न कोई हारा न जीता लेकिन एक घंटे के मुक्का युद्ध के बाद दोनों तरफ के योद्धा जमीन पर लेट गए और एक दूसरे पर लेटे-लेटे लातें बरसाने लगे।

जब लात युद्ध शुरू हुआ तो ठाकुर भी युद्ध में कूद पड़ा और गब्बर को खूब लाते मारी और गब्बर की अनगिनत लातें खाई । एक घंटे के लात युद्ध के बाद दोनों तरफ के योद्धा पंद्रह मिनट तक जीभ निकाल कर हाँफते हुए लेटे रहे और फिर उठ बैठे उठते ही उन्होंने अपने हाथ से अपने जूते निकाल लिए और जूता युद्ध शुरू हो गया।

ए सी पी प्रधुमन ने थके-थके ही गब्बर सिंह को दस जूते मारे जवाब में गब्बर सिंह ने ए सी पी प्रधुमन को २० जूते मारे। इंस्पैक्टर दया जूता लेकर सांभा से भिड़ा हुआ था दोनों ने एक दूसरे को जूते मार-मार कर बेहाल कर दिया था।

इसी तरह सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत ने जूता लेकर कालिया पर कब्जा पाना चाहा लेकिन अब दोनों एक दूसरे पर जूते बरसा रहे थे।

जूता युद्ध अभी चल ही रहा था कि आसमान में सी आई डी का हैलीकॉप्टर मँडराने लगा। हैलीकॉप्टर देख कर डाकू हक्के-बक्के रह गए लेकिन पॉंच घंटे की जंग के बाद वो थक कर चूर हो चुके थे। हेलीकॉप्टर ताड़का मैदान में उतरा और हेलीकॉप्टर से उतर कर सिपाहियों ने डाकुओ को हथकडिया पहना दी।


उपसंहार

ठाकुर ने अंगारे बरसाती निगाह से हथकड़ियां पहने गब्बर को चार लात रसीद की और ए सी पी प्रधुमन, सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत, इंस्पैक्टर दया और उनकी टीम को गब्बर सिंह के पकडे जाने पर धन्यवाद दिया।

"कोरा धन्यवाद दोगे ठाकुर साब, पिछले तीन महीने से यहाँ पड़े है कभी एक कप चाय को नहीं पुछा आपने........" सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत शिकायती लहजे में बोला।

"क्या चाय जैसी छोटी चीज की बात करते हो? कभी दारू मुर्गा माँग कर देखते।" ठाकुर थोड़े गुस्से से बोला।

"अरे ठाकुर साब कहाँ अभिजीत के मूँह लग रहे हो, वो यहाँ के खाने से सदा नाखुश रहा, अब हमे विदा दीजिए......." ए सी पी प्रधुमन बोला।

"मै तो दिल से विदा करना चाहता हूँ आप लोगो को लेकिन अभी थोड़ी देर पहले टीवी न्यूज में देश के गृह मंत्री ने आप लोगो की सफलता से खुश होकर आपको दुर्दांत डाकू जगीरा को पकड़ने के लिए देवदुर्ग भेजने की बात कही है।" ठाकुर गंभीर भाव से बोला।

ये सुनते ही ए सी पी प्रधुमन, सीनियर इंस्पैक्टर अभिजीत और इंस्पैक्टर दया के चेहरों पर मनहूसियत छा गई।


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