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Saumya Jyotsna

Romance


4.0  

Saumya Jyotsna

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सावन और तुम

सावन और तुम

3 mins 142 3 mins 142

सावन का महीना हर लड़की के मन में अनेकों उम्मीदों को जगाने वाला होता है।सावन पर बनी कहानियां, गानों से मन एक ख्वाब सजाने लगता है। हर लड़की के तरह पारुल भी यह सोचा करती थी कि उसकी भी शादी होगी और सावन के महीने में उसके हाथों में हरियाली सजेगी। ऐसे ही ख्वाब सजाकर उसने अपना आशियाना सजाया था।

वक्त बीतता रहा और धीरे धीरे पारुल की पढ़ाई भी पूरी होते गई। कोमल से ख्वाब लिए और मन में एहसासों की बदरा सजाए वह हर साल सावन का इंतज़ार करती।बचपन से ही वह नानी के साथ रहा करती थी इसलिए उसकी तमन्ना थी कि उसका पति उसके लिए एक मां और पिता की भी भूमिका निभाए क्योंकि जरुरत पड़ने पर आपका चाहने वाला ही अनेकों प्रकार से आपकी बातों को सुनता है।

पारुल की भी यही चाहती थी मगर पहले प्यार में मिले धोखे के बाद ना जाने क्यों उसने उम्मीद ही छोड़ दी। कहते हैं ना जब भीतर मन सुबकता है, तब बाहर सावन की बूंदों भी आंखों में और जलन देती है।


वक्त बीता और सावन के महीने आकर चले गए। नानी से पारुल की उदासी नहीं देखी जाती थी इसलिए वह पारुल को भरपूर समझाने की कोशिश करती। एक रोज़ दरवाज़े की घंटी बजी। पारुल ने दरवाज़ा खोल कर देखा तो सामने बचपन का दोस्त मोहित खड़ा था। मोहित पारुल का सबसे अच्छा दोस्त था या यूं कहे तो दिल की बात समझने वाला एक साथी।

पारुल उसे देखकर चौंक गई और गले से लग गई फिर दोनों के आंसुओं ने एक दूसरे के कंधों को भिगोया। इसी बीच सारा का सारा दर्द भी इन आंसुओं के साथ बह गया।नानी के चेहरे पर सुकून देती मुस्कुराहट तैर गई। मोहित और पारुल साथ ही सारे काम करते और आगे की कहानियों को बुनते। साथ रहते रहते दोनों ने आखिरकार एक दूसरे का साथ जीवनभर के लिए मांग लिया। अब पारुल और मोहित एक दूजे के हो गए। मोहित के रूप में पति को पाकर उसकी सारी ख्वाहिशें रंगीन हो गई।


सावन का महीना फिर दस्तक देने के लिए तैयार था। हरियाली से सनी प्रकृति का रूप निखर गया था। इस बार पारुल का रंग रूप भी निखर गया था।

मन के अरमान जाग रहे थे और कुछ सिलवटें कम होती जा रही थीं। एक दिन जब पारुल बालकनी से बारिश की फुहारों को महसूस कर रही थी। तभी मोहित ने आकर कहा, "सावन की बारिश में मैं तुम्हारे साथ भींगना चाहता हूं। सारी जिंदगी मैं तुम्हारे मांग में सावन का रंग खिलाना चाहता हूं। हम दोनों के दिल एक हैं, और मैं तुम्हें अपना सबकुछ मानता हूं।"

क्या तुम मेरी सावन की पहली बारिश बनोगी? जिसके लिए पूरी प्रकृति इंतज़ार करती है?" इतना कह कर मोहित ने उसके हाथों को थामकर उस पर मेंहदी से दिल बना दिया। कलाई में हरी चूड़ियां खनकने लगी, जिससे बरसात की बूंदें कदमताल करने लगी।


यह सब देख कर पारुल की आंखें नम हो गई क्योंकि अब ख्वाबों के पूरे होने का समय आ गया था। उसका सावन सबसे रंगीन और हसीन था। इस तरह पारुल की शादी का पहला सावन खूबसूरत याद बनकर दिल में बस गया।


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