सावधान
सावधान
पुष्पा जिस प्रकार छोटी उम्र की लड़कियों ने देश में माहौल तैयार कर दिया है।
वह उनकी ही जान का दुश्मन बन गया है।
पुष्पा जिस प्रकार आजकल छोटी उम्र की लड़कियां बॉयफ्रेंड बॉयफ्रेंड खेल रही है।
वह उनके जीवन के लिए चलता फिरता जहर है।
जिसे वे समझ पाने में नाकाम हो रही है।
पुष्पा ने कहा आप छोटी उम्र की लड़कियों तक की सीमित रह गए।
जबकि आज के आधुनिक युग में आज के डिजिटल युग में बॉयफ्रेंड बॉयफ्रेंड का भूत इतना चढ़ चुका है।
वे अपने पति को छोड़कर विदेश में भी जाने से नहीं चूक रही।
वे अपने पति को छोड़ दूसरे देश में शरण लेने को भी लालायित रहती है।
मैंने कहा पुष्पा छोटी उम्र की लड़कियों से मेरा तात्पर्य है। 10 से 18 10 से 19 19 से 20 साल उम्र की लड़कियां।
जिन्होंने अपने स्टेटस के लिए बॉयफ्रेंड होना अति आवश्यक मान लिया है।
पुष्पा आजकल के युग में लड़कियां प्रेम की आड़ में प्रेम दीवानी हो रही है।
आजकल के युग में लड़कियां प्रेम की आड़ में हवस के गर्म बाजार में फंसती चली जा रही है।
आजकल के युग में हर कोई लड़की प्रेम पुजारिन बन रही है।
जो यह तक नहीं जानती जिस गुमनामी के दलदल में वह फंस रही है।
वहां से समाज में वापस आने का कोई रास्ता नहीं है।
पुष्पा ये मासूम लड़कियां यह तक समझ पाने में असमर्थ है।
जिसे वह प्यार समझ रही है। वास्तव में वह प्यार है ही नहीं।
जिसे वह प्यार का नाम दे रही है। वास्तव में वह एक ऐसा बुरा ख्वाब है।
जिसका रास्ता रखैल शब्द की तरफ जाता है।
जिसका रास्ता मंडी की तरफ जाता है।
जिसका रास्ता जिस्म के शिकारियों की तरफ जाता है।
लड़कियां जिस प्रेम की राह को ये फूलों की सेज समझ रही है।
वह जीवन के कटु सत्य से परिचित नहीं है।
वह यह तक नहीं जानती प्रेम फूलो की सेज नहीं।
वह प्रेम की डगर हवस के भूखे भेड़ियों पर जाकर समाप्त होती है।
पुष्पा ने कहा यह सब आप क्या कह रहे हो।
क्यों किसी लड़की को डराने का प्रयास कर रहे हो।
मैंने कहा पुष्पा ये लड़कियां अगर डर जाती। तब भी मैं सुकून कर लेता।
मैंने कहा पुष्पा ये लड़कियां अगर डर जाती। मैं तब भी सब्र कर लेता।
क्योंकि मैं जानता हूँ इनके माता-पिता का सहारा इन्हें गलत राह पर चलने नहीं देगा।
परंतु जब ये स्वयं भूखी नंगी प्रेम में पागल प्रेमिका की तरह अपने माता-पिता का घर छोड़कर अपने होने वाले प्रेमी से पति की तरफ जा रही होती है।
तब वह पहल उन्हें आनंदित अवश्य करती है।
परंतु वह यह भूल जाती है। प्रेम कभी भी माता-पिता के घर को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करता।
वह ये भी भूल जाती है। जिस प्रेम की राह पर वे चल पड़ी है। वह सिर्फ और सिर्फ जीवन में घने काले साय है। जो जीवन भर उठे रुलाएंगे।
जहां उन्हें अपनी ही सूरत डराने लगेगी।
जहां अपनी ही सूरत देख-देख कर रोना आने लगेगा।
जहां ममता से मुमताज बनने में देर नहीं लगेगी।
जहां ममता से बानो बनने में देर नहीं लगेगी।
जहां करीना से खान बनने में देर नहीं लगेगी।
पुष्पा प्यार अंधा होता है। ऐसा मैंने फिल्मों में कई बार देखा है। ऐसा मैंने फिल्मों में कई बार सुना है।
परंतु प्यार मूर्ख होता है। यह पहली बार समझ पा रहा हूँ।
प्यार फूहड़ होता है, प्यार डरपोक होता है।
प्यार माता-पिता के घर से भागने पर मजबूर करता है।
यह पहली बार समझ पा रहा हूं।
प्यार ना समझ होता है। प्यार दुखों का समुद्र होता है। प्यार पथरीली कांकरी से बनी राह होता है। यह पहली बार समझ में आ रहा है।
प्यार गुमनाम गलियों की रानी बना देता है।
प्यार हर शाम परवान चढ़ता है।
प्यार हर बाजार में नीलाम होता है।
प्यार हर प्यासे दिलों की प्यास बुझाता है।
यह मुझे पहली बार समझ में आ रहा है।
पुष्पा आपने वह मधुर गीत अवश्य सुना होगा।
यह इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजिए।
एक आग का दरिया है डूब कर जाना है।
इस प्यार के समंदर से कोई पार नहीं पा सका।
आज तक जो भी लड़की अपने माता-पिता के घर रूपी सुख सागर से प्रेमी के लिए भागी है।
वह आज भी उस दिन को कोस रही है।
आखिर उसकी बुद्धि पर उस दिन क्यों कर पत्थर पड़ गए थे।
क्यों उसे प्रेम का भूत सवार हो गया था।
क्यों आज उसे लेने के देने पड़ रहे हैं।
पुष्पा यह बात स्पष्ट है जिस लड़की ने माता-पिता की दहलीज प्रेम के लिए लांघी है।
वह जिस्म के बाजार में नीलाम हुई है।
जिस लड़की ने भी माता-पिता की दहलीज अपने प्रेमी के लिए भाग कर लांघी है।
उसने एक नहीं ना जाने कितने लोगों के दिल पर राज किया है।
पुष्पा आपने वह मधुर गीत अवश्य सुना होगा।
खातूबा मैं बनूंगी किस-किस की महबूबा।
यही हाल होता है जो लड़की माता-पिता के घर से भागती है।
पुष्पा ने कहा लड़कियों सावधान हो जाओ।
अपने आप से यह मत कहो खुद ही मर मिटने की जिद है हमारी।
अपने जीवन को बर्बादी की राह प्रेम के डगर में मत चलाओ।
प्रेम की डगर से भी बेहद जरूरी है। अपने माता-पिता का घर।
कभी भी भाग कर प्रेमी के लिए घर मत छोड़ो। हो सके तो प्रेमी को छोड़ दो। माफ करना हो सके तो नहीं।
जी हां अपने प्रेमी को छोड़ दो।
सावधान रहो सतर्क रहो कोई भाग कर आपको अपने घर की मालकिन रानी बनाने के लिए नहीं ले जा रहा है।
अपना जीवन भागने के कारण नरक में मत डालो।
सावधान रहो आबरू लूट जाने के पश्चात एक ही विकल्प रहता है।
दुर्भाग्य रोना चीखना चिल्लाना खामोशी से।
जो कुछ जीवन में व्यतीत हो रहा है। उसे अपना भाग्य मान लेना।
इसलिए कहता हूं सावधान हो जाओ।
लड़कियों यह समाज तुम्हें आम नींबू की तरह निचोड़ कर फेंक देगा।
माता-पिता के घर से भाग कर अपना जीवन नष्ट मत करो।
सावधानी बरत कर अपना तथा अपने माता-पिता का नाम रोशन ना कर सको।
तो कम से कम अपनी लापरवाही से अपनी कमियों के कारण अपने जिस्म की हवस मिटाने के लिए उन्हें बदनाम मत करो।
सावधान रहो सतर्क रहो।
यही अच्छे स्वास्थ्य, अच्छे भाग्य, अच्छे स्वाभिमान एवं सम्मानित जीवन का मूल मंत्र है।*
इतिश्री
