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Dr Sushil Sharma

Abstract Tragedy Inspirational

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Dr Sushil Sharma

Abstract Tragedy Inspirational

शेष शुभ

शेष शुभ

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प्रिय मानुष

कुशलोपरांत समाचार है कि तुम्हारी माँ विगत तीन महीने से बिस्तर पर हैं, री कमर में दर्द है फिर भी मैं उसकी देखभाल कर रहा हूँ मुझे मालूम है तुम विदेश से नहीं आ सकते मजबूर हो तुम्हारा घर है बच्चें हैं कामकाज के कारण बहुत व्यस्तता है।

तुम्हारी व्यस्तता को देख कर मैनें हम दोनों की अंतिम यात्रा का प्रबंध कर लिया है,कुछ दिन बाद गया जाकर अपना और तुम्हारी माँ का पिंडदान और करना हैं बाकी हम लोगों के मरने के बाद ये प्रॉपर्टी बेच देना।

तुम्हारी माँ पूछ रही है समय पर खाना तो खाते हो तुम न।

शेष शुभ

सदा खुश रहो

बाबू।


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