शीर्षक: ठंडी छाँव
शीर्षक: ठंडी छाँव
शीर्षक: ठंडी छाँव दोपहर की तपती धूप में गाँव की गलियाँ सुनसान थीं। सूरज आग उगल रहा था और परिंदे प्यास से बेहाल होकर पेड़ों की झुरमुटों में दुबके थे। आर्यन अपने घर के बरामदे में बैठा पंखे की हवा का इंतज़ार कर रहा था, तभी उसकी नज़र आँगन में मिट्टी पर पड़ी एक नन्ही गौरैया पर गई। वह प्यास के मारे अपनी चोंच खोलकर हाँफ रही थी। आर्यन तुरंत उठा और रसोई से मिट्टी का एक कोरा सकोरा ले आया। उसने उसमें घड़े का शीतल जल भरा और नीम के पेड़ की घनी छाँव के नीचे रख दिया। रिया यह सब देख रही थी। वह धीरे से पास आई और बोली, "आर्यन, हम इंसान तो अपनी प्यास माँग कर बुझा लेते हैं, लेकिन ये बेजुबान इस तपती दुनिया में कहाँ जाएँ? गर्मी सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि इनके धैर्य का भी कड़ा इम्तिहान है।" आर्यन ने मुस्कुराते हुए पानी की बूंदों को मिट्टी पर छिड़का और कहा, "सही कहा रिया, असली इंसानियत वही है जो दूसरों की खामोश तकलीफ को अपनी तकलीफ समझे। आज इस नन्ही चिड़िया की प्यास बुझाकर मुझे जो सुकून मिला है, वह एसी (AC) की ठंडी हवा भी नहीं दे सकती।" देखते ही देखते, कुछ ही पलों में वहाँ कई पक्षी उतर आए और चहचहाते हुए पानी पीने लगे। उनकी उस चहक ने आर्यन के पूरे आँगन को एक अनोखी शीतलता से भर दिया। उसे अहसास हुआ कि जब हम दूसरों की प्यास बुझाते हैं, तो हमारी अपनी रूह भी तृप्त हो जाती है
