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Bhavna Thaker

Tragedy

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Bhavna Thaker

Tragedy

"शहीद की होली स्वर्ग में मनी"

"शहीद की होली स्वर्ग में मनी"

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तारा सारी चीज़ों की गिनती करते हुए बोली "गुजिया, रबड़ी, भांग पिचकारी और लाल, पीले, नीले, और गुलाबी रंगों से भरा थाल सबकुछ तो आ गया भाभी अब चलो भी लो सारा इन्तज़ाम हो गया, देखो मोहल्ले के सारे लोग कैसे होली खेल रहे है जल्दी चलिए ना मुझसे अब सब्र नहीं होता।"

तारा ने अपनी भाभी जानकी का हाथ खिंचते ले जाने की कोशिश की, शादी के बाद जानकी की ससुराल में पहली होली थी पर जानकी का मन तो सरहद पर माँ धरती की रक्षा करने वाले रखवाले अपने पति मेजर सत्य प्रकाश की यादों में खोया हुआ था। शादी के 15 दिन बाद अगले साल आऊँगा बोलकर गए थे। नई नवेली परिणीता जानकी को बिन साजन कैसे होली भाए। बसंती बयार, पहली होली का त्यौहार, पलाश की बौछार उपर से पियु से दूरी कैसे खेले कोई होली। जानकी बोली "तारा तुम खेलो मुझे बख़्श दो, तुम्हारे भाई के बगैर मेरा मन नहीं। सब अपने-अपने सैयां जी के संग होली खेल रही है मैं अकेली क्या करूँगी, तुम जाओ। "

उस पर तारा ने कहा "ओहोओओ तो ये बात है, लो अभी भैया से मिलवा देती हूँ " और तुरंत अपने भाई को मोबाइल से विडियो काल लगाया, पर सत्य प्रकाश का वोईस मेसेज आया कि "अभी फ्रंटलाईन पर हूँ बात नहीं कर सकता, होली मुबारक, तुम सब एन्जॉय करो।" जानकी का मन खट्टा हो गया त्यौहार पर आए तो नहीं इतनी दूरी कैसे बर्दाश्त करती हूँ मन ही जानता है, कम से कम चेहरा तो दिखा देते बस वोईस मेसेज भेज दिया बोलते रो पड़ी। पर तारा ने जबरदस्ती अपनी लाडली भाभी को मना लिया, और जानकी की सासु माँ ने भी प्यार से कहा बहू खेल लो थोड़ी देर अच्छा लगेगा और तारा कि ज़िद्द भी पूरी हो जाएगी।

जानकी बेमन से गई तो पर सबके साथ खेलने के बाद खिल गई और मूड़ बनाते, सबको रंगों में डूबोते खुद भी सराबोर हो गई। उपर से भांग का हल्का नशा तो बस झूमते गाते पूरा मोहल्ला होली के माहोल में रंग गया। कोई एक दूसरे को गुजिया खिला रहा है, कोई भांग के प्याले भर रहा था तो कोई पिचकारी से खेल रहा था। हर तरफ़ खुशी का माहौल था। तारा ने लाल चटक रंग की मुठ्ठी भरी और अपनी खूबसूरत भाभी के गालों पर मल दिया और जैसे ही चुटकी भर रंग भाभी की मांग में सजाने हाथ बढ़ाया कि पड़ोस वाले शशि अंकल ने आवाज़ लगाई, "सुनों-सुनों सब बंद करो ये हल्ला-गुल्ला टीवी पर एक बहुत ही बुरी खबर दिखा रहे है, अपनी जानकी बिटिया का पति सत्य प्रकाश आतंकवादीयों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गया है।" तारा का हाथ हवा में ही रह गया, सब जैसे थे उस क्रिया में बुत बन गए। जानकी की दुनिया थम गई, आँसूओं के सैलाब में हर रंग मानों बिखर गए। एक सरसराहट पूरे बदन में दौड़ गई, आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा, साँसों से तन का दामन छूटने लगा, हर चेहरे में एक चेहरा ढूँढती रही धीरे-धीरे हर चेहरे धुँधले होते गए। दूर चीर नींद्रा में सोए साजन से दूरी मिटाती जानकी सातवें फेरे का वचन निभाती पिया मिलन की प्यासी चक्कर खाकर गिर पड़ी। दूसरे दिन एक तन अपनी जान तिरंगे में लिपटा था और दूसरा देह अपनी जान के नाम की लाल चुनर से सजा, अश्कों के समुन्दर में तैरते दुल्हा दुल्हन सज-धज कर अनंत की डगर पर निकल पड़े। हर किसीकी जुबाँ पर एक बात थी स्वर्ग में आज होली सा माहौल होगा, रंगीन फ़िज़ाओं सा मौसम होगा और दो बदन एक जान के स्वागत में सजा शामियाना होगा।


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