Dheeraj Bhardwaj

Horror


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शिवा और रुद्रा की कहानी पार्ट -2

शिवा और रुद्रा की कहानी पार्ट -2

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हेलो दोस्तों साइको डेविल की दुनिया मे आपका स्वागत है...."सरपंच जी ऐसा क्या हुआ था उस रात को ऐसा कौन सा हादसा था जिससे ये गांव श्रापित गांव बन कर रह गया". "ठीक है बेटा तुम दोनों इतना कर रहे हो तो बताता हूँ, उन दिनों मे मानवपुर गांव बहुत ही ज्यादा माना हुआ गांव था पर उसी से कुछ दूर एक गांव था जिसे रक्षणापुर गांव के नाम से जानते थे। वहा के लोग बहुत गंदे थे उनमे लगाव भाव प्रेम नाम की कोई जगह नही थी। उन्हें बस किसी ना किसी तरह मानवपुर गांव को नीचे गिराना था। रक्षणापुर के लोग मानवपुर गांव से बहुत चिढ़ने लग गए थे । उन्होंने मानवपुर गांव पर बहुत आक्रमण किये बहुत बार उन पर ताकत आजमाने की कोशिश की पर वोह कामियाब ना हो सके क्युकी मानवपुर गांव बहुत ताकतवर गांव मे से एक था ऐसे आक्रमण करने पर रक्षणापुर गांव का राजा रकतावर और उसका बेटा यदुकी उस आक्रमण मे दोनों मारे गए और बाकियो को भी बहुत पीट पीट कर गांव से बाहर निकाल दिया गया। इतना सब होने के बाद भी वो आराम से नही बैठे। वो तरकीब लगा रहे थे ऐसा क्या करे मानवपुर गांव का नाम ख़तम हो जाए वो हर तरकीब लगा कर देख चुके थे पर उन्हें हार के अलावा कुछ नही मिला फिर वे समझ गए थे की मानवपुर गांव का ताकत से कुछ नही हो सकता। कुछ ऐसा करना पड़ेगा की साँप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। तभी उन्होंने बैठक बिठाई गांव के सभी निवासीयों को बुलाया और सभी ने आपस मे विचार विमर्श किया। कुछ लोगो ने बोला की क्यों ना एक बार फिर से आक्रमण किया जाए इस बार पूरी तयारी के साथ जाएंगे पर तभी गांव के मुखिया ने बोला नही ऐसा करने से कुछ नही मिलेगा बस हार ही हाथ लगेगी ऐसा हम नहीं कर सकते। पहले ही हम राजा जी और उनके पुत्र को खो चुके हैं।फिर उस दिन उनके दिमाग़ मे एक भयानक और बहुत ही दर्दनाक विचार आया। वो दिन इतना भयानक था की सुन कर भी रूह काँप जाती है। मुझे आज भी याद है दादा जी ने कैसे दिन बिताये थे. ये बात सन 1867 अक्टूबर की बात है उस दिन तक सब सही था सब अच्छे से रह रहे थे मानवपुर गांव ने पूरा दिन खुशी से बिताया और जैसे ही रात के 8 बजे मानवपुर गांव सो गया और यह बात दूर दूर तक के गांव वालो को पता था की मानवपुर मे 8 बजे सब सो जाते हैं। कोई जाग नही रहा होता तो उनके पास वही मौका था अपना भयानक वार करने का। उस रात रक्षणापुर के सभी निवासी मानवपुर गांव के चारो और फेल गए और सभी की हाथो मे मिटटी का तेल पेट्रोल बारूद के कट्टे थे और उन्हें पता था अभी गांव से कोई बहार भी नी आएगा ऐसे मे उन्होंने सभी घरों पर मिटटी का तेल डाल दिया और सभी के घर के बाहर बारूद का कट्टा रख दिया और घरो के ऊपर भूसा भी डाल दिया और ऐसा करके वो सब मानवपुर गांव के अंतिम छोर पर खड़े हो गए और अपने हाथ की मशाले गांव के अंदर डालने लग गए। सभी लोगो ने अपनी मशालें गांव मे फेक दी देखते ही देखते पूरा मानवपुर गांव जल कर राख़ हो गया। वो गांव से शमशान मे तब्दील हो गया और जो कुछ लोग किसी तरह बचे थे वो भी तड़प तड़प के मर गए क्युकी वहां उनका कोई इलाज करने वाला नही था। ना उन्हें कोई अस्पताल पहुंचाने वाला था। कुछ लोग तो 2 से भी ज्यादा दिन तक तड़पे थे ऐसा लग रहा था जैसे वो मर कर भी ज़िंदा है ऐसे ही देखते देखते धीरे धीरे मानवपुर गांव हो गया दानवपुर ।



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