Piyush Goel

Tragedy

4.5  

Piyush Goel

Tragedy

संघर्ष की चिता

संघर्ष की चिता

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देश मे उल्लास है , सब एक - दूसरे को जीत की बधाई दे रहे हैं। युद्ध के काले बादल छटने के बाद आसमान में शांति जा सूरज निकला है । पूरा देश अत्यंत उत्साहित है । और सबसे ज्यादा उत्साहित है हमारी सेना के वीर जाबाज़ सैनिक जिन्होंने न सिर्फ युद्ध जीता बल्कि दुश्मन देश के 1500 सैनिको को बंधी भी बनाया ।

देश मे तो आनंद - मंगल था लेकिन राजधानी में कुछ और ही हो रहा था । 1500 सैनिको का क्या किया जाए इसके लिए आज बैठक बुलाई गई है जिसमे देश के प्रधान मंत्री , रक्षा मंत्री , रक्षा मंत्रालय सचिव और गृह मंत्री को बुलाया गया था ।

"मुझे लगता है कि हमे इन्हें रिहा कर देना चाहिए" । गृह मंत्री ने कहा ।

" मैं आपकी बात से सहमत हूं , हम दुश्मन देश से इसके बदले कोई समझौता कर सकते है "। रक्षा मंत्री ने कहा ।

" पर कैसा समझौता" ? सचिव ने पूछा ।

" मुझे लगता है हम उनसे करोड़ो रुपए मांग सकते है , जिससे हम देश का विकास कर पाए" । प्रधान मंत्री ने कहा ।

" यह आप लोग क्या कह कह रहे है , हमारे सैनिको ने इतनी मेहनत से दुश्मनों को अपना बंधी बनाया और आल उन्हें छोड़ रहे है , क्या आप इन पैसों से उन सैनिको के संघर्ष की कीमत चुका पाएंगे । जिन सैनिको ने इस युद्ध मे अपने प्राणों की आहुति देदी , क्या उन सैनिको की आत्मा को श्रद्धांजलि आप इस तरह से देंगे" । गृह सचिव ने करुणामयी आवाज़ में कहा ।

"तुम हमे मत सिखाओ , एक सचिव से हमे देश चलाने का तरीका हमे नही सीखना , निकलो तुम यहाँ से" । गृह मंत्री ने कहा ।

अगले दिन अख़बारों में सैनिको की मेहनत ऑफ संघर्ष की चिता जल रही थी जिसे अग्नि देश की सरकार ने दी थी ।



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