सोच
सोच
मान सिंह नेगी एक अनुभव रखता है.
कैसे किस प्रकार अपने उत्पाद को दुकानदार रूपी ग्राहक के समक्ष प्रस्तुत करना है.
पुष्पा ने बताया हालांकि उन्हें सेल्स क्षेत्र में कोई ज्ञान नहीं है.
बावजूद इसके वह एक बहुत शानदार अनुभव रखते हैं, सेल्स क्षेत्र का.
तभी राजेश्वरी पूछती है कैसे तुम कह सकती हो. जो सेल्स क्षेत्र से जुडा नहीं है.
वह कैसे सेल्स क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हो सकता है.
जो सेल्स क्षेत्र का ज्ञाता नहीं है. वह सेल्स क्षेत्र का अनुभव कैसे रख सकता है.
पुष्पा ने कहा राजेश्वरी यह तो सब जानते हैं. घर की मुर्गी दाल बराबर.
राजेश्वरी ने पूछा आप क्या कहना चाहती हो.
पुष्पा ने कहा घर में जो ग्रहणी है जो हाउसवाइफ है क्या वह किसी भी क्षेत्र में किसी भी प्रकार से कम है.
जबकि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट महिला ने अपने ही पति से कहां तुम जंगे मैदान में गोलियों की बौछार तो कर सकते हो.
तुम दुश्मनों के दांत खट्टे तो कर सकते हो. तुम दुश्मन पर विजय की पताका फहरा सकते हो.
परंतु ग्रहणी की तरह एक साथ चार-चार काम नहीं कर सकते.
इस पर सभी दोस्तों ने तालिया बजाई.
कहते हैं हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखें कप फारसी क्या.
पुष्पा ने कहा राजेश्वरी ज़ब मान मेरे पति बाजार मे ग्राहक से बातचीत करते है.
तब ग्राहक कप समझाना बहुत मुश्किल होता है.
जो उत्पाद वह use बेचना चाह रहा है. वह किस प्रकार से दुकान मे रखे अन्य उत्पाद से बिलकुल अलग है.
पुष्पा ने कहा राजेश्वरी क्या तुम बता सकती हो सबसे मुश्किल कार्य क्या है.
राजेश्वरी ने कहा किसी भी व्यक्ति की सोच बदलना सबसे बड़ा मुश्किल कार्य है.
पुष्पा ने कहा यही कार्य दुकानदार रूपी ग्राहक से संबंध बनाते समय मेरे पति मानसिंह नेगी को व्यवहारिक ज्ञान में निपुण बनाता है.
जिसके कारण मैं कह सकती हूं. वह सेल्स क्षेत्र के न होकर भी सेल्स क्षेत्र का विशेष अनुभव रखते हैं.
इतनी जिद्दों जहद के पश्चात भी मेरे पति व्यक्ति की सोच को नहीं बदल पाते..
जहां व्यक्ति कहता है मैं एक प्रोडक्ट को बहुत सालों से इस्तेमाल कर रहा हूं, या कर रही हूं.
मेरे पति उस सोच को भी नहीं बदल पाते.
जहां ग्राहक कहता है मैं आपके प्रोडक्ट इसलिए इस्तेमाल नहीं कर सकता.
मैं आपके प्रोडक्ट इसलिए इस्तेमाल नहीं कर सकती.
क्योंकि मैं बहुत लंबे समय से दूसररी कंपनी के प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हूं करता हूं.
राजेश्वरी ने पूछा फिर कैसे वह दूसरे की सोच को बदल पाएंगे.
पुष्पा ने कहा सहज पके तो मीठा होय.
ठीक उसी प्रकार जिस व्यक्ति की सोच बदलने में वे कामयाब हो जाते हैं.
वह उनसे उनकी कंपनी के प्रोडक्ट खरीद लेता है.
परंतु अधिकतर पाया गया है. एक रिश्तेदार की अड़ोस पड़ोस की कार्यालय के बॉस या सहयोग की सोच बदलना उतना ही कठिन है.
जितना हिमालय की चोटी पर चढ़ना है.
इन सब रूकावटों के बावजूद यदि व्यापार में सफल होना है.
तो ग्राहक की सोच को बदलना ही होगा.
मेरे पति अक्सर कहते हैं जब तक ग्राहक की सोच से अपनी सोच ना मिला ले.
तब तक वह धीरे-धीरे उससे जुड़े रहते हैं.
क्योंकि वह अच्छी तरह जानते हैं. एक ग्राहक के छूटने से वास्तव में आमदनी में फर्क पड़ता है.
दूसरी तरफ यह भी देखा गया है ग्राहक की सोच को बदलने में दुकानदार बहुत बड़े महारथी होते हैं.
वह ग्राहक़ को उस समय भी विश्वास में ले लेते हैं.
जब उनके पास वह उत्पाद नहीं होता. जो ग्राहक को चाहिए.
मान लीजिए ग्राहक को ए बिस्किट पसंद है. परंतु दुकानदार के पास b बिस्किट पड़ा हुआ है. तब वह कुछ समय तक इधर-उधर ढूंढने के पश्चात ग्राहक को ए बिस्कुट की जगह बिस्किट b दे देता है.
इस कार्य में दुकानदार को महारथ हासिल होती है.
ठीक इन्हीं व्यवहारिक ज्ञान से अनुभव लेते हुए मेरे पति मान सिंह नेगी लगातार ग्राहक को यह समझाने में लगे रहते है.
जो प्रोडक्ट आप इस्तेमाल कर रहे हैं. उससे बेहतर उत्पाद की जगह लेने के लिए उनकी कंपनी के उत्पाद बेहतर है.
यहां 100% में से 5% लोग ही अपनी सोच को बदल पाते हैं.
यदि बनी बनाई सोच बदलती है. तब वह एक सफल व्यापारी के रूप में एक सफल सेल्स क्षेत्र में अपनी विजय पताका फहरा सकते हैं.
यह भी याद रखना गंदी सोच और पैर में मोच कभी आगे नहीं बढ़ने देती.
इसलिए अच्छा सोचो बड़ा सोचो क्यूकी जीवन में सारा खेल सोच का है.
मैं सबसे यही कहना चाहती हूं अपनी सोच बदले तभी जीवन बदलेगा.
इतिश्री
