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प्रीति शर्मा

Inspirational Others


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प्रीति शर्मा

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"शादी या शारीरिक शोषण "

"शादी या शारीरिक शोषण "

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    आज मोनिका ने निश्चय कर लिया था कि वह अतुल को तलाक दे देगी। ऐसे रिश्ते में रहने का क्या फायदा, जहां मन और आत्मा का कोई मेल ना हो विचार ना मिलते हों, सिर्फ रिश्ते को ढोते जाना जीवन नहीं था। पिछले दो साल से अतुल ने शारीरिक रूप से ही उसे पत्नी की तरह भोगा मन से वो आज भी इतनी दूर थी जितनी शादी के समय।     

 दूसरे शब्दों में कहें तो यह उसका पत्नी के रिश्ते की आड़ में शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण था। अपने दृढ़ निश्चय पर विचार करते हुए मोनिका बैड पर लेट गई। अतुल सो चुका था। अब मोनिका को नई सुबह का इंतजार था।

   पिछले दो वर्ष से मोनिका अतुल के साथ वैवाहिक जीवन की गाड़ी खींचती चली आ रही थी लेकिन जहां गाड़ी का एक टायर सीधा चल रहा हो और दूसरा दूसरी दिशा में भागने की कोशिश कर रहा हो, वहां गाड़ी तो क्या चलती, बस घिसट रही थी।

       मोनिका शुरू के एक-दो महीने तो समझ ही नहीं पाई। उसे लगा अतुल का स्वभाव ही ऐसा है, कम बोलना कम बात करना। पति पत्नी का रिश्ता तो दोनों के बीच था लेकिन सिर्फ जिस्मानी तौर पर। कभी भी अतुल ने उसके ख्यालात या ख्वाब जानने की कोशिश नहीं की और ना ही कभी सोचा कि वह क्या करती है ?

क्या चाहती है, किस चीज की जरूरत है?

उसने इन सब चीजों को जानने की कोशिश ही कभी नहीं की। शुरुआत के दिन उसके सास- ससुर के साथ में निकले थे तो उसने उस समय इन चीजों का ज्यादा एहसास नहीं किया। यह सोचकर की संयुक्त परिवार में शायद अतुल सहज नहीं है या खुलकर बात नहीं कर पाता।

    नौकरी पर भी गृहस्थी जमाने सास-ससुर साथ आये थे। दो-चार बार उन्होंने अतुल को उसे शाम को घुमाने फिराने या फिल्म दिखाने के लिए कहा तो अतुल ने उन्हें भी जिद कर साथ चलने के लिए मना लिया मानो वह मोनिका के साथ अकेले में ज्यादा समय ना बिताना चाहता हो। लेकिन दो-तीन महीने बाद सब कुछ सुचारु रूप से चलने लगा तो वो चले गये।

  उनके जाने के बाद भी उसका उसी तरह का व्यवहार देख उसे बड़ा अजीब लगा। अतुल से उसका इतना ही वास्ता था कि उसकी जरूरी आवश्यकतायें पूरी कर देता, जो वह कहती ले आता। मानसिक रूप से जैसे उससे बिल्कुल जुड़ा ही नहीं था, आत्मा तक तो पहुंचने की बात ही दूर थी। कभी उसको नहीं लगा कि उसे प्यार से मना रहा है, मनुहार कर रहा है ,उसकी तारीफ कर रहा है जैसा कि अक्सर नई-नई शादी में होता है। मोनिका पति के इस प्यार भरे रूप के लिए तरस रही थी, जबकि अतुल अपने आप में मस्त रहता। कभी फोन करते करते बाहर चला जाता तो कभी बालकनी पर। मोनिका इसका कारण नहीं समझ पा रही थी क्योंकि उसकी शादी तो उसकी मर्जी से ही हुई थी तो उसे नापसंद करने का कोई कारण भी नहीं था और मोनिका भी देखने सुनने में आकर्षक व्यक्तित्व की थी, पढ़ी लिखी थी, संस्कारित थी।

      वह हर तरह से कोशिश करती कि अतुल खुश हो, उसकी तारीफ करे, उसके खाने की, उसके घर की सजावट की, उसके सजने संवरने की। उसे बाहर घुमाने ले जाए, पिक्चर ले जाए लेकिन जीवन में वो दिन अभी तक आया ही नहीं था। कभी-कभी उसके एक-दो दोस्त घर पर आए और इधर-उधर की बातों के अलावा उन्होंने भी अतुल के बारे में कुछ खास नहीं बोला। एक दिन अच्छा सा मूड देखकर मोनिका ने अतुल से प्रश्न कर दिया।

"क्या उसे वह पसंद नहीं या उसकी मर्जी के खिलाफ उसकी शादी हुई है या उसको उसकी कोई आदत पसंद नहीं ?

क्यों नहीं मुझसे कभी खुलकर बात करते या उसकी तारीफ नहीं करते?"

   लेकिन अतुल ने उसे तब यह कहकर टाल दिया कि" यह उसकी गलतफहमी है, ऐसा कुछ भी नहीं । उसकी आदत ही नहीं है, बस वैसा ही है वह। "

  लेकिन मोनिका कई बार देखती अतुल बड़ा खुश खुश लौटकर आता लेकिन मोनिका के साथ वह उतना प्रसन्न नजर नहीं आता। देर से आता, आकर कभी-कभी खाना खाता कभी नहीं और कमरे में सो जाता और जब जी होता मोनिका को अपने पास खींच लेता।

 मोनिका ने अपनी मन की बात एक दो बार अपनी प्यारी सखी निहारिका से बताई। सखी ने उसको सलाह दी कि वह उसके दोस्तों के बारे में पता करें और उसके ऑफिस में भी उसके बारे में जानकारी प्राप्त करे लेकिन इस तरह कि अतुल को पता ना लगे। नहीं तो कहीं कुछ गलत प्रभाव उसकी गृहस्थी में ना पड़ जाए और जल्दी मोनिका को मौका मिल भी गया, जब ऑफिस की एक पार्टी में सभी को अपनी पत्नियों के साथ बुलाया गया था और पहली बार अतुल मोनिका को लेकर के पार्टी में गया क्योंकि पहली बार मोनिका उसके साथ घर से बाहर निकली थी तो बहुत अच्छे से तैयार हुई। इतने दिनों में उसे इतना तो पता लग गया था कि अतुल को कौन सा रंग पसंद है, खुले बाल पसंद है आदि। मोनिका ने कोशिश की कि अतुल उसको देख कर खुश हो और उसके साथियों के सामने अच्छा व्यवहार करे।

 पार्टी में पहुंचकर उसको कुछ अजीब सा लगा क्योंकि अतुल दोस्तों से परिचय कराकर थोड़ी देर बाद ही वहां से गायब हो गया। सभी दोस्त उसकी तारीफ कर रहे थे, उनकी पत्नियां भी उससे मिलकर खुश थी लेकिन अतुल के दो खास दोस्त जो कभी-कभी घर भी आया करते थे उनकी पत्नियों ने उसको अपने साथ लेकर एक तरफ चलने का इशारा किया।

"हमें तुम्हें कुछ बताना है मोनिका। "

मोनिका को समझ नहीं आया कि पहली बार मिलने में उसको इस तरह से अलग क्यों ले आईं। उसने बड़े सहज भाव से कहा,'

"हां जी कहिए!

पहले उन दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर पूछा," क्या तुम्हें पता है इस समय अतुल कहां है ?"

मोनिका को अतुल कहीं नजर नहीं आ रहा था।

" किसी दोस्त के साथ होगें "उसने कहा ।

"वह यहां नहीं है उसके सभी दोस्त यहीं हैं। वह काजल के साथ बालकनी पर है।" श्रीना जी ने कहा।

" काजल? काजल... यह कौन है और... अतुल का उससे क्या रिश्ता है ?" उसके मुंह से निकला।

" लगता है तुम्हें कुछ भी पता नहीं और ना ही अतुल ने तुम्हें कभी कुछ बताया...

  वास्तविकता यह है कि पिछले तीन सालों से अतुल का काजल के साथ रिलेशन है और काजल भी शादी-शुदा है। इसी वजह से वह उससे शादी नहीं कर पाया और तुमसे शादी कर ली लेकिन तुम्हारी शादी को भी अब साल होने आया। हम तो सोचते थे कि काजल के साथ धीरे-धीरे उसका रिलेशन समाप्त हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि पहले से भी ज्यादा प्रगाढ़ हो गया है ।

क्या तुम्हें कभी एहसास नहीं हुआ कि अतुल तुम्हारे साथ धोखा कर रहा है या कुछ गलत कर रहा है?"

   मोनिका सदमे में आ गयी। इस तरह का कोई खुलासा अतुल के बारे में यहां पार्टी में होगा, उसने तो ऐसा सोचा भी नहीं था। वह तो कुछ और ही सोच कर आई थी कि उसकी आदतों के बारे में, नेचर के बारे में जानकारी प्राप्त करेगी कि वह ऐसा क्यों है लेकिन यहां तो मामला कुछ और ही था।

    फिर दोनों सखि श्रीना और मीनु ने उसको कुछ और बातें बताईं और मोनिका ने अपने साथ अतुल के व्यवहार को समझ लिया कि वह उसके साथ ऐसा प्यार क्यों करता है? जिसके लिए इतना सज धज कर पार्टी में आई थी वही नहीं है। वह तो काजल के साथ है। इस बात ने उसे बहुत विचलित कर दिया अभी वह कुछ और बात करती तभी उसको काजल अतुल के साथ आती हुई दिखाई दी।

               माथे पर कटे हुए बाल नाक में डायमंड का कोका स्लीवलैस ब्लाउज और नाभि दर्शना साड़ी, ऊंचे हील के सेंडल। पश्चात्य सभ्यता की साक्षात मूर्ति लग रही थी काजल।

  क्या अतुल उसके रूप रंग पर मोहित हो गया। ऐसा इसमें क्या है? मोनिका सोच में पड़ गई। पास आते हुए अतुल ने काजल का परिचय कराया।

"इनसे मिलो यह काजल मेरी बहुत अच्छी दोस्त और काजल इनसे मिलो यह मेरी पत्नी मोनिका।

काजल ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन मोनिका ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिये। काजल ले हाथ पीछे कर लिया।

   मोनिका पार्टी में रुकी तो सही पर ज्यादा देर अपने को सहज नहीं रख पाई और उसने अतुल से घर चलने के लिए बोला कि उसका यहां मन नहीं लग रहा। अतुल ने भी देखा काजल भी जाने की तैयारी में है तो उसने भी हां कर दिया और घर आते ही मोनिका सोच में डूब गई कि वह किस तरह से अतुल से बात करे। काफी सोच-विचार के बाद उसे लगा कि उसे सहज रूप से अतुल के मन को जीतना होगा इतनी आसानी से वह अपनी गृहस्थी को यूं ही खराब नहीं करेगी।

पिछले एक साल में मोनिका ने हर संभव कोशिश की कई बार बातों बातों में उसको इशारा भी दिया, समझाया भी और आखिर में परिणाम यह निकला कि अतुल ने कह दिया-

"तुम्हें किस चीज की कमी है। आखिर मैं तुम्हारी सारी आवश्यकता पूर्ति करता हूं। भौतिक सुख सुविधाएं पति- पत्नी के बीच का दैहिक रिश्ता तो उसे इस तरह की उसकी काजल की दोस्ती से कोई एतराज नहीं होना चाहिए। "

अतुल की बातों में उसे कहीं कोई ग्लानि महसूस नहीं हुई। उसके इस तरह के व्यवहार से वह बहुत आहत हुई। उसने अपने को ठगा-सा महसूस किया।

       इस दौरान उसने अतुल के मां बाप से भी बात की और उन्हें अतुल के संबंध के बारे में बताया दोनों ने आकर अतुल को समझाने की कोशिश की पर अतुल का वही जवाब था कि काजल से उसकी दोस्ती नहीं टूट सकती। हारकर वह मोनिका को समझाकर कि उसके जीवन में कोई बच्चा आ जाय तो समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, चले गये।

  उसके बाद मोनिका ने अपने मां बाप को भी सारी बातें बताईं। उन्होंने भी आकर अतुल को समझाया पर परिणाम कुछ ना निकला। वह भी मोनिका को समझा बुझा कर कि वह कोशिश करे शायद समस्या का कोई समाधान हल निकल आये, चले गए।

  मोनिका को इतना बड़ा झटका लगा था। उसका उसे कोई भी सीधा हल नजर नहीं आ रहा था जब ज्यादा परेशान होती अपनी सहेली से फोन लगा कर अपना दिल का दर्द कहती। आखिर में उसने सोचा कि अपने पैरों पर खड़ी हो ताकि मायके जाकर मायके वालों पर बोझ ना बने। समाज में सम्मान से अपनी जिंदगी गुजार सके।

  उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी शुरू कर दी और बीच-बीच में लिखित परीक्षा, साक्षात्कार वगैरह देती रहती। अतुल को तो वैसे भी उससे कोई ज्यादा मतलब नहीं था, उसे तो पता भी नहीं था कि मोनिका क्या कर रही है?

आखिर में साल होते-होते मोनिका की मेहनत सफल हुई और बैंक में उसकी जॉब लग गई। मोनिका ने राहत की सांस ली और अब अपना अगला कदम निश्चित कर लिया।

आज नौकरी पर जाने का पहला दिन था। सुबह जल्दी उठकर नहाकर उसने शान्त मन से पूजा की। भगवान से आगे के जीवन में सब-कुछ अच्छा हो, ये प्रार्थना की।

मां को फोन कर अपने जॉब की जानकारी रात को ही दे दी थी। ससुराल में भी उसने अपने निर्णय की जानकारी दी कि अतुल से अलग होने जा रही है।

 तैयार होकर वह चाय लेकर अतुल के कमरे में गई। वह आराम से सोया पड़ा था। उसने ध्यान से उसे देखा। कितना निश्चिंतता से सोया हुआ है। उसने अपने मन को झटका। उसे सिर्फ अपने बारे में सोचना है। उसके साथ सिर्फ दैहिक रिश्ता रखा अतुल ने और आज वह इस रिश्ते का अंत कर देगी।

उसने अतुल को जगाया और चाय पकड़ाते हुये अपने निर्णय से अवगत कराया।

अतुल हैरानी से उसके चेहरे को देखता रह गया उसे इस तरह की उम्मीद ही ना थी। मोनिका ने अपना पर्स उठाया और शांत मन से बाहर निकल गई।



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