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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

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Jyoti Naresh Bhavnani

Inspirational

संस्कार

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नेहा आज अपने बेटे राहुल का रिश्ता पक्का करने जा रही थी। वह और उसका बेटा गाड़ी से नीचे उतरे और लड़की वालों अर्थात काजल के घर की और चल दिए। लड़की वालों के यहां उनका ख़ूब ही अच्छे से स्वागत किया गया। चाय पानी पीने के बाद काजल को बुलाया गया। काजल और राहुल ने एक दूसरे को देखा। दोनों की नजरें मिलीं तो काजल ने अपनी नजरें शर्म के मारे झुका दीं। दोनों को अकेले में बात करने के लिए भेजा गया। थोड़ी देर के बाद जब वे दोनों वापस आए और दोनों की राय पूछी गई तो दोनो ने इस रिश्ते के लिए हां कह दी। जब नेहा से यह बात पूछी गई तो उसने पहले राहुल को फिर काजल को देखा और फिर उसने कहना शुरू किया कि इस रिश्ते को जोड़ने के पहले उसकी एक शर्त है अगर यह शर्त उसकी मंजूर की जाती है तभी यह रिश्ता पक्का समझा जाएगा। काजल के घरवाले सोच में पड़ गए कि शायद दहेज की कोई बात होगी। उन्होंने नेहा को अपनी शर्त बताने को कहा।


नेहा ने कहा," मेरा स्वभाव बहुत ही पारदर्शी है। मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी रिश्तों को निभाने और बचाने में गुज़ारी है। दफ्तर में और घर परिवार दोनों जगह पर अपने फर्ज़ बख़ूबी निभाकर मैंने अपना बहुत नाम कमाया है। राहुल को बड़ा करने में मैंने और इसके पापा ने अपनी जी जान लगा दी है। राहुल हमारा दो बहनों के बीच इकलौता भाई है इसलिए इसमें हम सब की जान बसी है। इसलिए मैं चाहती हूं कि मुझे दहेज में चाहे कुछ भी न मिले पर मुझे ऐसी बहू मिले जो बेहद ही संस्कारी हो, जो मेरी तरह ही सारे रिश्ते निभाए और ख़ुशी ख़ुशी अपने सारे फर्ज़ पूरे करे। वह अपने पति को सिर्फ अपनी ही जागीर न माने पर उसके बचपन से लेकर आज तक जो उसके साथ रिश्ते जुड़ें हैं उनकी भावनाओं को भी समझे और उनके प्रति जो उसके फर्ज़ हैं उनको पूरा करने दे क्यों कि अपने आस पास ऐसे किस्से मैं बहुत देख सुन रही हूं जिसमें बहुएं घर पे आते ही बेटों को अपने मोह जाल में फंसाकर अपने घर परिवार से अलग कर देती हैं। न वे उन्हें किसी से रिश्ते निभाने देती हैं और न उनके प्रति कोई फर्ज़ ही पूरा करने देतीं हैं। यहां तक कि मां बाप के लिए या अपने भाई बहनों के लिए भी अगर बेटे कुछ करना चाहें तो वे उन्हें करने नहीं देतीं हैं। उन्हें सिर्फ खुद की और अपने रिश्तों की पड़ी रहती है। बाकी अपने पति के रिश्ते तो जैसे उन पर बोझ बन जाते हैं। मां बाप जो अपने बच्चों को बड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी लगा देते हैं और उम्र भर उनकी खुशियों के लिए अपनी खुशियों और अपने आराम का त्याग करते रहते हैं ऐसे मां बाप के बच्चे जब बड़े हो जाते हैं और अपने मां बाप और अपने भाई बहनों के त्यागों की बदौलत ही ज़िंदगी में जब कुछ कमाने के लायक बनते हैं तब ऐसे वक्त में उनकी शादियां हो जातीं हैं और जो सुख ज़िंदगी में इतने संघर्ष करने के बाद उनके परिवार वालों को मिलना चाहिए वह सिर्फ उनकी पत्नियों को ही मिलता है क्यों कि आजकल की पत्नियां अपने पतियों को अपने घरवालों से कुछ करने ही नहीं देतीं हैं। बेचारे मां बाप जो बरसों इंतजार करते हैं अपने बच्चों के बड़ा होने का, वे बुढ़ापे में बेसहारा हो जाते हैं। हां, यह बात बिल्कुल सही है कि पत्नियों का अधिकार ज़रूर है अपने पतियों पर क्यों कि वे भी अपना घर परिवार छोड़कर एक अनजान इंसान के साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बिताने आतीं हैं पर इसका मतलब यह बिलकुल ही नहीं है कि बेटों की शादी हो जाने के बाद उनके मां बाप या भाई बहनों या रिश्तेदारों का उनके पतियों पर कोई अधिकार ही नहीं है। एक नया रिश्ता इतने सारे पुराने रिश्तों पर भारी पड़ जाता है, जो कि मैं नहीं चाहती हूं। मेरी नज़र में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं पर दो परिवारों का मिलन है, जिन्हें सुख दुख में हमेशा संग संग चलना है। दोनों परिवार गाड़ी के दो पहियों की तरह हैं जिनमें से अगर एक पहिए का संतुलन बिगड़ा तो ज़िंदगी की गाड़ी बीच में ही अटक जाती है। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है, मेरे ख़ुद के पैसे ही बहुत हैं पर इसका मतलब यह नहीं कि शादी के बाद मेरा बेटा मेरे लिए या अपनी बहनों और अपने रिश्तदारों के लिए कुछ खर्चा कर ही नहीं सकता है। शादी के बाद भी उन सभी का उतना ही अधिकार है जितना कि आज। इसलिए मैं चाहती हूं कि जो यह ज़िम्मेदारी उठाने के लिए दिल से तैयार हो, वही मेरी बहू बने।"


इतना सुनते ही काजल की मां बोल उठी, "आपने बिलकुल सही कहा समधन जी। बच्चों को बड़ा करना क्या होता है ये हम मां बाप अच्छे से जानते हैं और बच्चे बड़े होकर जब शादी होने के बाद अपने मां बाप और भाई बहनों को अकेला छोड़ के जाते हैं उसका ग़म क्या होता ये भी हम अच्छे से जानते हैं और काजल खुद भी इस दर्द से वाक़िफ है क्यों कि महेश भी दो बहनों के बीच हमारा इकलौता बेटा है जो शादी के तुरंत बाद ही हमसे अलग होकर अपने ससुराल के पास में ही अपना घर लेकर रहने लगा है। इसलिए इस मामले में आप निश्चिंत रहें। मेरी बेटी काजल अपने सारे रिश्ते और फर्ज़ बख़ूबी अदा करेगी, जिसकी गारंटी मैं देती हूं। अब आप सिर्फ रिश्ते के लिए हां कर दीजिए।"


तब नेहा ने कहा, "यही बात मैं काजल के मुख से सुनना चाहती हूं।" काजल ने भी इस बात के लिए अपनी हामी भर दी। दो परिवारों के बीच रिश्ता जुड़ गया और थोड़े ही दिनों में खुशी खुशी राहुल और काजल की शादी हो गई। 


शुरुआत के दिनों में तो सब ठीक रहा। काजल राहुल को किसी बात के लिए मना नहीं करती थी। वह अगर काजल के लिए कुछ लाता था तो अपने मां बाप और बहनों के लिए भी कुछ न कुछ ज़रूर लाता रहता था। परंतु धीरे धीरे काजल को यह बात खटकने लगी और वह राहुल के कान भरने लगी कि वह क्यों सब के लिए इतना खर्चा कर रहा है उसके मां बाप के पास इतना पैसा है, वे खुद ही करें न सब के पीछे खर्चा। वे लोग कहीं घूमने जाते तो कभी कभी राहुल अपने पूरे परिवार को भी साथ ले जाता था, इस बात पर भी काजल चिढ़ने लगी। हां, ये बात अलग थी कि वह अपने परिवार वालों के पीछे दिल खोलकर खर्चा करती थी और उनको साथ में घुमाने भी लेके जाया करती थी। राहुल उसको कभी कुछ नहीं कहता था और उसकी कही हुई बातें भी वह एक कान से सुनता दूसरे कान से निकाल देता था। पर जब काजल का हस्तक्षेप हर बात में बढ़ने लगा और जब उसने यह धमकी दी कि अगर राहुल ने अपना हाथ पक्का नहीं किया तो वह उसे छोड़कर मायके चली जाएगी, तब राहुल ने तंग आकर उससे कहा कि वह क्या उसे छोड़कर जाएगी, वह खुद उसे उसके मायके छोड़ के आएगा। यह कहते ही राहुल ने काजल का हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपनी गाड़ी में बिठाया और सीधा अपने ससुराल पहुंचा। दोनों को गुस्से की हालत में देखकर उसके सास ससुर चौंक पड़े और इस गुस्से का कारण पूछा। तब राहुल ने उन्हें सब कुछ सच सच बता दिया कि किस तरह काजल उसे अपने रिश्ते निभाने से मना करती है, जब कि वह खुद अपने मायके की तरफ के सारे रिश्ते ख़ूब ही भली भांति निभाती है, जिसपर राहुल को कोई एतराज़ नहीं है। राहुल ने उन्हें यह भी बताया कि जिस तरह काजल उनसे और अपने भाई बहन से प्यार करती है उसी तरह से वह भी अपने मां बाप से और बहनों से प्यार करता है तो अगर उसने उन सभी के लिए थोड़ा बहुत कुछ कर लिया तो क्या फ़र्क पड़ता है। इसमें काजल के अधिकारों में तो कोई फर्क़ नहीं पड़ रहा है न तो फिर काजल को किस बात की तकलीफ है? अगर उसको तकलीफ है तो उसे बिठाइए अपने पास। उसकी ज़िंदगी में अपने मां बाप की और बहनों की एक अलग जगह है जिस तरह से काजल की उसके मन में। उसके लिए दोनों समान है। काजल की झूठी ज़िद्द के लिए वह उन्हें नहीं छोड़ सकता।


यह सब सुनते ही काजल की मां बोल पड़ी कि काजल ने तो उन्हें इस बारे में कुछ भी नहीं बताया है। उसने काजल से पूछा कि क्या राहुल की तरफ से उसको कोई शिकायत है? क्या उसके अधिकारों के प्रति राहुल की तरफ से कोई कमी है? काजल ने ना में सिर हिलाया। तब उसकी मां ने उसे समझाया कि अब उसकी ससुराल ही उसकी सही जगह है। उसने उससे कहा कि वह यह सब कैसे भूल गई है जब उसका खुद का भाई उन लोगों को छोड़ कर चला गया था और उन लोगों को बिल्कुल ही नहीं पूछता था तब वे लोग भी कितने दुखी रहा करते थे और आज दिन तक वे इस बात से दुखी हैं। तो फिर वह खुद क्यों ऐसी गलती को दोहरा रही है? फिर उसमें और उसकी भाभी में क्या फर्क़ है? उसकी मां ने कहा कि अब उसके लिए इस घर के दरवाज़े बंद हो चुके हैं और वे तब तब ही खुलेंगे जब जब वह राहुल के साथ आयेगी। उसकी मां के समझाने से काजल को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और उसने यह स्वीकार किया कि वह अपनी सहेलियों के बहकावे में आकर यह सब कर रही थी। उसने राहुल से माफी मांगी और वह राहुल के साथ वापस जाने लगी तब राहुल ने अपनी सास को कहा कि काश, उनके जैसी मां हर बेटी को मिले। अगर मांएं अपनी बेटियों की गलतियों पर पर्दा डालने की बजाय उन्हें अच्छे संस्कार दें, उन्हें समझाएं और उनके गलत फैसलों में साथ ना दें तो हर परिवार सुखी होगा। कोई भी परिवार कभी टूटेगा नहीं। इस पर राहुल की सास ने कहा कि काश! राहुल जैसा बेटा सबको मिले जिसमें अपने मां बाप के संस्कारों की क़द्र हो, अपने परिवार और अपने रिश्तों की फिक्र हो और जो अपने हर रिश्ते को इस तरह से निभाने में सक्षम हो। यह कहते हुए काजल की मां की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। उसने काजल और राहुल को अपना आशीर्वाद देकर भीनी आंखों से विदा किया।



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