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Hansa Shukla

Inspirational


4.7  

Hansa Shukla

Inspirational


सच्ची गुरु

सच्ची गुरु

4 mins 304 4 mins 304

राशि आज बहुत खुश थी उसने यूनिवर्सिटी में टॉप किया था सभी उसे बधाई दे रहे थे लेकिन राशि तेज कदमो से अपने दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष के कमरे की ओर बढ़ रही थी।कमरे में प्रवेश करते ही उसने मैडम के पैर छुए,मैडम उसे आशीर्वाद देती उससे पहले ही राशि ने प्रेम,आदर और आत्मविश्वास के साथ कहा मैडम मेरी सफलता का श्रेय आपको जाता है मैं जब विश्वविद्यालय में प्रवेश ली तो मैं एक घमंडी,स्वार्थी और मगरूर लड़की थी मुझे लगता था कि मैं खूबसूरत हूँ,होशियार हूँ मेरे पिता शहर के प्रतिष्ठित उधोगपति है मेरी इस सोच के कारण मुझे दुसरो में कोई खूबी ही नही दिखती थी।आप पहली बार जब क्लास में आयी तो आपने सभी विद्यार्थियों को अपना परिचय देने को कहा तो मैने अपने नाम के बाद पापा का नाम बताया और मुझे लगा कि उनका नाम सुनने के बाद आप भी मुझे तवज्जों देंगी सामन्यतः जैसे बाकी जगह पर पापा का नाम बताते ही मेरे लिये लोगो का व्यवहार बदल जाता था लेकिन आपने मुस्कुराते हुवे कहा मैंने आप लोगो का परिचय पूछा है माता-पिता का नही और मुझे  बैठने बोल दी मुझे बहुत बुरा लगा,थोड़े दिनों बाद आप अपनी क्लास में हम सभी स्टूडेंट्स को अपनी दो कमजोरी बताने बोली सबने अपनी कमजोरी बताई, मैंने घमंड के साथ उत्तर दिया मैडम मेरी कोई कमजोरी नही है,

आपने सहजता से कहा "बहुत अच्छा राशि तुम ये बताओ चंद्रगुप्त मौर्य की उम्र उसकी मृत्यु के समय कितनी थी?"मैं चुप रहने वालों में से कहा थी मैंने कहा "आप अपने विषय का प्रश्न पूछती मेम मैं पूरा इतिहास तो याद नही रखूँगी मैं हिस्ट्री की स्टूडेंट नही हूँ आपने मुस्कुराते हुये कहा मतलब तुम्हारा इतिहास कमजोर है" क्लास में सब हसने लगे और मैं तेजी से क्लास से बाहर निकल गई, उस दिन तो आप मेरी दुश्मन हो गई।मैं आपकी क्लास अटेंड करना छोड़ दी मैं आपको परिसर में कहीं देखती तो रास्ता बदल लेती।एक दिन मैं कॉलेज आ रही थी ट्रक के ठोकर से मेरी गाड़ी स्लीप हो गई और मैं दूर में जाकर गिर गई मेरे सर से खून बह रहा था संयोग आप वही से जा रही थी भीड़ को चीरते हुये आप मेरे पास पहुँची और मेरे सर पर अपना दुपट्टा बांधी जिससे ज्यादा खून ना बहे,तुरन्त हॉस्पिटल ले गई और मेरे घर मे खबर की। घरवालों के आते तक आप मेरे पास ही रुकी थी,मैं जानबूझकर आँखे बंद रखी थी आपसे नजर मिलाने की मेरी हिम्मत नही थी।उस दिन पहली बार मुझे लगा आप बहुत अच्छी है मुझे आपसे माफी मांगकर आपका शुक्रिया अदा करना चाहिए लेकिन मेरे अहम ने वैसा करने से रोक दिया।                              

दूसरी बार हमारे फाइनल एग्जाम में आपकी ड्यूटी लगी थी, किसी ने अपनी चिट मेरे बेंच में फेक दी ,आप चाहती तो मेरा नकल प्रकरण बना सकती थी लेकिन आपने ऐसा नही किया, जब हम एग्जाम देकर निकले तो आपने मुझे अपने केबिन में बुलाकर कहा "राशि तुम होनहार लड़की हो मुझे पता है तुम मुझे पसंद नही करती,तुम्हारा ध्यान पढ़ाई से ज्यादा इस बात में लगा रहता है कि तुम कुछ ऐसा करो कि मुझे बुरा लगे, तुम मेरी बेटी जैसी हो मैं तुम्हारे बात या व्यवहार से कभी आहत नही हुई ,मैं तो ये चाहती थी कि तुम अपना मन मेरे गतिविधियों से हटाकर अपने पढ़ाई और अन्य गतिविधियों पर केंद्रित करो।   बेटा तुम्हे भगवान ने सुंदर बनाया है,तुम्हारे पिता शहर के प्रतिष्ठित व्यक्ति है पर तुम्हारी क्या पहचान है? तुम अपने व्यवहार को अच्छा बनाओ,ऐसा काम करो कि तुम्हारी अपनी पहचान बने,एक शिक्षक होने के नाते मैं तुम्हारे खूबियों को आगे लाना चाहती थी और तुम्हारी कमियों को दूर करना चाहती थी पर तुमने मुझे गलत समझा। मेरा तबादला दूसरी जगह हो गया है मैं होनहार राशि को आगे बढ़ते देखना चाहती हूँ ,बेटा अपना पूरा मन पढ़ाई में लगाओ और जीवन मे खूब आगे बढ़ो।" उस दिन पहली बार मुझे लगा मैं गलत थी आपके ट्रांसफर की खबर ने मुझे विचलित कर दिया पलको पर आने वाले आंसू को रोकते हुए मैं इतना ही बोल पाई मैडम आप रुक जाइये मेरे हाथ अकस्मात आशीर्वाद लेने आपकी पैर की ओर बढ़े,आपने मुझे उठाकर गले लगा लिया और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए प्यार से बोली "खूब आगे बढ़ो,नम्र बनो।"        

उस दिन आपसे मिलने के बाद और आपकी बातों से पहली बार मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ मैं कोई ऐसा साथ चाहती थी कि जिसके सामने मैं अपनी सारी गलतियों को क़बूल कर जी भर कर रो सकू,,मैं मंदिर गई और भगवान के सामने अपनी भावनाओ को जाने किन शब्दो मे बोल रही थी और मेरे आँसुओ ने मेरे अहम को धो दिया था,फिर मैं घर पहुँचते ही पापा से बोली,पापा मेडम का ट्रांसफर रुकवा दीजिये प्लीज्।पापा के लिये तो मेरी बात का मतलब पत्थर की लकीर वह आपका पूरा डिटेल लिये मैं समझ गई अब आप का ट्रांसफर रुक जाएगा।मेडम उस दिन मैंने संकल्प लिया था कि मैं ग्रेजुएशन में टॉप कर आपके उम्मीद पर खरा उतरूँगी,मैं अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाने लगी अभी भी मेरी आँखें कैंपस में आपको ही ढूंढती थी लेकिन अब आपको देखकर मुझे संबल मिलता था आप मेरी आदर्श बन गई थी। आज मेरे प्रावीण्य सूची में आने का पूरा श्रेय आपको जाता है मेडम आप हमेशा अपना आशीर्वाद मुझ पर बनाये रखियेगा और मेरी गलती पर मुझे टोकना मत भूलियेगा,आप सच्ची गुरु है।आज मेडम की पलको में खुशी के आँसू थे वह अपने कोमल लेकिन मजबूत हाथ राशि के सर पर फेर रही थी।


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